सीधे मुख्य सामग्री पर जाएं

ग्रहण का फलादेश

राष्ट्रीय ज्योतिष मे ग्रहणों बड़ी  भूमिका  होती है। सूर्य  और चन्द्र ग्रहण राहू व केतु के प्रभाव से होते है ये सूर्य व चन्द्रमा को ढक लेते हैं। ग्रहण का प्रभाव इसके प्रकृट होने से छह महीने से और छह महीने बाद तक रहता है। इनके प्रभाव को जानने के लिये किसी राष्ट्र या महान व्यक्ति या जातक के जमांक मे इन भावों की राशियों पर ग्रहण पड़े तो विशेष अशुभ फल मिलता  है। (के एन राव का विशेष शोध)
1. चन्द्र राशि पर।
2. सूर्यगत राशि पर।
3. लग्न राशि पर।
4. इनसे सप्तम भाव पर ग्रहण पड़े। यदि ग्रहण दशम भाव पर तो महापतन हो।
5. द्वितीय, सप्तम या अष्ठम भाव पर ।
6. यदि जंमस्थ, राहू, केतु, मंगल शनि पर ग्रहण पड़े। 
7. यदि उपरोक्त ंिबदुओं पर मंगल गोचर करे या देखे। तो बड़ी प्राकृतिक आपदा आये। 
सूर्य या चन्द्र ग्रहण ग्रहण संसार महान व्यक्तियों प बड़े राजनीतिज्ञों के लिये महान पतन व दुर्भाग्य व मृत्यु लाती है। प्रो0 बी वी रमन ने इतिहास मे हुये सूर्य ग्रहणों के परिणास्वरूप हुयी निम्नलिखित दुर्भाग्यपूर्ण घटनाओं का वर्णन किया है। के एन राव ने भी अपनी पुस्तक नेहरू डायनेस्टी मे सूर्य व चन्दग्रहण के आधार पर कई जातकों के जीवन और संसार मे घटी दुर्भाग्यपूर्ण घटनाओं का वर्णन किया है। 
1. 26 मई 715 ईसा पूर्व रोम मे दोपहर को एक लंबा सूर्य ग्रहण दिखाई दिया था ग्रहण के तुरंत बाद उस वर्ष रोमुलस की मौत हो गई थी प्लूटार्क ने लिखा है। कि रोमुलस के जंम के पूर्व भी एक पूर्ण सूर्यग्रहण पड़ा था (डे रिपब्लिका, लिब, 6)
2. एनोफोन ने लिखा है। कि पर्शियन द्वारा मेडियन शहर लेरिस्सा पर कब्जा करने के पूर्व भी एक सूर्यग्रहण पड़ा था (एनाबिसस,लिब-3)
3. थीडियस ने लिखा है। कि एथीनियन्स द्वारा सीथेरा के विरूद्ध अभियान के पूर्व भी 21 मार्च 424 वर्ष ईसा पूर्व को एक पूर्ण सूर्यग्रहण पड़ा था।
4. एनोफोन ने लिखा है। कि 14 अगस्त 394  ईसा पूर्व को एक पूर्ण सूर्यग्रहण मेडिटेरियन मे  दोपहर के पूर्व पड़ा था उसी वर्ष कोनोन द्वारा पर्शियन के विरूद्ध नौसैनिक अभियान मे पर्शियन की हार हुयी थी (हेलेनसिस,बुक-4)
5. डायन केसियस के अनुसार जुलियस सीजर द्वारा रूबिकोन पार करने  के समय भी एक सूर्य ग्रहण पड़ा था (हिस्ट्री रोम,बुक-एक्स एल आई)
6. एक प्रसिद्ध खगोलशास्त्री एरगो ने लिखा है।  44 ईसा पूर्व को जुलियस सीजर की मृत्यु के समय भी एक पूर्ण सूर्यग्रहण पड़ा था
7. 24 नवम्बर, 29 ईसवी को फलगोन का प्रसिद्ध सूर्य ग्रहण पड़ा था जिस दिन प्रभु ईशू मसीह को क्रूस पर चढाया गया था ग्रहण के परिणामस्वरूप  जेरूसलम के आकाश पर अंधेरा दा गया था तीसरी सदी के प्रारंभ मे टर्टूलियन और 312 ईसवी मे निकोमीडिया के शहीद लुसियन इस बात के गवाह थे कि ईशू मसीह की क्रूस पर चढाये जाने के समय के एक परालौकिक अंधकार छा गया था 
7. जाॅर्जियस टरोनेन्सिस के अनुसार 24 फरवरी 453 को सूर्य ग्रहण पड़ा था जब एटिला और हून  ने ईटली पर हमला किया था 
8. मेल्मसबरी के विलियम के अनुसार मध्ययुग मे 2 अगस्त 1133 को एक पूर्ण सूर्य ग्रहण स्काॅटलैंड मे पड़ा था जिसके कारण हेनरी  प्रथम को भारी दुर्भाग्य का सामना करना पड़ा था( हिस्टोरिया नोवेल्ला,लिब-आई)
साभार-एम आर मूर्ति, ए एम, सितम्बर, 1962,  9. 10 अक्टूबर 1962 को सूर्य ग्रहण कर्क राशि पर पड़ा पड़ा कर्क राशि पर जो पी एम नेहरू की जंम लग्न, चीन की चन्द्र राशि भारत के जमांक मे तृतीय भाव की राशि है। जहाँ सूर्य व चन्द्रमा दोनो बैठे थे उससे 7 वें भाव मकर मे राहू था जो वाराह मिहिर द्वारा निर्घारित भारत की राशि है अतः भारत चीन के बीच भयानक युद्ध हुआ अतः भारत चीन के बीच भयानक युद्ध हुआ 
