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कार्तिक पूर्णिमा मेला

कार्तिक पूर्णिमा मेला डलमऊ में मुख्य स्नान पर्व 12 नवम्बर को, गंगा आरती व मेले का उद्घाटन 11 नवम्बर को किया जायेगा। डलमऊ मेला/महोत्सव का आयोजन नगर पंचायत डलमऊ द्वारा 9 नवम्बर से 18 नवम्बर तक आयोजित किया गया है। इस सम्बन्ध में जिलाधिकारी रायबरेली शुभ्रा सक्सेना की अध्यक्षता में तहसील डलमऊ के सभागार में कार्तिक पूर्णिमा मेले से सम्बन्धित अधिकारियो के साथ बैठक की तथा निर्देश दिये कि कार्तिक पूर्णिमा की सभी तैयारियां दुरूस्त रखे उन्होंने जिन अधिकारियों की तैयारियां आधी-अधूरी थी उन्हंे कड़ी फटकार लगाते हुए निर्देश दिये कि कल तक सभी तैयार को पूर्ण कर अवगत कराये। उन्हें एसडीएम सविता यादव व तहसीलदार को निर्देश दिये कि सभी तैयारियां पूर्ण होने व मेले का शुभारम्भ आदि की व्यवस्था को दुरूस्त रखते हुए जानकारियां एडीएम ई आदि को दें। उन्होंने कहा कि मेले में किसी भी प्रकार की नई परम्परा की शुरूवात न हो। मेला गंगा जमुना तहजीब का सशक्त हस्ताक्षर है। इसी लिए सभी प्रकार की व्यवस्था को दुरूस्त रहे ताकि सफल मेले की महक दूर-दूर फैले तथा जनपद का नाम भी रोशन हो सके। मेले में साफ-सफाई दुरूस्त रहने के साथ ही नाव, गोताखोर, प्रशिक्षित नाव चालक आदि रहे तथा महिलाओं के लिए शौचालय व चैजिंग रूम की भी व्यवस्था रहे। गंगा आरती के दौरान यातायात व्यवस्था पार्किग आदि भी व्यवस्था को दुरूस्त रखी जाये। इसके अलावा अन्य बिन्दुओं पर विस्तार से चर्चा की गई।
 इस मौके पर पुलिस अधीक्षक स्वप्निल ममगाई ने भी सुरक्षा व्यवस्था आदि के सम्बन्ध में विस्तार से जानकारी दी तथा सम्बन्धित सीओ व सुरक्षा कर्मियों को सतर्क रहने के दिये निर्देश तथा मेले की ड्यूटी को निर्वहन भली-भांति करें।


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पक्षी आपका भाग्य बदले

मनुष्य का जीवन अपने आसपास के वातावरण से ही प्रभावित होता है। व्यक्ति के आस-पास के पशु पक्षी उसके जीवन का अभिन्न अंग है। भारतीय ऋर्षियों तथा संसार के अध्यात्मवादियो ने संसार के पक्षियों को ना केवल ज्योतिष तथा मनुष्य के भाग्य से जोड़ा है। बल्कि पक्षियों को उपयोग शकुन ज्योतिष, फलित तथा प्रष्न ज्योतिष तथा अनेकों ज्योतिष, तांत्रिक उपचारों और शारीरिक मानसिक रोगों के निवारण में किया है। भारत मे पंच प़क्षी शास्त्र, कल्ली पुराण पर आधारित तोते द्वारा भविष्यवाणी, पक्षी तंत्र तथा शकुन ज्योतिष का प्रयोग आदिकाल से ही किया जाता है भारत मे गरूड़ जी, नीलकंठ, काकभुषुंडी,, हंस, जटायु व संपाती, शुकदेव जी आदि दिव्य पक्षियों तथा अनेक देवी देवताआंे वाहन के रूप मे पक्षियों को प्रयोग किये जाने का  वर्णन है। जैसे भगवान विष्णु का गरूड़, कार्तकेय जी का मयूर, माता लक्षमी का उल्लू, विश्वकर्मा, वरूण जी तथा स्वरसती जी का हंस आदि शनिदेव का कौआ आदि का प्राचीन काल मे पक्षियों द्वारा डाक सेवा युद्ध संबधी शकुन का भी काम लिया जाता था पक्षियों को स्वतंत्रता, नवीन विचारों, आनंद, तनाव, मुक्ति, प्रषंसा, यष, धन्यवाद देने, प्रजनन श

