सीधे मुख्य सामग्री पर जाएं

पोषक तत्वों से भरपूर होता है राजमा

राजमा गुणकारी खाद्य पदार्थ है, जो पोषक तत्वों से भरपूर होता है, इसकी कई प्रजातियां पाई जाती हैं इसमें फाइबर भी पाया जाता है, जो पाचन क्रिया को मजबूत बनाने के साथ-साथ कब्ज जैसी परेशानियों से भी छुटकारा दिलाने का काम करता है। इसके अलावा, इसमें आयरन, कॉपर, फोलेट ,मैग्रीशियम, कैल्शियम और विटामिन-सी जैसे पोषक तत्व पाए जाते हैं। शरीर से जुड़ी विभिन्न परेशानियों के लिए राजमा किस प्रकार फायदेमंद होता है। सेहत से भरपूर है राजमा के गुण:-
- राजमा खाने से हमें ताकत मिलती है, क्यूंकि इसमें आयरन की अधिकता होती है। शरीर में मेटाबॉलिज्म बढ़ाने व एनर्जी के लिए आयरन सबसे जरुरी है। इसके खाने से शरीर में ऑक्सीजन का प्रवाह सुचारू रूप से होता रहता है।
- वजन कम करने में सहायक राजमा में औसत कैलोरी पाई जाती है, जिसे किसी भी उम्र का इन्सान आसानी से खा सकता है। राजमा को सूप व सलाद में लंच में खाना चाहिए ज्यादा फायदा मिलेगा। जो अपने वजन को मेन्टेन रखना चाहते है उन्हें राजमा जरुर खाना चाहिए क्यूंकि इसमें सभी तरह के पोषक तत्व पाये जाते हैं।
- राजमा में मौजूद फाइबर शरीर में मेटाबॉलिज्म मेन्टेन करता है। ये कार्बोहाइड्रेट को कम करता है जिससे ब्लडशुगर कम होता है।
- राजमा शरीर में कोलेस्ट्रोल कम करने में सहायक है। राजमा में मौजूद फाइबर पेट में जाकर जेल जैसा हो जाता है जो कोलेस्ट्रोल को कम करने में सहायक होता है।
- राजमा में मौजूद मैग्नीशियम व पोटैशियम के आलावा प्रोटीन व फाइबर ब्लडप्रेशर को कंट्रोल करते है, साथ ही हृदय गति को भी सामान्य रखता है और इससे  हृदय स्वस्थ्य और सुरक्षित रहता है।
- राजमा फाइबर व प्रोटीन की खान तो है ही लेकिन साथ ही साथ इसमें एंटीऑक्सीडेंट भी पाया जाता है। ये एंटीऑक्सीडेंट हमारे शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली को मजबूत बनाते हैं, जिससे शरीर में संक्रमण का असर जल्दी नहीं होता है।
- राजमा में मौजूद एंटीऑक्सीडेंट कैंसर के दुष्प्रभाव को कम करता है और कैंसर से बचाता है ये फ्री रेडिकल्स को सुरक्षित रखता है, साथ ही विटामिन कोशिकाओं को सुरक्षित रखता है जो कैंसर का मुख्य कारण होते हैं।
- राजमा खाने से शरीर के अंदर के सारे विषैले तत्व बाहर निकल जाते है, ये पेट को पूरी तरह से साफ करता है, ये सिरदर्द जैसी छोटी समस्या को नही होने देता है। साथ ही ये पाचन में भी मदद करता है, राजमा पेट में घुलनशील फाइबर बनाता है जो पाचन में बहुत सहायक होता है।
- राजमा खाने से दिमाग मजबूत होता है याददाश्त भी बढती है। इसमें मौजूद विटामिन दिमाग के लिए बहुत फायदेमंद है इसके अलावा इसमें मौजूद मैग्नीशियम माइग्रेन की समस्या को भी हल करता है। हफ्ते में एक बार खाने से ये परेशानी दूर होती है।
- राजमा में कैल्शियम, बायोटिन व मैंगनीज होता है जो हड्डी, नाखून व बालों के लिए बहुत अच्छा होता है। इससे हड्डी मजबूत होती है, नाखून चमकदार होते हैं व जल्दी टूटते नहीं और ना ही इनमें फंगस लगती है। इसी तरह ये बालों को भी मजबूत करता है बालों का गिरना कम होता है और बाल लम्बे काले और घने बने रहते हैं।
- राजमा में बहुत अधिक मात्रा में प्रोटीन होता है। जो लोग नॉनवेज नहीं खाते है, उनके लिए राजमा प्रोटीन का अच्छा श्रोत होता है। राजमा को चावल के साथ खाने से यह एक अच्छी मील बन जाती है और ये शरीर को सारे पोषक तत्व देती है।
- राजमा में फाइबर बहुत अधिक होता है, इसे खाने पर आपको देर तक भूख नहीं लगती और शरीर को आसानी से पचने वाले फाइबर मिलते है।
सावधानियां:-
पाचन में परेशानी किसी भी चीज की अधिकता हानिकारक होती है। इसमें फाइबर की अधिकता होने के कारण, ज्यादा मात्रा में राजमा खाने से आपके शरीर में जरूरत से ज्यादा फाइबर पहुँच जाता है। इससे आपके पाचनतंत्र में परेशानी होती है, साथ ही गैस, डायरिया, पेट दर्द, आँतों में दर्द आदि हो सकता है। राजमा में आयरन बहुत ज्यादा मात्रा में पाया जाता है इससे शरीर के आयरन की मात्रा बिगड़ जाती है और साथ ही साथ ब्रेन, हार्ट रिस्क बढ़ता है। स्ट्रोक की परेशानी इससे हो सकती है।


