भुतहा शिप टाईटैनिक

वो परी कथाओं सा जादुई व स्वप्नलोक सा खूबसूरत, मजबूत अतिविशाल और कभी ना डूबने वाला जहाज था, लेकिन 14 अप्रैल सन् 1912 की रात 11ः40 पर उसके साथ कुछ ऐसा घटा कि वह समुद्री यात्रा का सबसे दर्दनाक हादसा और एक रहस्यमय पहेली बनकर रह गया और वह अभिशप्त, इलफेटेड और घोस्ट शिप के रूप मे जाना जाने लगा दरअसल इस धारणा को बनने के पीछे टाइटैनिक हादसे के पहले और बाद में घटी कुछ ऐसी अजीबो-गरीब और रहस्यमय घटनायें थी जिनको नकार पाना आसान नही था। टाइटैनिक हादसे के कई सालो बाद कुछ अन्य जहाजों ने अप्रैल माह में उस रास्ते से गुजरते हुये टाइटैनिक के भूत को गुजरते देखा जो कुछ पल तक दिखकर गायब हो जाता है। टाइटैनिक हादसे के 23 साल बाद अप्रैल 1935 में टिटेनियम नामक जहाज कनाडा से इंगलैण्ड को जा रहा था कैप्टन विलियम रीव्ज आकाश का निरीक्षण कर रहे थे। अचानक वह अपने जहाज से टाइटैनिक की तुलना करने लगे। 14 अप्रैल सन् 1912 की रात टाइटैनिक डूबा था इसी दिन तो उनका जन्म हुआ था रात होते ही उनको बड़ी घबराहट होने लगी तभी टिटेनियम एक बड़े आइसबर्ग से टकराने से बचा किन्तु आगे तो दर्जनो आइसबर्ग तैर रहे थे। कैप्टन ने जहाज वहीं रोक कर न्यूफाउलैण्ड से बर्फ तोड़ने वाले जहाज बुलवाये। 9 दिन बाद जब आइसबर्ग तोड़ कर रास्ता बनाया गया तभी टिटेनियम आगे बढ सका। अप्रैल 1978 मंे क्वीन एलिजाबेथ-2 नामक एक जहाज उत्तरी अटलांटिक सागर मे यात्रा कर रहा था अचानक शिप के रेडियो अफसर को एक संदेश मिला सी. क्यू. डी.,सी. क्यू. डी., हम तेजी से डूब रहे है। यात्रियों को लाइफबोट में उतारा जा रहा है। यह संदेश गुजरे एडवर्ड जमाने के मोर्स कोड में भेजा गया था अब इसका इस्तमाल बंद हो चुका है। रेडियो अफसर ने अपने ट्रान्समीटर को री-टयून करके मोर्स फ्रीक्वेंसी पर संदेश भेजने वाले जहाज से पहचान पूछी। कुछ देर तक ट्रान्समीटर पर सांय-सांय गूजने के बाद जवाब मिला टाइटैनिक यह सुन कर रेडियो अफसर की हडिडयां जम गयी क्योंकि जिस जहाज से संदेश भेजा गया था वह 66 वर्ष पूर्व ही समुद्र में समा गया था अफसर ने तुरन्त कैप्टन को सूचित किया सबने पहले सोचा कि कोई शरारत कर रहा है थोड़ी जांच के बाद पता लगा कि क्वीन एलिजाबेथ-2 ठीक उसी जगह से गुजर रहा था जहाँ टाइटैनिक डूबा था कैप्टन ने रेडियो अफसर से पुनः संदेश भेजने वालों से सम्पर्क स्थापित करने को कहा, किन्तु सारी कोशिश बेकार रही। टाइटैनिक तो इतिहास का हिस्सा बन चुका था, कैप्टन राॅबर्ट एगनर 1962 मे अपने व्यापारिक जहाज:कैलिफोर्निया' से न्यूयार्क से ईंगलैण्ड की यात्रा कर रहे थे उनके साथ उनके सहयोगी रोनाल्ड कैसरीन और दर्जन भर अंय कर्मचारी भी थे अनेक दिनों की यात्रा के बाद जब वे 14 अप्रैल 1962 को न्यूफाउलैण्ड द्वीप के पास पहुँचे तो कैप्टन एगनर का द्वीप की सैर करने का मन किया अतः जहाज किनारे लगाया गया लंगर डाल दिये गये जब वे द्वीप पहुँचे तो शाम के सात बज चुके थे अतः तय हुआ कि शाम यही गुजार कर कल दिन