साधना

फूलों की रानी बहारों की मलिका साधना शिवदासानी का जन्म 2 सितम्बर 1941 को पाकिस्तान के कराची शहर मे हुआ था। 15 वर्ष की उम्र मे ही उन्हें राजकपूर की फिल्म श्री 420 के एक गाने 'मुड़-मुड़ केे ना देख के लिए काम मिला, उसी दौर में हिमालय प्रोडेक्शन के मालिक और हिन्दी सिनेमा के मशहूर फिल्मकार शशिधर मुखर्जी की नजर एक फिल्म पत्रिका मे छपी साधना की तस्वीर पर पड़ी, उससे प्रभावित होकर उन्होंने उसे अपने बेटे और नवोदित अभिनेता जाॅय मुखर्जी के अपोजिट हीरोइन का रोल दे दिया। जिसे एक नये युवा निर्देशक आर. के नैययर निर्देशित कर रहे थे फिल्म जबरदस्त हिट रही और साधना रातों-रात स्टार बन गई। यह फिल्म थी 1959 में आई लव इन शिमला, जिसमे आर.के. नैययर ने साधना के चैड़े माथे को ढ़कने के लिए प्रसिद्ध माॅडल ओडेª हेपबर्न की हेयर स्टाइल की तर्ज पर नई हेयर स्टाइल दी, जो आगे चल कर  साधना कट के रूप मे लोकप्रिय हुयी। उसके बाद राज खोसला की एक मुसाफिर एक हसीना 1962 देवानंद की हम दोनों 1961, ऋषीकेश मुखर्जी की असली नकली 1962, विमलराय की परख 1960, 1963 में एच.एस. रावेल की पहली रंगीन फिल्म मेरे महबूब आई जिसने सफलता के नये कीर्तमान स्थापित किये। जिसके एक सीन के बारे में डैनी साहब ने एक इन्टरव्यू मे कहा था उनकी बुरके से झांकती खूबसूरत आखों के यादगार सीन को मैं आज तक नही भूल पाया हूँ। तभी उनकी वह फिल्म आई जिसने उन्हें ना केवल शोहरत के आसमान पर बिठा दिया बल्कि उन्हें मिस्ट्री गर्ल के खिताब से नवाजा वह फिल्म थी अल्फ्रेड हिचकाॅक की फिल्म र्विटर्गो 1959 परइ आधारित 'वो कौन थी' जो हिन्दी हाॅरर फिल्मों के इतिहास मे मील का पत्थर साबित हुयी। 1964 में आई राज खोसला निर्देशित सस्पेंस कम हाॅरर फिल्म वह कौन थी में भटकती रूह के उनके किये अभिनय ने उन्हें सस्पेंस छवि प्रदान की। आगे चल कर राज खोसला ने उन्हें अपनी अगली मिस्ट्रीरियस फिल्मों मेरा साया 1966 व अनीता 1967 में पेश किया यह फिल्में और  साधना दोनों जबरदस्त हिट रहीं। 1964 में राजकपूर के साथ दुल्हा दुल्हन व शम्मी कपूर के साथ राजकुमार आई। 1965 में आई उनकी यष चोपड़ा निर्मित की फिल्म वक्त में उन्होंने सबसे पहले चूड़ीदार पाजामा व चुस्त सलीम शाही कुर्ता पहना जो उस दौर की युवतियों के लिये नया फैशन टेªण्ड बन गया 1965 में राजेन्द्र कुमार के साथ रामानंद की आरजू आई। 7 मार्च, 1966 को साधना ने आर.के. नैययर से प्रेम विवाह कर लिया। शादी के बाद नेत्र व थायराइड की बीमारी के कारण उन्हें दो साल के लिये फिल्मांे से अलग रहना पड़ा। 1969 मे आई आर के नैययर द्वारा निर्देशित फिल्म इंतकाम व एक फूल दो माली जबरदस्त हिट हुयी। 1970 मे इश्क पर जोर नहीं। 1971 मे साधना की राजेद्र कुमार की होम प्रेडेक्शन फिल्म आप आये बहार आई खूब कामयाब रही 1972 मे सुपरस्टार राजेश खन्ना के साथ आई दिल दौलत दुनिया भी हिट रही 1972 मे उनकी खुद की निर्देशित फिल्म गीता मेरा नाम आई इसमे उनका डबल रोल था। उसके बाद फिल्मों से संयास ले लिया बदकिस्मती से उन्हें कोई औलाद नही हुयी 1959-74 के मघ्य उनकी कुल 33 फिल्में आई। जिनमें से 27 फिल्में सुपर हिट रही। उसके बाद उन्होंने 1995 में अस्थमा से आर.के. नैययर की मौत के बाद उन्होंने खुद को अकेलेपन और खामोशी की दुनिया मे कैद कर लिया 1964 में फिल्म वह कौन थी तथा 1965 मे वक्त के लिये उन्हें फिल्मफेयर के बेस्ट एक्ट्रेस एवार्ड हेतु नामित किया गया 1961 में फिल्म परख के लिये उन्हें और फिल्म को कई एवार्ड मिले सन् 2002 मे अन्र्तराष्ट्रीय भारतीय फिल्म अकादमी ने लाइफ टाइम एचीवमेंट एवार्ड प्रदान किया। 25 दिसम्बर 2015 को कैसर से लंबे समय तक लड़ते हुये 74 वर्ष की आयु मे बंम्बई मे वह मौत के आगोश मे सो गयीं।


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