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ब्राह्मण का शाप

पूर्वजंम में किये गये पाप कमों के कारण मनुष्य को अनेक प्रकार के आर्थिक समाजिक कष्टों, शारीरिक, मानसिक रोगों, मुसीबतंे और अनेक प्रकार के दुर्भाग्य का सामना करना पड़ता है। जंमपत्री के ग्रह योग व हस्तरेखा के अशुभ चिन्हों से मनुष्य के गत जंम के पापों को जाना जा सकता है। भारतीय ज्योतिष व अध्यात्म के अनुसार मनुष्य को शुभ-अशुभ कमों को अवश्य ही भोगना पड़ता हैं।
अवश्यमनु भोक्तवां मात्किचिंत फलमस्ति चेत।
येन केनापि भोगेन नाभुकत्वाथं म्रियेत तत।।
पिता का शाप-राहू सूर्य युति या त्रिकोण स्थिति पूर्व जंम के पिता का शाप देता है। यह पितृ दोष भी कहलाता है। 
माता का शाप- चन्द्र राहू युति या त्रिकोण स्थिति पूर्व जंम के माता का शाप देता है। 
भाई या शत्रु का शाप-मंगल राहू युति या त्रिकोण स्थिति पूर्व जंम के भाई का शाप देता है। यदि मंगल शत्रु राशि मे हो तो शत्रु का शाप हो
मामा, शिक्षक सौत या ज्योतिषी का शाप - बुध राहू युति या त्रिकोण स्थिति पूर्व जंम के मामा, शिक्षक या ज्योतिषी का शाप का शाप देता है। यदि बुध गुरू की राशि मे हो तो ज्योतिषी का शाप हो यदि बुध स्वराशि मे हो या 2, 4, 5, 9 भाव मे हो तो शिक्षक का शाप हो यदि बुध अंय राशि मे हो तो मामा का शाप हो बुध वृष सिंह का हो बिल्ली व मिथुन व तुला का हो तो पक्षी का शाप हो। 
ब्राह्मण या गुरू का शाप या पीपल का शाप-गुरू राहू युति या त्रिकोण स्थिति पूर्व जंमका ब्राह्मण या गुरू का शाप या पीपल का शाप का शाप देता है। 
पत्नी, पुत्री, बहू बहन का शाप-शुक्र राहू युति या त्रिकोण स्थिति पूर्व जंमपत्नी, पुत्री, बहू, बहन का शाप का शाप का शाप देता है। 
नर हत्या, शूद्र या नौकर का शाप-शनि राहू युति या त्रिकोण स्थिति पूर्व जंम का नर हत्या, शूद्र या नौकर का शाप देता है। 
ब्राह्मण या साधू का शाप-सूर्य केतु युति या त्रिकोण मे स्थिति ब्राह्मण का शाप दे। 
मांदि एवं ग्रह युति-
सूर्य मांदि युति-पिता, राजकर्मचारी, क्षत्रिय या शिवजी या मंदिर के प्रति पाप
चन्द्र मांदि युति-माता की हत्या या उनके प्रति पाप या शत्रुता।
मंगल मांदि युति-भाई या शत्रु का शाप
बुध मांदि युति-मामा, शिक्षक सौत या ज्योतिषी शिक्षक का शाप हो यदि बुध अंय राशि मे हो तो मामा का शाप हो बुध वृष सिंह, बुध बिल्ली व मिथुन व तुला का हो तो पक्षी गुरू मांदि युति-संतान, ब्राह्मण, गुरू या पीपल का शाप। 
शुक्र मांदि युति-पत्नी, बहन, पुत्री, बहू गाय की हत्या।
शनि मांदि युति-नर हत्या, शूद्र या नौकर की हत्या।
राहू मांदि युति- बाबा, वृद्ध, सर्प हत्या या गत जंम मे विष द्वारा विधर्मी किसी की हत्या। केतु मांदि युति-ब्राह्मण या साधू की हत्या।
42. वक्री ग्रह गत जंम के अधूरे कर्म को बताते हैं। व़क्री गुरू गत जंम मे वैभवपूर्ण जीवन जिया यदि जातक इस जंम मे परस्त्रीगमन या घूस लेता है। तो मधुमेह होगा गुरू शुक्र युति या मंगल शुक्र युति पूर्वजंम की पत्नी ही प्राप्त होगी या पूर्वजंम की पत्नी ही प्राप्त होगीगुरू या मंगल से 12 वें शुक्र गत जंम की पत्नी ही प्राप्त होगी। शुक्र से 12 वें मंगल गत जंम का पति मिलेगा गुरू की जंमस्थ राशि से 12 वीं राशि जातक की गत जंम की जाति, नामाक्षर तथा उसके गत जंम की घटनाओं और उनके समय का ज्ञान होता है जैसे यदि किसी जातक का जंम वृष राशि में हुआ है। तो 12 वी राशि मेष हुयी जहां सूर्य उच्च का होंता है चुंकि मेष राशि का स्वामी मंगल और सूर्य दोनो क्षत्रिय जाति को बताते है। और दोनो राज्य कारक ग्रह है। जो जातक गत जंम मे क्षत्रिय था और राजा या उच्च राज्याधिकारी था जमांक मे कुंभ मे गुरू है। तो 12 वीं राशि मकर हुयी जहां मंगल उच्च का होता है चुंकि मेष राशि का स्वामी मंगल क्षत्रिय जाति को बताते है। अतः जातक गत जंम मे क्षत्रिय था मकर पृथ्वी तत्व की राशि है। तो दक्षिण दिशा को बताती है व मकर चर राशि है जो दूर स्थान को बताती है अतः जातक का जंम वर्तमान जंमस्थान से दक्षिण दिशा मे दूर स्थान पर होगा सूर्य शनि योग जातक और उसका पिता पूर्व जंम मे भी उसका पिता था दोनों का तीन जंमों का संबध होगा दोनों मे परस्पर मतभेद होगें उनका व्यवसाय भिन्न होगा और दोनों अपने जीवन काल दोनों मे से एक ही व्यक्ति सफल होगा।
चन्द्र शनि योग जातक की माता पूर्व जंम मे भी उसका माता थी यदि जातक स्त्री हो तो दोनों का तीन जंमों का संबध होगा दोनो मे परस्पर मतभेद होगें 
सूर्य गुरू पूर्व जंम का धर्मात्मा पिता व पूर्व जंम का धर्मात्मा पुत्र पुनः इस जंम मे पिता पुत्र बन कर आयेगा 
गुरू बुघ जातक को पूर्व जंम के ही मित्र या छोटा भाई बहन मिले जिनसे जीवन मे भारी लाभ होगा ।
गुरू चन्द्र माता व बड़ी बहन गुरू मंगल भाई या शत्रु गुरू शनि पूर्व जंम का नौकर मिले जिनसे लाभ होगा।  


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