बालश्रम कराने बालों पर कठोर कार्रवाई होगी

झांसी उत्तर प्रदेश राज्य बाल संरक्षण आयोग की सदस्या डॉ. प्रीति वर्मा ने कहा कि जनपद में बालश्रम मुक्त बाजार बनाया जाये, ऐसे अभिभावक जो 14 वर्ष तक बच्चे की जिम्मेदारी नहीं उठाते हैं उन्हें बच्चों को जन्म देने का कोई अधिकार नही होना चाहिए। बालश्रम अपराध है इसे आपसी समन्वय के साथ रोकना होगा। सड़क पर रहने वाले बच्चों को शिक्षा के माध्यम से समाज की मुख्य धारा से जोड़ा जाये। नगर निगम, नगर पालिका परिषद भी इस जिम्मेदारी का निर्वहन करें। बाल श्रम कुरीति को रोकना हम सभी का संकल्प है। ऐसे बच्चों को शासन द्वारा संचालित योजनाओं का लाभ दिलाया जाये ताकि बाल श्रम को छोड़कर समाज की मुख्य धारा से जुड़ सकें। यहां सर्किट हाउस में 'बालश्रम रोकने में हमारी जिम्मेदारी्य विषय बैठक की अध्यक्षता करते हुये सदस्या डॉ. वर्मा ने उक्त विचार व्यक्त करते हुए बाल श्रम रूपी कुरीति को दूर करने में जुडने की अपील की। उन्होंने कहा कि 14 वर्ष के कम उम्र का बच्चा बालश्रम नही कर सकता, यह अपराध है। अब 14 से 18 वर्ष आयु के किशोर-किशोरियो के लिये खतरनाक व व्यवसायो में कार्य करने हेतु प्रतिबन्धित कर दिया गया है। आपसी तालमेल के साथ यदि काम किया जाये तो बालश्रम रोका जा सकता है। उन्होंने कहा कि व्यापारी संगठन आगे आये ताकि बालश्रम रोकने को प्रभावी कार्यवाही की जा सके। उन्होंने बताया कि बच्चों को काम देकर कोई परोपकार नही कर रहे, बल्कि यह अपराध है। ऐसे बच्चों को चिन्हित करते हुये शिक्षा से जोड़ें ताकि वह शिक्षित होकर स्वयं रोजगार कर सके। उन्होंने भीख मांगने वाले बच्चों को भीख नहीं देने की अपील करते हुए कहा कि ऐसे बच्चों का जन्म प्रमाण-पत्र व आधार बनाते हुये उन्हें शिक्षित करने के लिये स्कूल भेजें ताकि वह पढ़ सकें। उन्होंने कहा कि बालश्रम मुक्त बाजार बनाये, बालश्रम पाप और अपराध भी है। यदि सड़क पर रहने वाले बच्चे शिक्षित सुरक्षित नहीं होंगे तब तक सम्पूर्ण समाज का विकास सम्भव नही है। ऐसे बच्चे जो बालश्रम में पकड़े जाते हैं तो उन्हे लाभ दिलाया जाये। इसके साथ ही 14 वर्ष से अधिक बच्चों को शिक्षा की मुख्यधारा में रहकर कार्य कराया जा सकता है। इस मौके पर उप्र व्यापार मण्डल के प्रदेश अध्यक्ष संजय पटवारी ने आश्वस्त करते हुये कहा कि बालश्रम बाजार के स्थान पर जनपद को बालश्रम मुक्त बनाया जायेगा। उन्होने बालश्रम में पकड़े बच्चों को शिक्षित करने हेतु भी किताबे आदि उपलब्ध कराये जाने की स्वीकृति दी। सुमित गोड़ एमआईएस मैनेजर कौशल विकास ने बताया कि 14 से 35 उम्र के किशोरध्किशोरियो को रोजगार हेतु निरूशुल्क प्रशिक्षण दिया जाता है। विभिन्न ट्रेडों के लिये ग्रामीण क्षेत्र से ऐसे बच्चों को चिन्हित किया जाता है जो वास्तव में जरुरतमंद है उन्हे उनकी रुचि के अनुसार प्रशिक्षण करते हुये रोजगार से जोड़ा जाता है। रेलवे चाइल्ड लाइन से बिल्लाल उल हक ने जनपद में पुर्नवास केन्द्र बनाये जाने की बात रखी और बताया कि पकड़े गये बच्चों को ललितपुर ले जाया जाता है, इससे समस्या आती है।
बैठक से पूर्व उपश्रमायुक्त नदीम अहमद ने बालश्रम उन्मूलन के सम्बन्ध में अब तक की कार्यवाही व सरकार द्वासरा बनाए गए बाल श्रम अधिनियमों एवं अधिनियम अन्तर्गत छूट/शिथिलता, दण्ड तथा संज्ञेय अपराध के साथ माता-पिता व अभिभावक के लिये दण्ड, बाल एवं किशोर श्रम पुर्नवासन कोष, बालश्रम चिन्हांकन आदि के विषयक अनेक जानकारी दी। इस मौके पर श्रम प्रर्वतन अधिकारी अशीष अवस्थी, नीलम विश्वकर्मा, व्यापारी नेता राजेश बिरथरे, संतोष साहू, चैधरी फिरोज, पार्षद जितेन्द्र सिंह, नीरज गुप्ता सहित अधिशाषी अधिकारी नगर पालिका परिषद आदि उपस्थित रहे। इसके बाद पत्रकारों से चर्चा करते हुए उन्होंने स्वीकारा कि पूर्व में बाल श्रम के मामले में अधिकारियों मेें समन्वय का  अभाव था, किन्तु उनके आने के बाद समन्वय बढ़ा है और इसके अच्छे परिणाम सामने आए हैं। उन्होंने पत्रकारों से भी इसमें सहयोग करने की अपील की।