10. (साभार- ए0 एम0, अगस्त, 1964 पेज न0- 700 मे छपे एक पत्र मे हैदराबाद वासी वेंकेटेश वेरल) ने 30 दिसम्बर 1963 मे पड़े चन्द्र ग्रहण का वर्णन किया है जिसने प. नेहरू को लंबी बीमारी और अंत मे मृत्यु दी प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री का जंम 2 अक्टूबर 1904 को सुबह 4.08 बजे सिंह लग्न इलाहाबाद मे हुआ था उनकी लग्न सिंह मे मंगल, बुध व राहू था कन्या मे सूर्य तुला मे शुक्र व मकर मे शनि थे मिथुन मे चन्द्रमा था 30 दिसम्बर 1963 को मिथुन राशि मे पूर्ण चन्द ग्रहण पड़ा था जो शास्त्री की की चन्द्र राशि व चन्द्र नक्षत्र पर पड़ा शास्त्री जी बिना पोर्टफोलियो के 9 फरवरी 1964 मे प. नेहरू जी की बीमारी के कारण प्रधानमंत्री बनाये गये। 
11. राम प्रसाद बिस्मिल का जंम 11 जून 1897 को सुबह 8.30 पर ष्शाहजहाँपुर मे हुआ था संवत 1954 ज्येष्ठ शुक्ल एकादशी को चित्रा नक्षत्र चतुुर्थ चरण कर्क लग्न 11 अंश लग्न मे मंगल 21.10केतु 14.29 सिंह मे गुरू 10.47 तुला मे चन्द्र 5.17 वृष मे बुध 6.02 वृश्चिक मे वक्री ष्शनि 3.21 मकर मे राहू 14.29 मेष मे शुक्र 15.55 वृष में सूर्य 27.29 बुध 6.02।
अमर ष्शहीद अशफाक उल्लाह खान का जंम 22 अक्टूबर 1900 उत्तरी प्रान्त के शाहजहाँपुर जिले मे हुआ था धनु लग्न मे शनि 8 वृष मे केतु 9 कर्क मे मंगल 22 सिंह मे शुक्र 23 कन्या मे चन्द्र 21 तुला मे सूर्य 6 बुध 28 वृश्चिक मे गुरू 18 व राहू 9। 8/9 दिसम्बर 1927 की रात को पूर्ण चन्द्र ग्रहण पड़ा था उन्हें काकोरी टेªन डकैती केस मे मृत्युदंड की सजा मिली थी 19 दिसम्बर 1927 को फैजाबाद में फांसी पर लटका दिया गया था बुघ से द्वितीय राहू है।  
संजय गांधी का जंम 14 दिसम्बर 1946 को प्रातः  बजे बम्बई मे हुआ था  16 फरवरी 1080 को पूर्ण सूर्य ग्रहण कुंभ राशि मे पड़ा था जो उनके जमंाक मे द्वितीय मारक भाव पर पड़ा था जो संजय गांधी के लिये प्राण घातक था 26 जून 1980 को सुबह 10 बजे दिल्ली मे 34 साल की उम्र मे विमान दुर्घटना मे उनका निधन हो गया।
इन्दिरा गांधी-17 नवम्बर 1917। समय- 9.11 रात्रि। इलाहाबाद। कर्क लग्न-1 अंश लग्न में शनि-22 अंश, सिंह मे मंगल 16 अंश, वृश्चिक मे सूर्य-5 अंश, बुध-13 अंश, धनु में शुक्र-21 अंश, चन्द्र-7.9 राहू- 9 अंश, वृष में वक्री गुरू- 15 अंश, मिथुन में केतु-9 अंश। इन्दिरा गांधी के जीवन मे तीन महत्वपूर्ण ग्रहण पड़े जिन्होने बड़ी गहराई से उनके जीवन को प्रभावित किया सन 1975 मे मई के महीने मे दो लगातार ग्रहण पड़े पहला 11 मई को मेष राशि मे आंशिक चन्द्र ग्रहण पड़ा दूसरा पूर्ण सूर्य ग्रहण 25 मई को वृष राशि मे  पडा़  जो भारत की लग्न थी जिसमे जंमस्थ केतु पहले से बैठा था इसके करीब एक माह बाद भारत के इतिहास मे एक दुर्भायपूर्ण घटना हुयी 25 जून 1975 को श्रीमती इन्दिरा गंाधी ने देश मे इमरजेंसी लगा दी जो उनका बड़ा घातक और दुभागर््यपूर्ण फैसला था एक महत्वपूर्ण पूर्ण सूर्य ग्रहण 23 अक्टूबर 1976 को पड़ा जो तुला मे पड़ और श्रीमती गांधी के दशम भाव को सीधा प्रभावित कर रहा था इन्दिरा गांधी ने जनवरी 1977 मे देश मे आम चुनाव की घोषणा की जिनमे उनकी करारी हार हुयी, तीसरा महत्वपूर्ण पूर्ण सूर्य ग्रहण 30 मई 1984 को पड़ा जो भारत की लग्न वृष राशि मे पड़ा 5 जून 1984 को श्रमती गांधी ने पंजाब मे आपरेशन ब्लू स्टार शुरू करवाया भारतीय सेना 984 को पड़ा जो भारत की लग्न वृष राशि मे पड़ा 5 जून 1984 को श्रीमती गांधी ने पंजाब मे आपरेशन ब्लू स्टार शुरू करवाया भारतीय सेना स्वर्ण मंदिर मे घुसी जिसमे सिखों का भारी नरसंहार हुआ सिख समुदाय मे हुयी प्रतिक्रिया स्वरूप श्रीमती इन्दिरा गांधी के सिख अंगरक्षकों ने ही 31 अक्टूबर 1984 को उनकी गोली मार कर हत्या कर दी।
क्षत्रिय टीचर जातिका जंम-256 अप्रैल 1982। 2.15 दोपहर, लखनऊ सिंह लग्न 14.18 अंश, कन्या में मंगल-8.32 अंश, शनि-24.04 अंश, तुला मे वक्री गुरू-11.56 अंश, धनु मे केतु-22.25 अंश, 30 जनवरी 2010 को जातिका ने गृह कलह से तंग आकर फांसी से लटक कर आत्महत्या कर ली। 16 जनवरी को मकर राशि में पूर्ण चन्द्र ग्रहण पड़ा था। 


