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सफलता और प्रगति कराये गुरू

ज्योतिष में गुरू धर्म, मठ, गुरू, साधू उन्नति के अवसर आशावाद, आर्शीवाद वरदान दैवकृपा पुण्य, अध्यात्म, तीर्थस्थान, बैंक, मैनेजर, प्रिंसपल, विभाग प्रमुख, प्रवक्ता, पूंजीपति, वकील, न्यायाधीश, सलाहकार, ज्योतिषी, पूजापाठ, हवन, पुजारी पंडित, पुत्र व संतान, धन, पीला रंग, सूदखोर, ब्राह्मण, धार्मिक पुस्तक, केला चने की दाल, पीपल का पेड स्वर्ण धातु, उच्च पद, रोग से मुक्ति, कैद से मुक्ति, सौभाग्य, लीवर व आंत के रोग, चर्बी, टयमूर, ज्योतिष, उदारता, दयालुता का कारक ग्रह है। गुरू कर्क में उच्च का व मकर में नीच का होता है। धनु व मीन स्व राशियां है। सूर्य, मंगल, केतु व चन्द्र गुरू के मित्र व शनि, राहू, शुक्र बुध शत्रु ग्रह हैं। शनि सम ग्रह हैं।
गुरू के कुछ अशुभफल और उनके समाधान:-
गुरू-सूर्य योग नाक, कई नौकर, संबधियों में प्रमुख पद पाये, मायके व ससुराल मे प्रतिष्ठा मिले, पुत्र प्रदान करें, पुत्र यशस्वी, विशेष शिक्षा प्राप्त करे विनम्र बुद्धिमान सम्मानित हो समाजसेवा में लगा रहें।
चन्द्र गुरू:-
आपरेशन से रक्षा, सही फैसलों से भाग्य का निर्माण, जन्म स्थान से दूर नौकरी व निवास। गुरू नीच के चन्द्र से युत कुलटा स्त्री से संबध। जातक का भाग्योदय जन्म स्थान से दूर स्थान पर होगा, जातक बुजुर्गों व पुरखों का सम्मान करे।
गुरू-मंगल योगपुत्र प्रदान करे जातक क्रोधी अहंकारी हो पित्त रोगी व रक्तचाप की रोगी हो मंगल गुरू योग आपेरशन से सुरक्षा आय देने वाली जायदाद हो जातक के पास जमीन हो भाई व पति उच्च पद पर।
गुरू-बुध जातक शिक्षित अति बुद्धिमान हो, जमीन से युत, अचानक किसी सम्भ्रान्त परिवार की उदार लड़की से मित्रता हो जातक प्राप्त विद्या द्वारा धन कमाये ज्योतिषी शिक्षक या बैंक कर्मचारी हो। मित्र द्वारा लाभ हो गुरू जिनसे जीवन में भारी लाभ।
गुरू:- अति कामी हो, पत्नी चरित्रवान हो, विवाद बहस में रूचि, कम आय के भी बाद पारिवारिक जरूरतें पूरी हों। पत्नी का तेजस्वी चुबंकीय चेहरा एक पुत्री शिक्षित, गुणवान व भाग्यशाली हो।
गुरू-शनि ब्रह्म योग अति प्रसिद्ध नाक व गाल सुंदर शुरू में सामांय बुद्धि होेने पर भी जातक कुछ सालों मे नाम व यश कमाये वह डाक्टर, विभागाध्यक्ष, प्रिंसपल, मैनेजर, न्यायाधीश या मठाधीश हो, वह शांत और सुखी हो गैस और अपच का रोगी हो। स्त्री जातक मे जंम से सम्मान प्रतिष्ठा भारी सौभाग्य पाये अमीरों से लाभ हो परिवार की समृद्धि बढाये पति लाचार हो।
गुरू-राहू योग प्रसिद्ध स्थान पर जन्म ले जन्म के पहने साल मे बड़ा खतरा आये संदर और गोलाकार शरीर का हो भाई से कष्ट होगा कई विधाओं का ज्ञान हो, कई स्थानों की यात्रा करे, पोलियो या पैर के रोगों गठिया आदि से पीड़ित हो 30 वर्ष में खतरा आये मोटापा व मानसिक रोग का खतरा, जातक का बाबा दयालु यशस्वी, और राज दरबार से सम्मनित होगा और धन, जमीन जायदाद से युक्त होंगे।
गुुरू-केतु पित्त रोगी वैदिक ज्ञान मे निपुण, एकांतवासी यश की ईच्छा नही अध्यात्म मे प्रगति करे संयासी हो किसी बड़े संत की समाधि या मजार वाली सड़क पर घर हो।
गुरू के कुछ अशुभफल और उनके समाधान-
1. गुरूवार का व्रत करें।
गुरूवार कों पीली वस्तयें, हल्दी, केसर, पीला वस्त्र, बूंदी का लडडू, बेसन के लडडू, धार्मिक पुस्तकें, ब्राह्मण को दान करें।
3. शिवजी एवं सत्य नारायण देव व गुरूवर पूजा करें।
पंचमुखी रूद्राक्ष घारण करे।


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