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महायोेगी पायलेट बाबा

महायोेगी पायलेट बाबा योगी बनने से पहले भारतीय वायुसेना मे पायलेट थे उन्होंने 1962,1965 और 1971 की जंग मे भाग लिया था उनके अनुसार एक बार वो जोधपुर के पास भारत पाकिस्तान वायु सीमा पर विमान उड़ा रहे थे कि तभी उन्होंने देखा कि दूर आकाश मे एक पुरूष तथा एक महिला बिना विमान के उड़ रहे थे यह देखकर बड़ा आश्चर्य हुआ साथ ही घबराहट भी हुयी पुरूष वायुसेना की वर्दी पहने था महिला के बदन पर सफेद रेग की साड़ी थी उन्होने विमान से उनका पीछा किया पर कोई फायदा नही हुआ वे जितना तेजी से विमान उड़ाते वे दोनो उससे भी तेजी से उड़ने लगते रहते उन दोनो के बीच उतना ही फासला बना रहा बाबाजी फिर भी उनका पीछा करते रहे फिर वो पाकिस्तान की सीमा में चले गये और उन्होने बाबाजी को हाथ के ईशारे से वापस लौटने का ईशारा किया मैने उनकी आज्ञा का पालन किया और फलाईट से लौट कर जी बाबाजी ने अपने क्वाटर का ताला खोला तो वे दंग रह गये बाबाजी ने देखा कि वह स्त्री पुरूष ड्राइंगरूम मे बैठे है। जिनका मैने पीछा किया था बाबा जी पसीने से नहा गये उन्होने लड़खड़ाते हुये पूछा आप लोग यहां कैसे पुरूष ने कहा कि मै द्वितीय विश्वयुद्ध मे ब्रिटिश वायुसेना मे अधिकारी था मेरा नाम जी सिंह है। एक बार प्लेनक्रेश मे मेरी मृत्यु हो गई मेरी मृत्यु के बाद मेरी पत्नी सती हो गई अब हम दोनो साथ रहते है। और अपनी ईच्छानुसार रूप धारण कर सकते हैं। यह कह कर दोनो अन्र्तध्यान हो गये बाबाजी घंटो तक शून्य मे ताकते रहे एक कबार 1962 मे बाबाजी नेफा सेक्टर मे विमान उड़ा रहे थे इनके साथ दो अंय पायलटस भी विमान मिग उड़ा रहे थे अचानक उन दोनो पायलेट के प्लेन हासिम रजा स्थान पर क्रेश कर गये दोनो प्लेन जलते हुये नीचे गिर गये अचानक बाबा जी के भी विमान मे भी खराबी आ गई विमान का ईंजन फेल हो गया था वो लगातार नीचे को भागने लगा विमान को निंयत्रित करने की सारी कोशिशें बेकार साबित हो गई बाबाजी के साथ दो अंय अधिकारी भी थे अचानक उन्होने काकपिट मे देखा कि विमान मे उनके बगल मे एक बाबा जी आ गये जो ेएक कुशल पाॅयलैट की तरह विमान उड़ाने लगे विमान को पूरी तरह निंयत्रित करके विमान को उपर उठा कर डोंगरा एयरपोर्ट की ओर ले जाने लगे विमान डोगरा एयरपोर्ट पर उतारा तीनो पायलेट के साथ बाबाजी के साथ भी उतरे सब चुप थे कुछ कदम चलने के बाद बाबाजी गायब हो गये बाद मे इंजीनियरर्स और टेकनिशयन्स की टीम ने विमान की पूरी जाँच की और पाया कि विमान का इंजन पूरी तरह खराब था इसके बाद पायलैट बाबा की मानसिकि स्थिति मे परिवर्तन आया एक दिन उन्हें याद आया कि छात्र जीवन मे उन्हें एक बाबा कभी कभी विशेष उत्सवों पर मिल जाते थे और केवल दो रूपये मांगते थे और रूपया पाकर चले जाते थे काफी सोचने पर ध्यान आया विमान उड़ाने वाला बाबा जी का चेहरा छात्रजीवन वाले बाबा जी से काफी मिलता जुलता है। 1970 मे पाललेट बाबा नौकरी छोड़ कर बाबा जी को तलाश करने लगे काफी तलाश करने के बाद उनके वही गुस् उन्हें नेपाल के एक जंगल मे मे मिले गुरू जी बोले मै ही तुम्हारा गुरू हूँ मेरे साथ चलो मैने देखा कि विमान चलाने वाले ओर दो रूपया मांगने वाले बाबा यही है। फिर बाबा जी उन्हें नारायणी नदी के किनारे वाले जंगल मे ले गये वहाँ उन्होने बाबा गोरखनाथ तथा औैैैैघड़ बाबा के साथ उन्हें योग की शिक्षा दी पायलेट बाबा ने कई वषों तक तिब्बत के महातपा गुरू जी के राजेश्वरी गुफा मठ मे योग की शिक्षा ली बाबा जी 16 साल तक हिमालय के गर्भ मे बस नंदा देवी घाटी मे रहे उन्होने हिमालय मे सात वर्षों मे 16,00 किमी की यात्रा की और और वे कभी 10,000 फुट की ऊँचाई से नीचे नही आये। बाबाजी ने कई कई्र बार लंबी समाधियां ली है। गुरू जी का नाम हरिबाबा है जिनकी उम्र 1980 मे 646 वर्ष थी कई बरसों के बाद गुरू जी ने पिंडारी ग्लेशियर के पास अपना आश्रम बनाने का आदेश दिया पायलेट बाबा ने बताया कि आज भी हिमालय की दूरदराज दुगर्म घाटियों की गुफाओं मे पुराने योगियों ऋषियों, गंधर्वों, किन्नरों, हिममानवों की जातियां निवास करती है। कुछ जातियां अंय ग्रहों से आती है। कुछ का ज्ञान तो साधारण इन्द्रियों से हाक जाता है कुछ के लिय ेउच्च स्तर की साधना करनी पड़ी है। हिमालय मे एक 60'65 वर्ग मील की एक गुफा है। जो पूर्णतः रक्षित है। इसमे किसी बाहरी जीव या व्यक्ति का प्रवेश निषेध है। गुफा मे कुछ विशेष प्रकार के प्रकाशित पत्थरों से रोशनी होती है। गुफा मे थोड़ी दूर पर एक सुंदर तालाब है। जिसमे सुदर घाट बने है। जिसमे स्नान करने के लिये दूसरे ग्रह के प्राणी आते है। जिनके विमान उड़न तश्तरीनुमा 5-6 फुट व्यास के होते है यह प्राणी तीन साढे तीन फुट लंबे लाल रंग के थे हिमालय शक्ति रहस्य अ।ैर आश्चर्य का केन्द्र है। इन शक्तियों द्वारा विश्व शांति स्थापित करना संभव है। कपिल सिंह उर्फ पायलेट बाबा का जंम 15 जुलाई 1938 को सासाराम बिहार में हुआ था वे 1957 मे वायुसेना मे शामिल हुये।


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