इस ब्लॉग से लोकप्रिय पोस्ट

पक्षी आपका भाग्य बदले

मनुष्य का जीवन अपने आसपास के वातावरण से ही प्रभावित होता है। व्यक्ति के आस-पास के पशु पक्षी उसके जीवन का अभिन्न अंग है। भारतीय ऋर्षियों तथा संसार के अध्यात्मवादियो ने संसार के पक्षियों को ना केवल ज्योतिष तथा मनुष्य के भाग्य से जोड़ा है। बल्कि पक्षियों को उपयोग शकुन ज्योतिष, फलित तथा प्रष्न ज्योतिष तथा अनेकों ज्योतिष, तांत्रिक उपचारों और शारीरिक मानसिक रोगों के निवारण में किया है। भारत मे पंच प़क्षी शास्त्र, कल्ली पुराण पर आधारित तोते द्वारा भविष्यवाणी, पक्षी तंत्र तथा शकुन ज्योतिष का प्रयोग आदिकाल से ही किया जाता है भारत मे गरूड़ जी, नीलकंठ, काकभुषुंडी,, हंस, जटायु व संपाती, शुकदेव जी आदि दिव्य पक्षियों तथा अनेक देवी देवताआंे वाहन के रूप मे पक्षियों को प्रयोग किये जाने का  वर्णन है। जैसे भगवान विष्णु का गरूड़, कार्तकेय जी का मयूर, माता लक्षमी का उल्लू, विश्वकर्मा, वरूण जी तथा स्वरसती जी का हंस आदि शनिदेव का कौआ आदि का प्राचीन काल मे पक्षियों द्वारा डाक सेवा युद्ध संबधी शकुन का भी काम लिया जाता था पक्षियों को स्वतंत्रता, नवीन विचारों, आनंद, तनाव, मुक्ति, प्रषंसा, यष, धन्यवाद देने, प्रजनन श

