राहू जन्य कष्ट और उसके उपाय

राहू और केतु अन्य ग्रहों की भांति ही है, राहु और केतु को छाया ग्रह कहा जाता है, दक्षिण भारत में तो लोग राहूकाल में कोई कार्य भी नहीं करते हैं। एक पौराणिक आख्यान के अनुसार दैत्यराज हिरण्य कशिपु की पुत्री सिंहिका का पुत्र स्वरभानु था, उसके पिता का नाम विप्रचित था। देवासुर संग्राम में राहू भी भाग लिया समुद्र मंथन के फलस्वरूप प्राप्त चैदह रत्नों में अमृत भी था, जब विष्णु सुन्दरी का रूप धारण कर देवताओं को अमृत पान करा रहे थे, तब राहू उनका वास्तविक परिचय और वास्तविक हेतु जान गया। वह तत्काल माया से रूप धारण कर एक पात्र ले आया और अन्य देवतागणों के बीच जा बैठा, सुन्दरी का रूप धरे विष्णु ने उसे अमृत पान करवा दिया, तभी सूर्य और चन्द्र ने उसकी वास्तविकता प्रकट कर दी, विष्णु ने अपने चक्र से राहु का सिर काट दिया, अमृत पान करने के कारण राहु का सिर अमर हो गया,उसका शरीर कांपता हुआ गौतमी नदी के तट पर गिरा, अमृतपान करने के कारण राहु का धड भी अमरत्व पा चुका था। देवता ने शंकरजी से उसके विनाश की प्रार्थना की, शिवजी ने राहू के संहार के लिये अपनी श्रेष्ठ चंडिका को मातृकाओं के साथ भेजा, सिर देवताओं ने अपने पास रोके रखा, लेकिन बिना सिर की देह भी मातृकाओं के साथ युद्ध करती रही। अपनी देह को परास्त होता न देख राहू का विवेक जागृत हुआ और उसने देवताओं को परामर्श दिया कि इस अविजित देह के नाश लिये उसे पहले आप फाड दें, ताकि उसका वह उत्तम रस निवृत हो जाये, इसके उपरांत शरीर क्षण मात्र में भस्म हो जायेगा, राहू के परामर्श से देवता प्रसन्न हो गये, उन्होंने उसका अभिषेक किया और ग्रहों के मध्य एक ग्रह बन जाने का ग्रहत्व प्रदान किया, बाद में देवताओं द्वारा राहू के शरीर की विनास की युक्ति जान लेने पर देवी ने उसका शरीर फाड दिया और अमृत रस को निकालकर उसका पान कर लिया। ग्रहत्व प्राप्त कर लेने के बाद भी राहू सूर्य और चन्द्र को अपनी वास्तविकता के उद्घाटन के लिये क्षमा नही कर पाया और पूर्णिमा और अमावस्या के समय चन्द्र और सूर्य के ग्रसने का प्रयत्न करने लगा। राहू के एक पुत्र मेघदास का भी उल्लेख मिलता है, उसने अपने पिता के बैर का बदला चुकाने के लिये घोर तप किया राहू अंधकार युक्त ग्रह धूम्र वर्णी जैसा नीलवर्णी वनचर भयंकर वात प्रकृति प्रधान तथा बुद्धिमान होता, अनिद्रा पेट के रोग मस्तिष्क के रोग पागलपन हत्या आत्महत्या आदि भयंकर रोग देता है, यदि जातक के कर्म शुभ हों तो ऐसे कर्मों के भुगतान कराने के लिये अतुलित धन संपत्ति देता है। गोमेद इसकी मणि है, तथा पूर्णिमा इसका दिन है। अभ्रक इसकी धातु है। काला जादू तंत्र टोना आदि यही ग्रह अपने प्रभाव से करवाता है। अचानक घटना, राहू हमारे ससुराल का कारक है, दांतों के रोग देता है, कोर्ट केश जेल और बन्धन का कारक है, जेल और बन्धन का मालिक है, पागल खाने या अस्पताल में या जेल का कारक है, वेश्यावृत्ति, भारी इंजीनियरिंग, सिनेमा, फोटोग्राफी, विष, विधवायें, विदेशी भाषा, विदेश यात्रा, काना, आदमी, बांझ औरतें, विदेशी कंपनी या विदेशी सरकार, खंडहर, मुस्लिम, उूर्द, पहिया, प्रिंटिंग प्रेस, तंत्र, मंत्र, हवाई जहाज, शिप, तांात्रिक, जादू, कम्पयूटर, वीडियो, षडयंत्र, स्मगलिंग, भष्टाचार, घूस लेना, पेट के रोग दिमागी रोग पागलपन खाज-खुजली भूत चुडै़ल का