जड़ों की तलाश

गिरमिटिया मजदूर के रूप में गए सैकड़ों वर्ष पूर्व गए भारतीय अब स्थिति सही होने पर अपनी जड़ों की तलाश में लग गए हैं इसी क्रम में फिजी के रहने वाले आनंद जो अब ऑस्ट्रेलिया में रहते हैं ने उत्तर प्रदेश के रहने वाले पेशे से पत्रकार पवन उपाध्याय को फिजी के एक कार्यक्रम में अपना इमीग्रेशन पास दिया और कहां की आप मेरे पूर्वजों के घर को तलाश दे जो कि मूलतः गोरखपुर के रहने वाले हैं कार्यक्रम के बाद पवन उपाध्याय भारत वापस आए और के परिवार की तलाश में गोरखपुर में गोला के पास गोपालपुर गांव में रह रहे परिवार की तलाशी शुरू की पहले यह ग्राम थाना गगहा के अंतर्गत आता था ग्राम गोपालपुर किसी समय में स्टेट हुआ करता था और यहां पर छोटे राजा का शासन था ग्राम गोपालपुर एक बड़ा ग्राम है । पवन उपाध्याय ने एक वहां के स्थानीय मित्र के जरिए उस गांव तक पहुंचे और इमीग्रेशन पास के आधार पर जिसमें जाने वाले का नाम उनके पिता का नाम ग्राम का नाम जिले का नाम थाने का नाम और किस जाति या बिरादरी से थे वह दर्ज था कि आधार पर पहले उस जाति विशेष के समूह वाले क्षेत्र में तलाश को शुरू किया पूरे दिन ग्राम के बुजुर्गों से संपर्क किया बात 1895 की है जब भवानी दयाल अपने परिवार को छोड़कर अपने पत्नी के साथ फिजी के लिए चले गए थे उनके पिता का नाम भीखा था गोपालपुर गांव में दो बस्ती दलितों की है जिसमें से एक बस्ती में बुजुर्गों से मिलने के बाद भीखा नाम का पता नहीं चला गांव के ही एक युवक ने बताया है कि एक दूसरा पुरवा भी है जिसमें भी ये लोग रहते हैं आपको मैं उस ग्राम में ले चलता हूं इसी बीच हमारी मुलाकात एक स्कूल मास्टर से हुई जो कि माना जाता है कि वह पढ़ाई लिखाई में और सामाजिक कार्यों में रुचि रखते हैं और उनको अच्छी जानकारी है इस इलाके की मैंने जब उस मास्टर साहब से संपर्क किया तो उन्होंने बताया कि नहीं मेरी जानकारी में इस तरह का कोई भी मामला नहीं है कि कोई मेरे गांव से विदेश गया हो उन अध्यापक महोदय ने बताया कि हमारे गांव में ही एक दर्जी हैं वह बुजुर्ग हैं हो सकता है कि उनको कुछ पता हो आइए चलते हैं। हम लोग दर्जी के पास गए और मैंने जब दर्जी महोदय से पूरी बात बताई तो उन्होंने कहा कि इस तरह का कोई मामला मेरे संज्ञान में नहीं है तो गांव का एक युवक जो हम लोग के साथ था उसने कहा आइए हम दूसरी हरिजन बस्ती में चलते हैं शायद वहां कुछ पता चल सके हम लोग दूसरी बस्ती में गए और वहां भी बुजुर्गों से मिलना शुरू किया लेकिन कोई भी बुजुर्ग बताने में असमर्थ था ऐसे ही हम लोगो का पूरा दिन बीत गया और निराश मन से गांव से निकलने को हुए कि देखा कि एक बुजुर्ग व्यक्ति घर के बाहर भोजन कर रहे थे उन्होंने सहसा हम लोगों को बड़े गौर से देखा क्योंकि हम सारे लोग गांव में नए थे तो मैंने ऐसे ही उनसे पूछा कि हम लोग एक परिवार की तलाश में है जिसके पूर्वज का नाम भीखा था उनके लड़के विदेश चले गए थे जिनको अंग्रेज मजदूर के रूप में फिजी देश लेते चले गए थे उन्होंने कहा कि लोरिक के घर में भीखा नाम के व्यक्ति थे आप उनके घर जाकर पता कर ले हम लोग लोरिक के घर पहुंच गए लोरिक और लोरिक के भाई से हमारी भेंट हुई लेकिन उन लोगों को भी भीखा के बारे में कुछ पता नहीं था तभी एक बुजुर्ग महिला जिसकी उम्र 85-90 वर्ष के लगभग रही होगी धीरे-धीरे वहां लाठी के सहारे चलते हुए