भर घूमेेंगें और तीसरे पहर चल देंगे तट पर एक छोटा सा टेंट लगाया गया धूमते खाते पीते आधी रात हो गयी रोनाल्ड कैसरीन जहाज से कुछ लाने बाहर निकले अचानक उन्होने पूरब दिशा मे देखा के एक विशाल जहाज काफी तेज गति से न्यूयार्क की तरफ जा रहा है। अभी पांच ही मिनट हुये थे कि जहाज मे एक जोरदार धमाका हुआ इसी के साथ जहाज हिचकोले खान लेगा कैसरीन को संदेह हुआ कि कही जहाज डूब ना जाये क्योंकि जहाज असांमाय रूप से डगमगा रहा था तभी जहाज से जोरदार से शोर सुनाई देने लगा कैसरील्से ने कैप्टन एगनर और अंय स्टाॅफ को ईसकी सूचना दी सभी बाहर आकर नजारा देखने लगे जहाज बुरी तरह कांप रहा था उसके बचने की कोई संभावना नही थी कैप्टन एगनर ने तुरंत जहराज से 10-12 लाईफबोटस निकलवाई और वे डूबते जहाज की ओर बढने लगे अभी उन्होंने आधी दूरी ही तय की थी कि वह जहाज फिर बुरी तरह कांपा और समुद्र के गर्भी मे समा गया वे सब बहुत दुःखी हुये कि वो उन अभागे यात्रियों की कोई मदद ना कर सके। कैपटन ऐगनर ने रेडियों सॅपर्क द्वारा दुनिया के सभी बंदरगााहों को दुर्धटना की जानकारी देते हुये से यह जानना चाहा कि जहाज कहाँ से रवाना हुआ था जहाज पर लगे ब्रिटिश झण्डे के मुताबिक जहाज इंग्लैण्ड का था पर सभी बंदरगाहों से एैसे किसी जहाज की कोई सूचना नही मिली इंगलैण्ड के बंदरगााहों से भी निराशा ही हाथ लगी साथ ही यह भी जानकारी मिली कि ईतना विशाल आकार प्रकार का कोई जहाज ब्रिटेन मे उपलब्ध ही नही है। आपको निष्चिित रूप से धोखा हुआ पर कैप्टन ने खुद चाँदनी रात मे जहाज पर लहराते ब्रिटिश झण्डे यूनियन जैक को देखा था धोखे का सवाल ही नही था उन्होने पुनः ब्रिटिष बंदरगाहों से जानना चाहा कि कभी ऐसा कोई बिटिश जहाज था पर सबने अभिनिज्ञता जाहिर की पर एक ने महत्वपूर्ण सूचना दी कि कर्तमान सदी के प्रारंम्भिक दशक मे ब्रिटेन की एक व्यापारिक कंपनी के पास टाईटैनिक नाम का ऐसा ही विशाल जहाज था जों 14 अप्रैल 1912 की मध्य रात्रि मे न्यूफाउलैण्ड द्वीप के पास दुर्घटनाग्रस्त होकर डूब गया था न्यूफाउलैण्ड द्वीप और 14 अप्रैल की तारीख सुन कर एगनर चैंके पुष्टि के लिये एक सहयोगी से से तारीख पूछी पता चला कि आज भी 14 अप्रैल है। समय भी मध्य रात्रि का था एक बार फिर केप्ब्टन एगनर से उसबंदरगाह से संबध स्थापित किया और टाईटेनिक दुघर्टना के दृष्य के पुनरावृत्ति की जानकारी मांगी बदले मे उत्तर मिला कि आज से करीब दस साल पहले भी टाईटेनिक दुर्धटना को यथावत देखे जाने की एक सूचना मिली थी कैप्टन एगनर को पूरा यकीन हो गया कि उन लोगों ने जो कुछ भी देखा वह उस दिन कोई वास्तविक दुर्धटना नही बल्कि बरसों पूर्व हुयी टाईटैनिक दुर्धटना की प्रेतलीला थी बाद मे एगनर की खोजबीन से पता चला कि हर साल 14 अप्रैल की आधी रात को उस द्वीप के पास टाईटैनिक का भूूत प्रकृट होता है। औैर ओर दुधर्टना की पूरी प्रेतलीला इस प्रकार घटती है। मानो सचमुच की कोई्र दुर्धटना हो गइ्र्र हो। ( दि मेडेन वाॅयज- लेखक के. राॅबर्ट एगनर)