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नजर का उतारा

 
संसार की लगभग सभी सभ्यताओ में विभिन्न समस्याओं के लिये अनेक प्रकार की धार्मिक तांत्रिक, मांत्रिक क्रियाओं को प्रयोग किया जाता है। जिनमे गंडा, तावीज, झाड़, फूंक, जादू-टोना, उतारे आदि कुछ प्रमुख तरीके है अक्सर लोग सुनते है पुराने जमाने मे कुछ सपेरे सांप या बिच्छू का जहर उतारते थे या कुछ देहाती ओझा, बैगा या सयाने दांत का दर्द, बाई या पीलिया झाड़ते थे जिसमे वे कभी-कभी साबर या लोक भाषा मे बनाये अपने उल्टे-सीधे मंत्रों का सहारा लेते थे कि उतारा या हटाना सीधा पीड़ित व्यक्ति पर सवार बला पर सीधा असर करता है आम तौर पर उतारे मिठाइयां, कौड़ियों, लाल मिर्च या गोमती चक्र आदि के होते है मिठाई  निम्न जाति की प्रेतात्माओं को बहु प्रिय होती है। मिठाई को पीड़ित व्यक्ति के सिर से पैर तक उपर से नीच तक सात बार उतारना चाहिये फिर उसे कुत्ते या गाय को दे देना चाहिये इनमे इन उतारो को पचाने की शक्ति होती है। 
रविवार का उतारा:-  मावे की बर्फी गाय का दे।
सोमवार का उतारा:- मावे की बर्फी गाय का दे।
मंगलवार का उतारा:- मोतीचूर के लडडू कुत्ते को दे।
बुधवार का उतारा:- उर्द के दाल की ईमरती या मोतीचूर के लडडू कुत्ते को दे।
गुरूवार का उतारा:- पांच प्रकार की मिठाईयां एक दोने में शाम के समय धूप ईलायची, अगरबत्ती जलाकर बिना बोले किसी बहुत पुराने पीपल के पेड़ के नीचे रख आये मंदिर के किनारे का पीपल बहुत शक्तिशाली होता है। 
शुक्रवार का उतारा:- गुड़ या मोतीचूर के मोतीचूर के लडडू शाम के समय कुत्ते को दे
शनिवार का उतारा:- शनिवार को उर्द के दाल की ईमरती और मोतीचूर के लडडू दोनों से उतारा करके कुत्ते को दे।
जायफल का उतारा:- जायफल को पीड़ित व्यक्ति के सिर से पैर तक उपर से नीचे तक सात बार उतारना चाहिये फिर आग मे जलाना देना चाहिये। 
लौंग:- दो लौंग को पीड़ित व्यक्ति के सिर से पैर तक उपर से नीचे तक सात बार उतारना चाहिये फिर पान के पत्ते पर कपूर मे जलाना देना चाहिये। 
नीबू:- को पीड़ित व्यक्ति के सिर से पैर तक उपर से नीचे तक सात बार उतारना चाहिये फिर नीबू को खड़ा काट कर चैराहे पर रख आयें।
धार:- पूर्वी उत्तर प्रदेश मे चेचक के निवारण हेतु धार का उतारा किया जाता है। उसमे गुड़, हल्दी, मेवा, लौंग और कपूर कचरी (कच्चा कपूर) मिलाकर सात बार उतार कर देवी को चढा दिया जाता है। 
नजर का उतारा:- यदि किसी बच्चे या बड़े आदमी को नजर लग गई है तो 5 या 7 या 11 लाल सूखी मिर्चें डंडी सहित लें इन मिर्चों को पीड़ित व्यक्ति के उपर से सात बार उतार लें इसे जलती आग मे जला दें या सरसो के तेल का एक दीपक बना कर उसे जला कर पीड़ित व्यक्ति के उपर से सात बार उतार लें फिर उसकी बत्ती को निकाल कर किसी दो तीन फुट आदि ऊँचे चबूतरे पर रख कर लटका दे यदि नजर लगी होगी तो बत्ती से लगातार बूंदे नीचे गिरने लगेंगी। 
गंडा:- यह किसी धागे मे मंत्र पढते हुये उसमें गांठे लगा कर तैयार किया जाता है। कभी उसमे किसी विशेष पेड़ की जड़ या तने को धागे मे गांठें लगा कर माला बनाई जाती है। काली तुलसी, अपामार्ग, चिड़चिड़े की जड़ या सफेद धतूरे की जड़ का गंडा बुखार दूर करता है। 
