सीधे मुख्य सामग्री पर जाएं

डेंगू ज्वर

यह ज्वर डेंगू मच्छर काटने से मनुष्य को होता हें। डेंगू ज्वर एक विशेश प्रकार के मच्छर काटने से बैक्टरिया प्रभाव से उत्पन्न होता है जो शरीर के जोंड़ो मे तीव्र पीड़ा के साथ सिरदर्द के साथ ज्वर उत्पन्न करता है।
लक्षण-
1. भयानक तेज सिरदर्द व बुखार का होना
2. मांसपेशियों तथा जोंड़ों मे दर्द।
3. आंखों के पीछे दर्द जो आंखों के घुमाने से बढता है। कभी ठंड भी लगती है।
4. जी मतलाना एवं उल्टी होना।
5. गंभीर मामलों मे नाक और मसूड़ों से खून आना या त्वचा पर चकत्ते पड़ना।
विशेष लक्षण-
1. डेंगू होने पर रक्त मे प्लेलेटस की संख्या जो 2 लाख से ढाई लाख होती है। अचानक कम हो जाती है। और 50, हजार से भी कम हो जाती है।।
2. रक्त मे श्वेत कणों की अचानक संख्या भी कम हो जाती है।
बचाय के उपाय
1. ज्वर होने पर डेंगू रोग की जंाच निकट के सरकारी अस्पताल मे तुरन्त करायें।
2. डेंगू फैलाने वाला मच्छर रूके हुये साफ पानी मे पनपता है। अतः अपने घर के आस-पास पानी ना इकठ्ठा होने दें। जैसे कूलर पानी की टंकी पशु पक्षियों के पानी पीने के बर्तन, फ्रिज की टेª, फूलदान, नारियल के खोखे, टूटे हुये बर्तन, प्लास्टिक के डिस्पोजल बर्तन, (गिलास, दोने) आदि।
3. पानी से भरे हुये बर्तनों, टंकियों को ढक कर रखें।
4. प्रत्येक सप्ताह कूलर को खाली करके सूखा करके ही प्रयोग मे लायें।
5. डेंगू मच्छर दिन मे ही काटता है। अतः दिन में ऐसे कपड़े पहने जो बदन को पूरी तरह ढके रखें।
6. मच्छर रोधी क्रीम, क्वाइल, रिपिलेंट, ओडोमास यथा संभव पूरे शरीर मे दिन मे और सोते समय अवश्य लगायें।
प्रमुख बचाव और चिकित्सा
1. पपीते के पत्ते का रस तीन चम्मच सुबह शाम लें।
2. सत गिलोय 250 मिग्रा शहद से सुबह शाम देना चाहिये।
इससे रक्त की ब्लड प्लेलेटस की संख्या बढती है। और ज्वर कम होता है।
3. ठंडी चीजें और चावल नही देना चाहिये।
4. स्वर्ण बसन्त मालती रस 1-1 गोली या टैब सुबह शाम देना चाहिये।
5. विषम ज्वरान्तक रस 1-1 टैब 3 ग्राम ताली सादि चूर्ण मे मिला कर शहद के साथ सुबह शाम देना चाहिये।
6. सर्वाग्ड़ सुन्दर रस 1-1 टैब या गोली शहद से सुबह शाम दूध मे प्रोटिनेक्स मिला कर लें।
7. दशमूल क्वाथ 4-4 चम्मच सुबह शाम नाश्ते के बाद पिये।
8. रामबाण रस व महा सुदर्शन घनवटी 1 टैबलेट सुबह शाम नाश्ते के बाद लें।
9. संजीवनी वटी 1 गोली 100 मिग्रा तथा लक्ष्मी विलास रस गुनगुने पानी से सुबह शाम नाश्ते के बाद लें।
10. लौह भस्म 100 मिली तालि सादी चूर्ण 3 ग्राम शहद से सुबह शाम नाश्ते के बाद लें।
11. ठंड लगने पर आनंद भैरव रस या महामृत्युन्जय रस 1 टैब तालि सादी चूर्ण में मिला कर शहद से सुबह शाम नाश्ते के बाद लें।
12. महाज्वरांकुश रस 200 मिग्रा 3 ग्राम तालि सादी चूर्ण में मिला कर शहद से सुबह शाम नाश्ते के बाद लें।


