देवकेरलम के गुप्त फार्मूले

नाड़ी ग्रन्थों की परम्परा मे देवकेरलम का विशेष महत्व है। मद्रास गर्वमेंट ओरिऐन्टल लाईब्रेरी मे देवकेरलम के 40,000 के श्लोक उपलब्ध है। जिसके चतुर्थांश भाग 9181, श्लोकों का अनुवाद दि टाइम्स आॅफ एस्ट्रोलोजी के संपादक स्व. आर संस्थानम जी ने अनुवाद किया है। स्वर्गीय सी. एस. पटेल जी ने अपने ग्रन्थों मे अरूधा सिस्टम आॅफ एस्ट्रोलोजी और नाड़ी एस्ट्रोलोजी मे देवकेरलम के तेलगू एडिशन पर कलम चलाई है। जिसके कुछ सटीक सूत्रों का वर्णन इस लेख में किया जा रहा है।
1. धनलाभ- देवकेरलम-भाग-2।।5626।। धनेश की नवांशगत राशि या उससे त्रिकोणगत राशि या धनेष से दृष्ट राशि पर गुरू को गोचर धनलाभ देगा।
2. ।। 5627।।  धनेश, दशमेश व लाभेश के राशि अंशों को जोड़ो प्राप्त राशि अंशों की नवांश राशि स्वामी के अन्र्तदशा मे जातक को धनलाभ होगा।
3. 4928- सूर्य जिस नवांश मे जाये वह या उससे त्रिकोणगत राशि पर शनि का गोचर पिता को रोग देगा शनि हेतु अशुभ राशियों मे सूर्य को गोचर उपरोक्त अवधि मे पिता को भारी तनाव देगा। 
4. 5618- द्वितीय भाव की राशि या द्वितीयस्थ ग्रहों के जगह या द्वितीयेश गत राशि के अनुसार वाली जगह पर जातक जातक जाॅब करेगा।
5. 5608- नवमेश पूर्व जंम को बताता है। नवमेश शुभ युत या दृष्ट गत जंम मे सम्पन्न हो पाप प्रभाव निम्न स्तर का हो, दशमेश की युति या दृष्टि राजाधिकारी, नवमेश की राशि जाति बताये तथा वर्गोत्तम हो तो मंत्री या सेनापित हो।
5.।। 2517।।
1. जब गुरू नवमेश या लाभेश की नवांश राशि मे जाय तो सुख, धन व रोजगार की प्राप्ति होगी।
2. जब गुरू द्वितीयेश या लाभेश की नवांश मे जाय तो धन की प्राप्ति होगी।
3. जब शनि द्वितीयेष या लाभेश की नवांश मे जाय तो जातक के संबधियों को भारी खतरा होगा।
6.। 2505-2520। 
1.मेश लग्न मे अष्ठमेश की दशा शनि का अंतर जातक को मृत्यु देगा
2. शनि छठे या आठवे भाव मे जाय या देखे तो मृत्यु तुल्य कष्ट देगा शनि छठे भाव मे बैठ कर आठवे भाव को देखे तो मृत्यु देगा।
7. 25.8- गुरू तृतीय पर्याय मे मीन के प्रारम्भिक अंशो पर जाय तो धन दे। तुला के प्रारम्भिक अंशो पर जाय तो तनाव दे। मेश से आगे तीन राशियों पर सुख दे।
8. यदि कोई ग्रह अपनी दशा के प्रारंभ मे अपनी जंमस्थ स्थिति से गोचर करे तो शुभफल देगा।
8. यदि राहू लग्न या चन्द्र से 11 वें भाव मे गोचर करे तथा सूर्य निर्बल हो जातक की मृत्यु होगी।
9. लग्न, 8 वें या 12 वें भाव मे पाप ग्रह का गोचर हो तथा षनि भी गोचर मे अति अशुभ हो तो महान कष्ट आयेगें भगवान विष्णु की स्वर्ण प्रतिमा का दान करें। तथा महामृत्युन्जय का जप करायंे।
10. चतुर्थेश व लाभेश के राशि अंशों को जोड़ो जो रशि अंश प्राप्त हो उस पर शनि का गोचर संपति और सुख देगा।
11. द्वितीयेश और लाभेश के राशि अंशों को जोड़ो जो राशि अंश प्राप्त हो उस पर गुरू का गोचर हो तथा किसी शुभ ग्रह की दृष्टि भी पड़े तो धन प्राप्ति होगी। 
12. लग्नेश, सप्तमेश व पंचमेश के राषि अंशों को जोड़ो जो राशि अंश प्राप्त हो उस पर षनि का गोचर हो व दशमेश की दृष्टि हो तो रोजगार मे प्रमोशन हो।
13. द्वितीयेश, दशमेश और लाभेश के राशि अंशों को जोड़ो जो राशि अंश प्राप्त हो उस पर षनि का गोचर हो तथा गुरू की भी दृष्टि हो तो विवाह या प्रेम 
संबध होगा।
14. चतुर्थेश और सूर्य के राशि अंशों को जोड़ो जो राशि अंष प्राप्त हो उस पर शनि का गोचर पिता को मृत्यु या घोर कष्ट देगा।
15. पंचमेश व चन्द्र के राशि अंशों को जोड़ांे जो राशि अंश प्राप्त हो उस पर शनि का गोचर माता को मृत्यु या घोर कष्ट देगा।
16. पंचमेश और द्वादेश के राशि अंशों को जोड़ो जो राशि अंश प्राप्त हो उस पर शनि का गोचर संतान को मृत्यु या घोर कष्ट देगा यदि भी शनि से जुड़ जाये तो पत्नी को कष्ट होगा।
17. लग्न, चन्द्र तथा चतुर्थेश से षष्ठेशों के राशि अंशों को जोड़ो जो राशि अंश प्राप्त हो उस पर शनि का गोचर माता को मृत्यु या घोर कष्ट देगा।
18. तृतीयेश और द्वादेश के राशि अंशों को जोड़ांे जो राशि अंश प्राप्त हो उस पर शनि का गोचर भाई बहनांे को मृत्यु या घोर कष्ट देगा या तृतीयेश और द्वादेश से षष्ठेशों के राशि अंशों को जोड़ो जो राशि अंश प्राप्त हो उस पर शनि का गोचर भाई बहनांे को मृत्यु या घोर कष्ट देगा। 
19. तृतीयेश व अष्ठमेश के राशि अंशों को जोड़ो जो राशि अंश प्राप्त हो उस पर केतु का गोचर जाॅब मे कष्ट व अषुभ स्थानान्तरण होगा।
20. शनि, गुलिक व राहू के के राशि अंषों को जोड़ो जो राशि अंश प्राप्त हो उस पर मंगल, केतु, शनि का गोचर मृत्यु देगा।