1. किसी शुभ दिन पुर्ननवा की जड़ लाये उसे धोकर 21 टुकड़े करे फिर सूत के नौ धागो की डोरी तैयार करके इन टुकड़ो को थोड़ी दूर पर गांठ लगा कर बांधे ओर पीलिया के रोगी के गले मे पहना दें। धीरे-धीरे पीलिया झड़ता जायेगा और माला लंबी होती जायेगी 
2. लाल अपार्माग की ताजी पत्तियों का गंडा कंठमाला तथाा ताजी ब्रह्मदंडी की पत्तियों को गंडा मिरर्गी के रोग का नाश करता है। मदार या भुई आंवला की जड़ की सात टुकड़ो को गंाठ काले धागे मे पहनाने से बच्चे के डर का नाश करता है। सफेद मदार का गंडा नजर बाधा का नाश करता है। लहसुन की कलियों, पलाश की जड़, लाल अपामार्ग का गंड़ा भूत बाधा व उससे पैदा हुये बुखार का नाश करता है। 
3. सफेद सूत मे काले धतूरे की जड़ से गंडा बना कर दांयी बांह मे रविववार को पहनाने से भूत प्रेत की बाधा शांत होगी। 
4. काले सूत मे सफेद घुंघची की जड़ या काले धतूरे की जड़ का गंडा बना कर दांयी बांह मे पहनाने से प्रेतबाधा शांत हो। 
गंडा बनाने की पूर्ण विधी तथा उसकी बारीकियां जानने के लिये लेखक से सम्पर्क करें।
झाड़ा या झाड़ना:- किसी पीड़ित व्याक्ति के उपर से मंत्र पढते हुये शरीर में व्याप्त नकारात्मक उर्जा भूत-प्रेत काला जादू या नजर को मंत्रोपचार के साथ नीचे की ओर क्रिया मानो शरीर की धूल झाड़ रहे हों। को झाड़ा कहते है। रामानंदी सम्प्रदाय के रामदास नामक एक साधु ने मुझे बताया कि झाडा़ चार प्रकार से होता है। नीम की टहनी से, कपड़े से मोरपंख से और चैथा चाकू से।
फूंक:- फूंक मे शरीर मे व्याप्त बला या नकारात्मक शक्ति पर मंत्र प्रहार किया जाता है। मंत्र पढ पढ कर या तो शरीर पर फूंकते है। ताकि उपरी बला पर मंत्र प्रहार हो या मंत्र पढ कर पानी तेल, धी शक्क्र, काली उर्द या पीली सरसों के दाने आदि फूंक कर मारने या पीड़ित को खाने या पीने को दिया जाता है।। 
तावीज:- तावीजों का प्रयोग सारे संसार मे आदिकाल से ही होता आ रहा है। संसार की विभिन्न जातियों और धर्मो मे किसी देवी-देवता के मंत्रों से अभिमंत्रित कोई वस्तु भोजपत्र या कागज पर विभिन्न प्रकार की स्याही से लिखा यंत्र होता है। इन्हें अष्ठगंध, केसर, काजल लाल चंदन या मुर्गे के खून आदि से लिखा जाता है। सोने चाँदी, ताम्बे, कपड़े के खोलों मे भर कर हाथ, गले कमर या भुजा मे पहना जाता है। कभी-कभी  तावीजों मे कुछ पत्थरो, पशु-पक्षी के अंग, हडिडयों, पेड़ों के बीज, छाल आदि को भी भरा जाता है। सारे रत्न तावीज ही है। मुस्लिम तांत्रिक कभी-कभी किसी नक्श को तावीज कागज या चीनी मट्टी के प्लेट पर जाफरान आदि से लिखकर पीड़ित को पिलाते है। मेरे एक मुस्लिम तांत्रिक मित्र मुसाफिर लखनबी सात चीनी मट्टी के प्लेट पर जाफरान से नक्श लिखकर पीड़ित को पिलाते है। 
पलीता:- पलीते मे कागज पर किसी यंत्र देवी देवता भूत प्रेत की विभिन्न स्याहियों से एक चित्र या आकृति बनाई जाती है। फिर इन्हें रोगी या पीड़ित व्यक्ति को दिखा कर जला दिया जाता है। 
टोना-टटका:- विभिन्न रोगो या बलाओं से मुक्ति के लिये कुछ घरेलु वस्तुओं, वनस्पतियो को बिना मंत्र पढे कही रखने या पीड़ित से उतारने को टटका कहते है। जैसे लोटे मे पानी फूल दो लौंग डाल कर रोगी से सात बार उतार कर बिना बोले चैराहे पर डाल देें।
टोना:- जब कोई तांत्रिक साबरी या देव मंत्र का प्रयोग करके किसी व्यक्ति पर प्रहार या उसकी रक्षा करता है। तो यह टोना कहलाता है। यह अच्छा व बुरा दोनो होता है।


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