परिवर्तन योग से करें भविष्यवाणी

भारतीय ज्योतिशशास्त्र में भविष्यकथन के सैकड़ों सूत्रो का वर्णन है। इन्ही सूत्रों मे से एक है परिवर्तन योग जिसका वर्णन पाराशरीय और नाड़ी ग्रन्थों दोंनों मे पाया जाता है। हाँलाकि दोनो प्रकार के ग्रन्थों में इन सूत्रों को विभिन्न तरीको से प्रयोग किया गया है ज्योतिष मे परिवर्तन योग के तीन रूप पाये जाते हैं। 1. भाव परिवर्तन 2. राशि परिवर्तन 3. नक्षत्र परिवर्तन  भाव परिवर्तन पाराशरीय व कुछ नाड़ी ग्रन्थों जैसे षुक्र नाड़ी मे इसके सूत्रो का वर्णन पाया जाता है। जो भावा के स्वामियो के बीच स्थान परिवर्तन से बनता है। जैसे चतुर्थेश षष्ठ भाव मे जाय और षष्ठेश चतुर्थ भाव मे जाय। इसके भी तीन भेद हैं। 1. दो शुभ भावों के स्वामियों का परस्पर परिवर्तन जैसे लग्न व पंचम भाव का परिवर्तन या दो केन्द्रेशों का परिवर्तन या केन्द्र और त्रिकोण भाव मे परस्पर परिवर्तन। 2. दो त्रिकेशांे का परिवर्तन जो विपरीत राजयोग बनाता है। 3. किसी केन्द्रेश या त्रिकोणेश का त्रिकेश से परिवर्तन। जैसे दशमेश का द्वादेश से परिवर्तन या पंचमेश या द्वादेश के बीच परिवर्तन। 2. ग्रह या राशि परिवर्तन  इसका वर्णन स्व. आर. जी. राव द्वारा अनुवादित और

जेल जाने के योग

ज्योतिष शास्त्र अनुसार कुंडली के आठवें मतांतर से बारहवें भाव से कारावास तथा सजा का विचार किया जाता है। कुंडली के इस घर में राहु अगर अष्टमेश के साथ हो तो उसके अशुभ प्रभाव के कारण व्यक्ति को किसी बड़े अपराध के कारण जेल जाना पड़ता है। शनि  मंगल और राहू मुख्य रूप से यह तीन ग्रह एवम् इनका आपसी सम्बन्ध जेल के कारक है। शनि व 12 भाव सजा का कारक है। छठा भाव व मंगल राहू अपराध के कारक है। अगर किसी व्यक्ति की कुण्डली में मंगल और राहु एक साथ किसी भाव में बैठकर युति करते हैं तो जेल योग बनता है केतु रस्सी बेड़ी हथकड़ी का कारक ग्रह हैं अशुभ मंगल व राहु के बीच दृष्टि संबंध बनता हो तो अंगारक योग की वजह से ऐसा इंसान हिंसक स्वभाव वाला हो जाता है और अपराध करता है जिससे जेल जाना पड जाता है। शनि मंगल व राहु मुख्य रूप से जेल यात्रा कराने का भी योग बनाते हैं और इनकी युति या आपस में दृष्टि इस तरह की स्थितियां बना देती है कि आखिर इंसान को जेल जाना ही पड जाता है। जन्मकुंडली में सूर्यादि ग्रह समान संख्या में लग्न एवं द्वादश तृतीय एवं एकादश, चतुर्थ, दशम, षष्ठ एवं अष्टम भाव में स्थित हो तो यह बंधन योग बनाता है यह स्थिति