शिक्षण संस्थाओं की बाजार लगी हुई है

स्वतंत्रता दिवस एवं रक्षा बन्धन की हार्दिक शुभकामनायें! हमारा प्रयास रहता है कि अनेकों समस्याओं के बावजूद  हम अपने पाठकों को सदैव निष्पक्ष और बेबाक रचनाकारों की रचनायें इण्डियन स्पीड के माध्यम से पाठकों तक पहुँचातें रहे। भारत की आजादी के लिए लाखों ज्ञात-अज्ञात लोगों  अपने प्राणों की आहूति दी, उनके महान बलिदान के बाद ही आज हम स्वतंत्र भारत के स्वतंत्र नागरिक हैं। हिंसा सर्वप्रथम मनुष्य के मन में आती है, उसके पश्चात जुबान पर उसके बाद सड़कों पर दिखाई देने लगती है। राजनीतिक पार्टियों के नेताओं के भाषा पर भी नियत्रंण नहीं रहा। वर्तमान दौर में मध्यम और गरीब वर्ग के समक्ष मंहगाई और बेरोजगारी की समस्या और देश के सामने आतंकवाद और सीमा सुरक्षा जैसी विकराल समस्या का समाधान करना अहम है। लेकिन कुछ वर्षो से देखा जा रहा है कि देश में जाति-धर्म के नाम पर अधिक बहस हो रही है। राजनीतिक पार्टियाँ ऐसी भाषाओं का प्रयोग करने लगी कि उन्हें देश और जनता की मूलभूत समस्याओं से दूर-दूर तक कोई रिश्ता नहीं है। राजनीतिक महत्वकांक्षाओं के लिए संघर्ष करते नजर आ रहे हैं। देश में शिक्षण संस्थाओं की बाजार लगी हुई है, संभवतः इसी कारण अब बच्चों में शिक्षकों के प्रति वो सम्मान नहीं रहा। बदलते परिदृश्य में शिक्षकों को आत्म-चिन्तन करना चाहिए कि आखिर पहले जैसा गुरू के प्रति शिष्य के मन मे सम्मान क्यों ओझल होता जा रहा है। जब देश में शिक्षा के स्तर में कोई भेदभाव नही रहेगा निश्चित सब कुछ स्वतः ही शनैः शनैः सामान्य होने लगेगा। दूसरी ओर जगह-जगह प्राइवेट डाक्टरों और नर्सिग होमों की होड़ लगी हुई है। सरकारी तौर पर औपचारिकतायें पूर्ण करने का ही नियंत्रण है और सभी जगह अपनी मनमानी तरीकों से काम हो रहा हैं। गरीब जनता का सारा जीवन बच्चों की पढ़ाई और अपने परिजन की चिकित्सा में सारा धन खर्च हो जा रहा है। अधिकांश राजनीतिक लोग इस दिशा में कोई ठोस कदम भी उठाते नहीं दिखते। जिस तरह स्वतंत्रता के पश्चात देसी रियासतों और निजी बैकों का अधिकरण किया गया था। क्या जनहित में शिक्षा-चिकित्सा को आम नागरिकों तक पहुँचाने व बाजारीकरण को रोकने के लिए उन्हें अधिग्रहण करने के लिए साहसी कदम नहीं उठाया जा सकता है?
 जब से केन्द्र में देश में नरेन्द्र मोदी की सरकार बनीं हैं, उसके बाद से ही गरीबों और मध्यम आय वर्ग वालों के हितों लिए सरकार कुछ काम कर रही है। देश में विकास के लिए अनेकों कदम उठाये गये हैं। मोदी सरकार भारत के विकास के लिए निरन्तर काम कर रही है। 73वें स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने भी कहा, 1947 से पहले सभी देशवासियों का लक्ष्य आजादी प्राप्त करना था। इस वक्त हमारा लक्ष्य विकास की गति को तेज करना है। देश का विकास हो सभी देशवासियों सपना भी यही है। इस विकास यात्रा में समानता हो गरीब हो अथवा अमीर हो, इस विकास के दौर में शिक्षा, चिकित्सा और जीवन यापन के लिए सभी में समानता हो, तभी समझा जायेगा कि देश में विकास हुआ है और भविष्य में और विकास होगा।