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डिजिटल युग के बच्चे कुछ ज्यादा ही संवेदनशाील हैं

पिछले कुछ दशकों में मानव ने तकनीकी प्रयोग से प्रत्येक क्षेत्रों में उन्नति की है, जोकि प्रशंसनीय है, साथ ही भारतीय समाज में निरन्तर संयुक्त परिवार का एकाकी परिवार में विभक्त होना, जहाँ माता-पिता दोनों ही कार्यरत है, उनका बच्चों को उचित एवं पर्याप्त समय न दे पाना, उनमे परस्पर संवाद न होना एक विचारंणीय विषय है। यह संवादहीनता उस समय अत्यधिक दुःखदायी होती है, जब उनका पाल्य किशोरावस्था 10 से 19 वर्ष की दहलीज पर खड़ा होता हैं। किशोरावस्था को जीवन का वसंतकाल माना गया है। किशोर अपने मन की उलझनों को सांझा तय करना चाहता है, परन्तु डर व झिझक के कारण 72 फीसदी किशोर माता-पिता से अपनी सभी बातें नही कह पाते है, जिससे उनके बीच गलतफहमी रहती हैं और मित्रों से सांझा करने के पश्चात हंसी के पात्र बनते है या गलत सुझाव प्राप्त करते हैं। मोबाईल और कम्प्यूटर के अधिक प्रयोग की वजह से 64 फिसदी किशोर व उनके अभिभावकों के बीच दूरियाँ बढ़ रही हैं। 63 फीसदी किशोर कहतें है कि घर में उनकी बात नही मानी जाती अथवा राय नही ली जाती तो उन्हें अधिक गुस्सा आता हैं। 16 फिसदी मे गुस्सा व तनाव महसूस होने पर नशा करने की इच्छा जागृत होती हैं। 61 फिसदी किशोर बताते है कि माता-पिता उनसे परीक्षा में सर्वोच्च अंक प्राप्त करने के लिए दबाव बनाते हैं, अच्छा प्रदर्शन न कर पाने पर 48 फिसदी खुद को नुकसान पहुँचाना चाहते है। 60 फिसदी किशोरों में अकेलेपन की वजह से आत्मविश्वास की कमी रहती है, 50 फिसदी किशोरों मे हीन भावना रहती है और असफल हारने का डर सताता रहता है। परिवार में उचित वातावरण न मिलने पर 43 फिसदी किशोर घर छोड़कर भाग जाना चाहते हैं। 39 फिसदी किशोरों को लगता है कि उनके दोस्त के माता-पिता अधिक अच्छे हैं। 84 फिसदी बताते है कि मैं जो पढ़ना अथवा करना चाहता हूँ, यदि माता-पिता अनुमति दें तो मैं बेहतर प्रदर्शन कर सकता हूँ, अत्यधिक दबाव अथवा तनाव होने पर 30 फिसदी किशोरों में आत्महत्या का विचार आता है। 85 फिसदी अधिकांशतः परार्मशक की आवश्यकता महसूस करते हैं। ऐसे में अभिभावकों को चाहिए कि बच्चों को डांटने के बजाए उन्हें दोस्ताना माहौल प्रदान करें, बच्चे के लिए संवाद के सभी रास्ते खोले, जिससे बच्चों का उचित मार्गदर्शन हो सके, डिजिटल युग के बच्चे कुछ ज्यादा ही संवेदनशाील हैं, उन्हें समझाने पर ज्यादा जोर देने के बजाय उन्हें समझने की कोशिश करें, उन्हें कहने का मौका दें, आवश्यकता पड़ने पर परार्मश से अवश्य संपर्क करें।


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पक्षी आपका भाग्य बदले

मनुष्य का जीवन अपने आसपास के वातावरण से ही प्रभावित होता है। व्यक्ति के आस-पास के पशु पक्षी उसके जीवन का अभिन्न अंग है। भारतीय ऋर्षियों तथा संसार के अध्यात्मवादियो ने संसार के पक्षियों को ना केवल ज्योतिष तथा मनुष्य के भाग्य से जोड़ा है। बल्कि पक्षियों को उपयोग शकुन ज्योतिष, फलित तथा प्रष्न ज्योतिष तथा अनेकों ज्योतिष, तांत्रिक उपचारों और शारीरिक मानसिक रोगों के निवारण में किया है। भारत मे पंच प़क्षी शास्त्र, कल्ली पुराण पर आधारित तोते द्वारा भविष्यवाणी, पक्षी तंत्र तथा शकुन ज्योतिष का प्रयोग आदिकाल से ही किया जाता है भारत मे गरूड़ जी, नीलकंठ, काकभुषुंडी,, हंस, जटायु व संपाती, शुकदेव जी आदि दिव्य पक्षियों तथा अनेक देवी देवताआंे वाहन के रूप मे पक्षियों को प्रयोग किये जाने का  वर्णन है। जैसे भगवान विष्णु का गरूड़, कार्तकेय जी का मयूर, माता लक्षमी का उल्लू, विश्वकर्मा, वरूण जी तथा स्वरसती जी का हंस आदि शनिदेव का कौआ आदि का प्राचीन काल मे पक्षियों द्वारा डाक सेवा युद्ध संबधी शकुन का भी काम लिया जाता था पक्षियों को स्वतंत्रता, नवीन विचारों, आनंद, तनाव, मुक्ति, प्रषंसा, यष, धन्यवाद देने, प्रजनन श

परिवर्तन योग से करें भविष्यवाणी

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जेल जाने के योग

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