सीधे मुख्य सामग्री पर जाएं

लापरवाही क्षम्य नही

जिलाधिकारी, रायबरेली शुभ्रा सक्सेना ने बचत भवन के सभागार में अधिकारियों की कार्यो की समीक्षा बैठक करते हुए निर्देश दिये कि सरकार की मंशा के अनुरूप कार्यो में प्रगति लाये इसके अलावा जो भी निर्माण व विकास कार्य आधे अधूरे है या जो कार्य अपूर्ण है उन्हें शीघ्र युद्ध स्तर पर पूर्ण करें। उन्होंने कहा कि निर्माण एवं विकास कार्यो में गुणवत्ता, मानक व समयबद्धता का विशेष ध्यान रखा जाये। उन्होंने एएसपी को कानून व शान्ति व्यवस्था को प्रभावी तरीके से दुरूस्त रखें। जिलाधिकारी ने निर्माण, विकास व शासकीय कार्यो के क्रियान्वयन में किसी प्रकार की शिथिलता हिलाहवाली, लापरवाही क्षम्य नही की जायेगी। बैठक में नलकूप अधिकारी की अनुपस्थिति, मण्डल में खाद्य सुरक्षा, टीकाकारण, आयुष्मान भारत के अन्तर्गत गोल्डन कार्ड वितरण, मुख्यमंत्री कन्या सुमंगला योजना आदि की प्रगति संतोषजनक न पाये जाने सम्बन्धित सीएमओ, डीएसओ आदि व उनकी टीम के अधिकारी/कर्मचारियों वेतन रोकने चेताने स्पष्टीकरण आदि के निर्देश देने के साथ ही कहा कि युद्ध स्तर पर कार्य करे तथा अपने कार्यो में प्रगति लाये। इसके अलावा डीआईओएस, बीएसए, आईसीडीएस आदि अधिकारियों को कड़े निर्देश देते हुए चेताया। 
 जिलाधिकारी शुभ्रा सक्सेना ने कहा कि अधिकारी अपने विभागीय कार्यो में तेजी लाये तथा लक्ष्य के अनुरूप कार्यो को पूरा करें निर्देश दिये कि विकास सम्बन्धित कार्यो को युद्ध स्तर पर पूरा करें। आमजन की समस्याओं के प्रति संवेदनशील रहने व उनकी समस्याओं का निस्तारण युद्ध स्तर पर करने के दिये तथा जनपद में कानून व शान्ति व्यवस्था को दुरूस्त रखने के साथ ही अपराध को प्रभावी तरीके से नियंत्रण करने के निर्देश दिये। जिलाधिकारी ने मुख्य पशु अधिकारियों को कड़े निर्देश देते हुए कहा कि गौ संरक्षण केन्द्र व निराक्षित गौवंश के प्रति शासन द्वारा बताये गये निर्देशों के अनुरूप कार्यवाही करे तथा जनपद में आवास घुमते हुए संडों की बधियाकरण कराकर उनको गौशाला केन्द्रों में रखे। उन्होंने 10 अधिकारियों गौशाला के निरीक्षण के लिए भेजा तथा तत्काल रिपोर्ट भी प्रस्तुत करें। उन्होंने धान क्रय केन्द्रों की प्रगति के लिए सम्बन्धित अधिकारी को निर्देश दियें जनपद में 71 धान क्रय केन्द्र संचालित है जिनमें 08 धान क्रय केन्द्र जिसका संचालन नही हुआ है उन्हें शीघ्र संचालित कराये। इनके अलावा उन्होंने पराली व कुड़ा जनपद में जलाने वालों के विरूद्ध प्रथम सूचना रिपोर्ट दर्ज कराये। समाज कल्याण अधिकारी को निर्देश दिये की 127 जोड़े जो अभी सामूहिक विवाह योजनान्तर्गत शेष उनकी सामूहिक विवाह इसी माह के अन्त तक अवश्य करा दें। उन्होंने पीडब्ल्यूडी विभाग के नई सड़के मेन्टेनेस आदि जो कार्य कराये गये उनके सत्यापन का कार्य कराये जाने के लिए मुख्य विकास अधिकारी को निर्देश दिये। इसके अलावा अन्य बिन्दुओ पर विस्तार से चर्चा की गई।
 इस मौके पर मुख्य विकास अधिकारी राकेश कुमार, मुख्य चिकित्साधिकारी शरद कुमार वर्मा, अपर  पुलिस अधीक्षक नित्यानन्द राय, डीएफओ तुलसीदास शर्मा सहित जनपद स्तरीय अधिकारीगण उपस्थित थे।