शरीर में प्रवेश बिना बात के ही झूमना, नशे की आदत लगना, गलत स्त्रियों या पुरूषों के साथ सम्बन्ध बनाकर विभिन्न प्रकार के रोग लगा लेना, शराब और शबाब के चक्कर में अपने को बरबाद कर लेना, लगातार टीवी और मनोरंजन के साधनों में अपना मन लगाकर बैठना, हाॅरर शो देखने की आदत होना, भूत प्रेत और रूहानी ताकतों के लिये जादू या शमशानी काम करना, नेट पर बैठ कर बेकार की स्त्रियों और पुरूषों के साथ चैटिंग करना और दिमाग खराब करते रहना, कृत्रिम साधनो से अपने शरीर के सूर्य यानी वीर्य को झाड़ते रहना, शरीर के अन्दर अति कामुकता के चलते लगातार यौन सम्बन्धों को बनाते रहना और बाद में वीर्य के समाप्त होने पर या स्त्रियों में रज के खत्म होने पर टीबी तपेदिक फेफडों की बीमारियां लगाकर जीवन को खत्म करने के उपाय करना, शरीर की नशें काटकर उनसे खून निकाल कर अपने खून रूपी मंगल को समाप्त कर जीवन को समाप्त करना, ड्ग्स लेने की आदत डाल लेना, नींद नही आना, शरीर में चींटियों के रेंगने का अहसास होना, गाली देना, एक्सीडेंट, सडक पर कलाबाजी दिखाने के चक्कर में शरीर को तोड लेना, बाजी नामक रोग लगा लेना, जैसे गाडी बाजी, वेश्या बाजी, आदि है। इन रोगों के अन्य रोग भी राहु के है, जैसे कि किसी दूसरे के मामले में अपने को दाखिल करने के बाद दो लोगों को आपस में लडाकर दूर बैठ कर तमाशा देखना, लोगों को पोर्न साइट बनाकर या क्लिप बनाकर लूटने की क्रिया करना बाबा, पूर्वजंम के पाप भयानक जंम, पूर्वजों के पाप राहु से ग्रस्त व्यक्ति पागल की तरह व्यवहार करता है
राहू के उपाय:-
- राहू ग्रह भगवान शिवशंकर के परम आराधक है। जातक को शिवजी की आराधना करनी चाहिए। सोमवार को व्रत करें  शाम को भगवान शिवशंकर को दीपक जलायें। सफेद भोजन खीर, मावे की मिठाई, दूध से बने पदार्थ ग्रहण करना चाहिए।
- नित्य प्रतिदिन भगवान शिव को बिल्व पत्र चढ़ाकर दुग्धाभिषेक करना चाहिए। शिवपुराण आदि का पाठ करना चाहिए।
- नमः शिवाय मंत्र का नाम जाप लगातार करते रहना चाहिए। भैंस का दान, तब भगवान शिव का अभिषेक करवाना चाहिए। 
अपनी शक्ति के अनुसार संध्या को काले-नीले फूल, गोमेद, नारियल, मूली, सरसों, हलवा, नीलम, कोयले, खोटे सिक्के, किसी कोढ़ी को दान में देना चाहिए। राहू की शांति के लिए लोहे के हथियार, बाजरा, चिड़ियों को लोहे की चादर, तिल, काला-नीला कपड़ा, कंबल, सरसों का दाना, राई, ऊनी कपड़ा, काले तिल व तेल, सरसों तेल, विद्युत उपकरण, नारियल एवं मूली दान करना चाहिए. सफाई कर्मियों को लाल अनाज देने से भी राहु की शांति होती है, गोमद का दान करना चाहिए. राहू से पीड़ित व्यक्ति को शनिवार का व्रत करना चाहिए मीठी रोटी कौए को दें और ब्राह्मणों अथवा गरीबों को चावल और मांसहार करायें, कुष्ट से पीड़ित व्यक्ति की सहायता करनी चाहिए. गरीब व्यक्ति की कन्या की शादी करनी चाहिए. अपने सिरहाने जौ रखकर सोयें और सुबह उनका दान कर दें ऐसे व्यक्ति को अष्टधातु का कड़ा दाहिने हाथ में धारण करना चाहिए। हाथी दांत का लाकेट गले में धारण करना चाहिए। अपने पास सफेद चन्दन अवश्य रखना चाहिए। सफेद चन्दन की माला भी धारण की जा सकती है। जमादार को तम्बाकू शराब, अण्डे, मांस का दान करना चाहिए। प्रातःकाल पक्षियों को दाना चुगाना चाहिए। तो संयुक्त परिवार से अलग होकर अपना जीवन यापन करें, राहु के लिए का दान किया जाता है।