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कर्जा लेते समय व्यक्ति को ज्योतिष शास्त्र के नियमों का पालन करना चाहिए

कर्जा भारतीय समाज में कभी सम्मान जनक वस्तु नहीं रहा है। प्राचीनकाल में महापुरूषों ने सदा ही समाज को कर्जे से बचने की सलाह दी, फिर भी समाज में मनुष्य को जीवन में कभी ना कभी कर्जा लेना ही पड़ जाता है। आज के दौर में देश और विश्व में नई व्यवस्थायें जन्म ले रही है। असंख्य वित्तीय संस्थाओं, सामाजिक मूल्यों, मापदण्डो, तथा जीवन शैली और जीवन के उद्देश्यों में आमूल-चूल परिवर्तन आ चुका है। कर्जा सामाजिक सम्मान व स्टेटस का प्रतीक माना जाता है। बशर्ते वह व्यक्ति की समाजिक, आर्थिक हैसियत में सकारात्मक वृद्धि करे। आज की युवा पीढ़ी कर्ज लेकर पहले अपनी हैसियत व साधन बढ़ाती है, बाद में धीरे-धीरे उसका भुगतान करती है। ऐसे लाभकारी कर्जो व भविष्य में लाभकारी आगामी जीवन को समृद्ध बनाने वाले कर्जो की उपयोगिता से इनकार नही किया जा सकता है। लाभकारी कार्यो में उच्च शिक्षा हेतु कर्ज, विदेश यात्रा, उच्च नौकरी प्राप्ति हेतु कर्जे, व्यापारिक और औधोगिक परियोजनाओं हेतु कर्ज मकान निर्माण के कर्जे आदि लाभकारी कर्ज है। जबकि रोग, मृत्यु संस्कार, विवाह, कर्जा चुकाने हेतु या महात्वाकाक्षंओं की पूर्ति के लिये गये कर्जे भी है। कर्जे कभी-कभी बहुत मुसीबत बन जाते है। व्यक्ति को आत्महत्या भी करनी पड़ती है।
किसी भी कारण से व्यक्ति को कर्जा लेना पड़े। तो कर्जा लेते समय व्यक्ति को ज्योतिष शास्त्र के नियमों का पालन करना चाहिए। ताकि कर्जा शीघ्र उतर जाये और मुसीबत ना बने।
- चतुर्थी, नवमी, एकादशी, अमावस्या को कर्जा ना ले।
- मंगलवार, शुक्रवार और रविवार को कर्जा ना लें।
- आद्र्रा, पुनवर्सु, आश्लेषा, मघा, पू.फा., उ फा. हस्त, मूल, पू. षाढ़, उ. पाढ़ा पू. भाद्र, उ. भाद्र, नक्षत्रों में कर्जा नालें।
- दैनिक होरा-चक्र के अनुसार सूर्य होरा, मंगल होरा व शुक्र होरा में कर्जा ना लें।
- कर्जा लेने के लिये चर लग्न सर्वोत्तम है स्थिर लग्न व द्विस्वभाव की लग्ने महाविनाश कारी है।
कर्जा लेने का मूहूर्त
कर्जा लेने की शुभ तिथियाँ
कृष्ण पक्ष की 1, 2, 3, 4, 6, 7, 8, 10, 11, 12, 13 तिथियाँ व शुक्ल पक्ष में पूर्णिमा।
शुभवारः-
सोमवार, बुद्धवार और गुरूवार।
शुभ नक्षत्रः-
आश्लेषा, रोहणी, मृगशिरा, पुनर्वसु, पुष्य, श्रवण, घनिष्ठा, शतभिषा और रेवती।
शुभलग्नः-
चर लग्न 1,4,7,10।
ज्योतिष में कर्जे के प्रमुख कारक ग्रहों में मंगल व केतु ग्रह की प्रमुख भूमिका है। कर्जा मुक्ति के समस्त उपाय, अनुष्ठान व मंत्रोपचार इन दोनों ग्रहों से संबन्धित होते है।
ऋण नाशक गणपति स्त्रोत केतु के अन्र्तगत आते है। गणेश जी की उपासना बुध ग्रह को भी लाभ प्रदान कराती है। मंगल कवच, श्रृण मोचन स्त्रोत तथा मंगल के अन्य मंत्रोपचार मंगल ग्रह के अधीन आते है।
मंगल कर्ज, मकान, संपत्ति, हिंसा, मारपीट, हत्या, आत्महत्या का भी कारक ग्रह है। अत्यधिक कर्जा इन चीजो से भी व्यक्ति को हानि देता है। संपत्ति कारक मंगल का शनि नैसर्गिक शत्रु है। अतः यदि शनि या मंगल ग्रह का अशुभ प्रभाव हो तो जातक की संपत्ति बिक या नीलाम हो जाती है। कर्जे से मुक्ति के व्यावहारिक उपचारो में सर्वप्रथम मनुष्य को बुध ग्रह तथा शुक्र ग्रह को बली करने के उपाय करना चाहिये। मकान के दक्षिण व पश्चिम में बड़े छायादार वृक्ष लगाये व उत्तर दिशा में फूलों व सब्जियों का बगीचा लगायें। हरा, गुलाबी, आसमानी रंग की वस्तुओं का भरपूर प्रयोग करें। और पीली व लाल रंग की वस्तुओं एवं क्रोध, पित्त विकार से बचें। कुछ ना कुछ करते रहे। आय वृद्धि के उपाय करते रहे। नई योजनाओं के क्रियान्वन हेतु विष्णु सहस्त्र नाम का पाठ करे। आयवृद्धि हेतु श्री सूक्त लक्ष्मी कवच का पाठ करे, संपत्ति संबन्धी कर्ज हेतु गजेन्द्र मोक्ष और ऋण मुक्ति गणेश स्त्रोत का पाठ करे तथा मंगल व केतु की वस्तुओं को प्रत्येक मंगलवार को दान करे। लाल वस्त्र, लाल मसूर की दाल, लाल पेड़ा, लाल मिर्च, लाल फल, सेब, बूँदी, बाजरा, दुरंगे फल वस्तुयें कंबल, वस्त्र आदि तथा मकान के दक्षिण में स्थित वास्तु दोषों का समुचित उपाय करे। यदि दक्षिण में खाली जगह हो तो वहाँ उँचे छायादार वृक्ष लगायें। इससे जातक को कर्जे से मुक्ति मिल जायेगी।


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