इस ब्लॉग से लोकप्रिय पोस्ट

पक्षी आपका भाग्य बदले

मनुष्य का जीवन अपने आसपास के वातावरण से ही प्रभावित होता है। व्यक्ति के आस-पास के पशु पक्षी उसके जीवन का अभिन्न अंग है। भारतीय ऋर्षियों तथा संसार के अध्यात्मवादियो ने संसार के पक्षियों को ना केवल ज्योतिष तथा मनुष्य के भाग्य से जोड़ा है। बल्कि पक्षियों को उपयोग शकुन ज्योतिष, फलित तथा प्रष्न ज्योतिष तथा अनेकों ज्योतिष, तांत्रिक उपचारों और शारीरिक मानसिक रोगों के निवारण में किया है। भारत मे पंच प़क्षी शास्त्र, कल्ली पुराण पर आधारित तोते द्वारा भविष्यवाणी, पक्षी तंत्र तथा शकुन ज्योतिष का प्रयोग आदिकाल से ही किया जाता है भारत मे गरूड़ जी, नीलकंठ, काकभुषुंडी,, हंस, जटायु व संपाती, शुकदेव जी आदि दिव्य पक्षियों तथा अनेक देवी देवताआंे वाहन के रूप मे पक्षियों को प्रयोग किये जाने का  वर्णन है। जैसे भगवान विष्णु का गरूड़, कार्तकेय जी का मयूर, माता लक्षमी का उल्लू, विश्वकर्मा, वरूण जी तथा स्वरसती जी का हंस आदि शनिदेव का कौआ आदि का प्राचीन काल मे पक्षियों द्वारा डाक सेवा युद्ध संबधी शकुन का भी काम लिया जाता था पक्षियों को स्वतंत्रता, नवीन विचारों, आनंद, तनाव, मुक्ति, प्रषंसा, यष, धन्यवाद देने, प्रजनन श

परिवर्तन योग से करें भविष्यवाणी

भारतीय ज्योतिशशास्त्र में भविष्यकथन के सैकड़ों सूत्रो का वर्णन है। इन्ही सूत्रों मे से एक है परिवर्तन योग जिसका वर्णन पाराशरीय और नाड़ी ग्रन्थों दोंनों मे पाया जाता है। हाँलाकि दोनो प्रकार के ग्रन्थों में इन सूत्रों को विभिन्न तरीको से प्रयोग किया गया है ज्योतिष मे परिवर्तन योग के तीन रूप पाये जाते हैं। 1. भाव परिवर्तन 2. राशि परिवर्तन 3. नक्षत्र परिवर्तन  भाव परिवर्तन पाराशरीय व कुछ नाड़ी ग्रन्थों जैसे षुक्र नाड़ी मे इसके सूत्रो का वर्णन पाया जाता है। जो भावा के स्वामियो के बीच स्थान परिवर्तन से बनता है। जैसे चतुर्थेश षष्ठ भाव मे जाय और षष्ठेश चतुर्थ भाव मे जाय। इसके भी तीन भेद हैं। 1. दो शुभ भावों के स्वामियों का परस्पर परिवर्तन जैसे लग्न व पंचम भाव का परिवर्तन या दो केन्द्रेशों का परिवर्तन या केन्द्र और त्रिकोण भाव मे परस्पर परिवर्तन। 2. दो त्रिकेशांे का परिवर्तन जो विपरीत राजयोग बनाता है। 3. किसी केन्द्रेश या त्रिकोणेश का त्रिकेश से परिवर्तन। जैसे दशमेश का द्वादेश से परिवर्तन या पंचमेश या द्वादेश के बीच परिवर्तन। 2. ग्रह या राशि परिवर्तन  इसका वर्णन स्व. आर. जी. राव द्वारा अनुवादित और

जेल जाने के योग

ज्योतिष शास्त्र अनुसार कुंडली के आठवें मतांतर से बारहवें भाव से कारावास तथा सजा का विचार किया जाता है। कुंडली के इस घर में राहु अगर अष्टमेश के साथ हो तो उसके अशुभ प्रभाव के कारण व्यक्ति को किसी बड़े अपराध के कारण जेल जाना पड़ता है। शनि  मंगल और राहू मुख्य रूप से यह तीन ग्रह एवम् इनका आपसी सम्बन्ध जेल के कारक है। शनि व 12 भाव सजा का कारक है। छठा भाव व मंगल राहू अपराध के कारक है। अगर किसी व्यक्ति की कुण्डली में मंगल और राहु एक साथ किसी भाव में बैठकर युति करते हैं तो जेल योग बनता है केतु रस्सी बेड़ी हथकड़ी का कारक ग्रह हैं अशुभ मंगल व राहु के बीच दृष्टि संबंध बनता हो तो अंगारक योग की वजह से ऐसा इंसान हिंसक स्वभाव वाला हो जाता है और अपराध करता है जिससे जेल जाना पड जाता है। शनि मंगल व राहु मुख्य रूप से जेल यात्रा कराने का भी योग बनाते हैं और इनकी युति या आपस में दृष्टि इस तरह की स्थितियां बना देती है कि आखिर इंसान को जेल जाना ही पड जाता है। जन्मकुंडली में सूर्यादि ग्रह समान संख्या में लग्न एवं द्वादश तृतीय एवं एकादश, चतुर्थ, दशम, षष्ठ एवं अष्टम भाव में स्थित हो तो यह बंधन योग बनाता है यह स्थिति