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श्रवण विकलांगता

ऐसी बानी बोलिये, मन आपा खोये, औरन को शीतल करे, आपहु शीतल होये। -संत कबीर
इन शब्दों में संत कबीर ने मीठी वाणी के प्रभाव को समझाया है, पर यदि हम किसी व्यक्ति अथवा वक्ता को सुनने पर उसकी बोली समझ ही न पायंे तो हमपर उसका कोई प्रभाव नही पड़ता है। हम सभी अपनी मातृभाषा केवल इसलिए सीख जाते है, क्योंकि हमें केवल वही भाषा सुनाई पड़ती है, परन्तु एक बधिर बच्चा केवल इसलिए मूक (गूंगा) रह जाता है, क्योंकि उसे भाषा सुनने का अवसर ही नही मिलता है। इसलिए श्रवण शक्ति का महत्व भाषा के विकास में सर्वोपरि होता है।
प्रौढ़ तथा वृद्वावस्था में भी श्रवण इतना ही आवश्यक होता है। परन्तु आयु के बढ़ते रहने के लक्षण जैसे कि वालों को सफेद होना, चेहरे पर झुर्रियां उभरना, और दृष्टि में कमी के कारण साफ न दिखना, इसी प्रकार श्रवण हृास भी एक प्राकृतिक घटना होती है। अन्य सभी लक्षणों की तरह ही यह घटना भी इतनी धीमी गति से होती है कि हमें इसके कम होने का आभास ही नहीं हो पाता है।
जैसे दृष्टि के लिए ऐनक, वैसे ही श्रृवण ह्नास के लिए श्रवण यंत्र एक विकल्प है। पर बहरेपन के लेबल के कारण श्रवण ह्नास से पीड़ित अधिकांश व्यक्ति स्वयं को इस महत्वपूर्ण अनुभूति से वंचित कर देते हैं और सन्नाटे में रहने को ही अपनी नियति मान लेते हैं। यह बात समझना आवश्यक है कि हम श्रवण यंत्र दूसरों के लिए नही बल्कि अपने लिये लगाते है। यानि यह कोई सार्वजनिक उपभोग की वस्तु नहीं है। बल्कि व्यक्तिगत उपयोग की वस्तु है। इस तथ्य को स्वीकार कर जो श्रवण यंत्र लगा लेता है, उसकी परेशानी कम हो जाती है।
जिस प्रकार ऐनक बनवाने से पहले दृष्टि परीक्षण आवश्यक है उसी प्रकार एक प्रषिक्षित श्रवण विशेषज्ञ (आॅडियोलाॅजिस्ट) द्वारा श्रवण आंकलन (आॅडियामेट्री) के बाद ही यंत्र को उसकी आवश्यकतानुसार लगाया जाता है। इसीलिए जैसे एक व्यक्ति का चश्मा दूसरे व्यक्ति को नही लगाया जा सकता उसी प्रकार श्रवण यंत्र भी बिना परीक्षण के नही लगाना चाहिए। समय-समय पर श्रवण परीक्षण से हम सभी हृास के प्रति समय रहते सचेत हो सकते हैं।
श्रवण हृास के कुछ लक्षण
-टी. वी. वाॅल्यूम को अधिक रखने की प्रवृत्ति।
-फोन पर बात समझने में कठिनाई।
-सुनने के लिये किसी एक कान को प्राथमिकता।
-लोगों से बात दोहराने को या ऊंचा बोलने को कहना।
-स्वयं ऊंची आवाज़ में बात करना।
-दूसरों की बोली का अस्पष्ट लगना। यदि ऐसा है तो श्रवण परीक्षण करवायें और अपने यंत्र का स्वयं चयन करंे।
श्रवण यंत्र हमारी प्राकृतिक श्रवण संवेदना को लौटा तो नहीं सकता परन्तु इसके उपयोग से हमारी परेशानी को कुछ कम अवष्य किया जा सकता है और श्रवण विकलांगता से बचा जा सकता है। साथ ही मीठी बानी का आनन्द एक बार फिर से लिया जा सकता है।


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