परिवर्तन योग से करें भविष्यवाणी

भारतीय ज्योतिशशास्त्र में भविष्यकथन के सैकड़ों सूत्रो का वर्णन है। इन्ही सूत्रों मे से एक है परिवर्तन योग जिसका वर्णन पाराशरीय और नाड़ी ग्रन्थों दोंनों मे पाया जाता है। हाँलाकि दोनो प्रकार के ग्रन्थों में इन सूत्रों को विभिन्न तरीको से प्रयोग किया गया है ज्योतिष मे परिवर्तन योग के तीन रूप पाये जाते हैं। 1. भाव परिवर्तन 2. राशि परिवर्तन 3. नक्षत्र परिवर्तन  भाव परिवर्तन पाराशरीय व कुछ नाड़ी ग्रन्थों जैसे षुक्र नाड़ी मे इसके सूत्रो का वर्णन पाया जाता है। जो भावा के स्वामियो के बीच स्थान परिवर्तन से बनता है। जैसे चतुर्थेश षष्ठ भाव मे जाय और षष्ठेश चतुर्थ भाव मे जाय। इसके भी तीन भेद हैं। 1. दो शुभ भावों के स्वामियों का परस्पर परिवर्तन जैसे लग्न व पंचम भाव का परिवर्तन या दो केन्द्रेशों का परिवर्तन या केन्द्र और त्रिकोण भाव मे परस्पर परिवर्तन। 2. दो त्रिकेशांे का परिवर्तन जो विपरीत राजयोग बनाता है। 3. किसी केन्द्रेश या त्रिकोणेश का त्रिकेश से परिवर्तन। जैसे दशमेश का द्वादेश से परिवर्तन या पंचमेश या द्वादेश के बीच परिवर्तन। 2. ग्रह या राशि परिवर्तन  इसका वर्णन स्व. आर. जी. राव द्वारा अनुवादित और

जेल जाने के योग

ज्योतिष शास्त्र अनुसार कुंडली के आठवें मतांतर से बारहवें भाव से कारावास तथा सजा का विचार किया जाता है। कुंडली के इस घर में राहु अगर अष्टमेश के साथ हो तो उसके अशुभ प्रभाव के कारण व्यक्ति को किसी बड़े अपराध के कारण जेल जाना पड़ता है। शनि  मंगल और राहू मुख्य रूप से यह तीन ग्रह एवम् इनका आपसी सम्बन्ध जेल के कारक है। शनि व 12 भाव सजा का कारक है। छठा भाव व मंगल राहू अपराध के कारक है। अगर किसी व्यक्ति की कुण्डली में मंगल और राहु एक साथ किसी भाव में बैठकर युति करते हैं तो जेल योग बनता है केतु रस्सी बेड़ी हथकड़ी का कारक ग्रह हैं अशुभ मंगल व राहु के बीच दृष्टि संबंध बनता हो तो अंगारक योग की वजह से ऐसा इंसान हिंसक स्वभाव वाला हो जाता है और अपराध करता है जिससे जेल जाना पड जाता है। शनि मंगल व राहु मुख्य रूप से जेल यात्रा कराने का भी योग बनाते हैं और इनकी युति या आपस में दृष्टि इस तरह की स्थितियां बना देती है कि आखिर इंसान को जेल जाना ही पड जाता है। जन्मकुंडली में सूर्यादि ग्रह समान संख्या में लग्न एवं द्वादश तृतीय एवं एकादश, चतुर्थ, दशम, षष्ठ एवं अष्टम भाव में स्थित हो तो यह बंधन योग बनाता है यह स्थिति