इस ब्लॉग से लोकप्रिय पोस्ट

पक्षी आपका भाग्य बदले

मनुष्य का जीवन अपने आसपास के वातावरण से ही प्रभावित होता है। व्यक्ति के आस-पास के पशु पक्षी उसके जीवन का अभिन्न अंग है। भारतीय ऋर्षियों तथा संसार के अध्यात्मवादियो ने संसार के पक्षियों को ना केवल ज्योतिष तथा मनुष्य के भाग्य से जोड़ा है। बल्कि पक्षियों को उपयोग शकुन ज्योतिष, फलित तथा प्रष्न ज्योतिष तथा अनेकों ज्योतिष, तांत्रिक उपचारों और शारीरिक मानसिक रोगों के निवारण में किया है। भारत मे पंच प़क्षी शास्त्र, कल्ली पुराण पर आधारित तोते द्वारा भविष्यवाणी, पक्षी तंत्र तथा शकुन ज्योतिष का प्रयोग आदिकाल से ही किया जाता है भारत मे गरूड़ जी, नीलकंठ, काकभुषुंडी,, हंस, जटायु व संपाती, शुकदेव जी आदि दिव्य पक्षियों तथा अनेक देवी देवताआंे वाहन के रूप मे पक्षियों को प्रयोग किये जाने का  वर्णन है। जैसे भगवान विष्णु का गरूड़, कार्तकेय जी का मयूर, माता लक्षमी का उल्लू, विश्वकर्मा, वरूण जी तथा स्वरसती जी का हंस आदि शनिदेव का कौआ आदि का प्राचीन काल मे पक्षियों द्वारा डाक सेवा युद्ध संबधी शकुन का भी काम लिया जाता था पक्षियों को स्वतंत्रता, नवीन विचारों, आनंद, तनाव, मुक्ति, प्रषंसा, यष, धन्यवाद देने, प्रजनन श

परिवर्तन योग से करें भविष्यवाणी

भारतीय ज्योतिशशास्त्र में भविष्यकथन के सैकड़ों सूत्रो का वर्णन है। इन्ही सूत्रों मे से एक है परिवर्तन योग जिसका वर्णन पाराशरीय और नाड़ी ग्रन्थों दोंनों मे पाया जाता है। हाँलाकि दोनो प्रकार के ग्रन्थों में इन सूत्रों को विभिन्न तरीको से प्रयोग किया गया है ज्योतिष मे परिवर्तन योग के तीन रूप पाये जाते हैं। 1. भाव परिवर्तन 2. राशि परिवर्तन 3. नक्षत्र परिवर्तन  भाव परिवर्तन पाराशरीय व कुछ नाड़ी ग्रन्थों जैसे षुक्र नाड़ी मे इसके सूत्रो का वर्णन पाया जाता है। जो भावा के स्वामियो के बीच स्थान परिवर्तन से बनता है। जैसे चतुर्थेश षष्ठ भाव मे जाय और षष्ठेश चतुर्थ भाव मे जाय। इसके भी तीन भेद हैं। 1. दो शुभ भावों के स्वामियों का परस्पर परिवर्तन जैसे लग्न व पंचम भाव का परिवर्तन या दो केन्द्रेशों का परिवर्तन या केन्द्र और त्रिकोण भाव मे परस्पर परिवर्तन। 2. दो त्रिकेशांे का परिवर्तन जो विपरीत राजयोग बनाता है। 3. किसी केन्द्रेश या त्रिकोणेश का त्रिकेश से परिवर्तन। जैसे दशमेश का द्वादेश से परिवर्तन या पंचमेश या द्वादेश के बीच परिवर्तन। 2. ग्रह या राशि परिवर्तन  इसका वर्णन स्व. आर. जी. राव द्वारा अनुवादित और

जेल जाने के योग

ज्योतिष शास्त्र अनुसार कुंडली के आठवें मतांतर से बारहवें भाव से कारावास तथा सजा का विचार किया जाता है। कुंडली के इस घर में राहु अगर अष्टमेश के साथ हो तो उसके अशुभ प्रभाव के कारण व्यक्ति को किसी बड़े अपराध के कारण जेल जाना पड़ता है। शनि  मंगल और राहू मुख्य रूप से यह तीन ग्रह एवम् इनका आपसी सम्बन्ध जेल के कारक है। शनि व 12 भाव सजा का कारक है। छठा भाव व मंगल राहू अपराध के कारक है। अगर किसी व्यक्ति की कुण्डली में मंगल और राहु एक साथ किसी भाव में बैठकर युति करते हैं तो जेल योग बनता है केतु रस्सी बेड़ी हथकड़ी का कारक ग्रह हैं अशुभ मंगल व राहु के बीच दृष्टि संबंध बनता हो तो अंगारक योग की वजह से ऐसा इंसान हिंसक स्वभाव वाला हो जाता है और अपराध करता है जिससे जेल जाना पड जाता है। शनि मंगल व राहु मुख्य रूप से जेल यात्रा कराने का भी योग बनाते हैं और इनकी युति या आपस में दृष्टि इस तरह की स्थितियां बना देती है कि आखिर इंसान को जेल जाना ही पड जाता है। जन्मकुंडली में सूर्यादि ग्रह समान संख्या में लग्न एवं द्वादश तृतीय एवं एकादश, चतुर्थ, दशम, षष्ठ एवं अष्टम भाव में स्थित हो तो यह बंधन योग बनाता है यह स्थिति