आई उसने हमारी बात सुनी पूछा बच्चा किसको पूछ रहे हो हमने कहा मैं भीखा की तलाश में हूं जो किसी जमाने में इस गांव में के रहने वाले थे और उनके बेटे यहां से विदेश चले गए उस महिला ने कहा कि आप जिसके दरवाजे खड़े हैं उस परिवार में भीखा थे बुजुर्ग महिला ने बताया कि शादियों में महिलाएं गीत में पूर्वजों का नाम लेती हैं हम अपने जवानी के समय में जब शादियों में इस परिवार में आते थे तो घर की महिलाएं पूर्वजों के नाम में भीखा का नाम लेती थी शादियों में पूर्वजों का नाम लेना एक भारतीय परंपरा है उसी के तहत मुझे यह याद है कि भीखा इसी परिवार से थे इस दौरान जब परिवार वालों से पूछा  कि आप अपने पिता का नाम बताइए पर पिता का नाम बताइए उन लोगों को पर पिता से ऊपर का नाम नहीं पता था लेकिन गांव के 2 बुजुर्गों ने इस बात को साबित किया कि भीखा इसी परिवार से थे लेकिन परिवार वालों को भीखा नाम के बारे में कोई जानकारी नहीं थी फिर लोरिक अपने घर में गए और पुराने कागजात को लेकर आए जो की जमीन का रिकॉर्ड था 1945 के रिकॉर्ड में भी भीखा का नाम नहीं था लेकिन वह फटा कागज यह बताता था इन लोगों के पास उस दौर में भी जमीन हुआ करती थी अब पवन उपाध्याय ने तय किया की गोरखपुर मुख्यालय के रिकॉर्ड रूम से जमीन के कागजात में भीखा नाम की तलाश की जा सकती है उसके बाद पहुंच गए गोरखपुर के रिकॉर्ड रूम जहां पर बड़े बाबू ने बताया कि आपको फॉर्म भरना होगा जिसमें पैमाइश की जाएगी उसके बाद उनसे कहा कि केवल नाम देखना है कोई सबूत नहीं चाहिए लिखित रूप में,  उनको पूरी बात बताई गिरमिटिया से लेकर और वर्तमान समय में कि किस तरह से भारत सरकार की भी मंशा है कि विदेश में रह रहे गिरमिटिया अपने जड़ों से जुड़े भारत से जुड़े ताकि भारत की सांस्कृतिक आदान-प्रदान हो सके इसी क्रम में हम गोरखपुर के एडीएम प्रशासन से मिले और प्रार्थना पत्र दिया जिसको उन्होंने अग्रसारित कर दिया और वह प्रार्थना पत्र लेकर रिकॉर्ड रूम के बड़े बाबू से मिले बड़े बाबू ने अगले दिन का समय दिया अगले दिन पवन उपाध्याय सवेरे 10.00 बजे रिकॉर्ड रूम पहुंच गए रिकॉर्ड को पढ़ने के लिए एक वरिष्ठ अधिवक्ता और एक उर्दू पढ़ने वाले मुंशी को बुलाया गया रिकॉर्ड सामने आया 1983 का रिकॉर्ड देखा गया 1954 का रिकॉर्ड देखा गया 1949 का रिकॉर्ड देखा गया 1949 के रिकॉर्ड को बड़े मुश्किल से पढ़ा जा सका लेकिन 1949 के पहले का रिकॉर्ड जो कि काफी फटा था पढ़ने में असुविधा थी इसलिए वह नाम रिकॉर्ड में नहीं मिल पाया लेकिन यह तो तय था उस बुजुर्ग महिला के आधार पर जिस बुजुर्ग महिला का कोई स्वार्थ नहीं था वह दूसरे परिवार से थी उसने यह बता दिया था कि भीखा के वंशज लोरिक और उनके भाई हैं इस आधार पर हमने यह मान लिया कि लैंड रिकॉर्ड में नाम ना मिला हो तो भी भारतीय संस्कृति के आधार पर जिसमें शादियों में महिलाओं द्वारा गाए गए गीत जिसमें पूर्वजों का नाम शामिल होता है एक हमारी धरोहर है और हमारे परिवार के वंशजों का नाम का इतिहास का एक बहुत बड़ा स्रोत है पवन उपाध्याय ने फोन से आस्ट्रेलिया में रह रहे हैं आनंद जी से बात किया उन्होंने आनंद को लोरिक का मोबाइल नंबर दिया आनंद ने लोरिक से फोन से बात की और महिला के कथन अनुसार शादियों के गीत के आधार पर भारतीय परंपरा के आधार पर उन्होंने यह मान लिया कि उनका परिवार उनका गांव उनका घर यही है।