इस ब्लॉग से लोकप्रिय पोस्ट

पक्षी आपका भाग्य बदले

मनुष्य का जीवन अपने आसपास के वातावरण से ही प्रभावित होता है। व्यक्ति के आस-पास के पशु पक्षी उसके जीवन का अभिन्न अंग है। भारतीय ऋर्षियों तथा संसार के अध्यात्मवादियो ने संसार के पक्षियों को ना केवल ज्योतिष तथा मनुष्य के भाग्य से जोड़ा है। बल्कि पक्षियों को उपयोग शकुन ज्योतिष, फलित तथा प्रष्न ज्योतिष तथा अनेकों ज्योतिष, तांत्रिक उपचारों और शारीरिक मानसिक रोगों के निवारण में किया है। भारत मे पंच प़क्षी शास्त्र, कल्ली पुराण पर आधारित तोते द्वारा भविष्यवाणी, पक्षी तंत्र तथा शकुन ज्योतिष का प्रयोग आदिकाल से ही किया जाता है भारत मे गरूड़ जी, नीलकंठ, काकभुषुंडी,, हंस, जटायु व संपाती, शुकदेव जी आदि दिव्य पक्षियों तथा अनेक देवी देवताआंे वाहन के रूप मे पक्षियों को प्रयोग किये जाने का  वर्णन है। जैसे भगवान विष्णु का गरूड़, कार्तकेय जी का मयूर, माता लक्षमी का उल्लू, विश्वकर्मा, वरूण जी तथा स्वरसती जी का हंस आदि शनिदेव का कौआ आदि का प्राचीन काल मे पक्षियों द्वारा डाक सेवा युद्ध संबधी शकुन का भी काम लिया जाता था पक्षियों को स्वतंत्रता, नवीन विचारों, आनंद, तनाव, मुक्ति, प्रषंसा, यष, धन्यवाद देने, प्रजनन श

परिवर्तन योग से करें भविष्यवाणी

भारतीय ज्योतिशशास्त्र में भविष्यकथन के सैकड़ों सूत्रो का वर्णन है। इन्ही सूत्रों मे से एक है परिवर्तन योग जिसका वर्णन पाराशरीय और नाड़ी ग्रन्थों दोंनों मे पाया जाता है। हाँलाकि दोनो प्रकार के ग्रन्थों में इन सूत्रों को विभिन्न तरीको से प्रयोग किया गया है ज्योतिष मे परिवर्तन योग के तीन रूप पाये जाते हैं। 1. भाव परिवर्तन 2. राशि परिवर्तन 3. नक्षत्र परिवर्तन  भाव परिवर्तन पाराशरीय व कुछ नाड़ी ग्रन्थों जैसे षुक्र नाड़ी मे इसके सूत्रो का वर्णन पाया जाता है। जो भावा के स्वामियो के बीच स्थान परिवर्तन से बनता है। जैसे चतुर्थेश षष्ठ भाव मे जाय और षष्ठेश चतुर्थ भाव मे जाय। इसके भी तीन भेद हैं। 1. दो शुभ भावों के स्वामियों का परस्पर परिवर्तन जैसे लग्न व पंचम भाव का परिवर्तन या दो केन्द्रेशों का परिवर्तन या केन्द्र और त्रिकोण भाव मे परस्पर परिवर्तन। 2. दो त्रिकेशांे का परिवर्तन जो विपरीत राजयोग बनाता है। 3. किसी केन्द्रेश या त्रिकोणेश का त्रिकेश से परिवर्तन। जैसे दशमेश का द्वादेश से परिवर्तन या पंचमेश या द्वादेश के बीच परिवर्तन। 2. ग्रह या राशि परिवर्तन  इसका वर्णन स्व. आर. जी. राव द्वारा अनुवादित और

जेल जाने के योग

ज्योतिष शास्त्र अनुसार कुंडली के आठवें मतांतर से बारहवें भाव से कारावास तथा सजा का विचार किया जाता है। कुंडली के इस घर में राहु अगर अष्टमेश के साथ हो तो उसके अशुभ प्रभाव के कारण व्यक्ति को किसी बड़े अपराध के कारण जेल जाना पड़ता है। शनि  मंगल और राहू मुख्य रूप से यह तीन ग्रह एवम् इनका आपसी सम्बन्ध जेल के कारक है। शनि व 12 भाव सजा का कारक है। छठा भाव व मंगल राहू अपराध के कारक है। अगर किसी व्यक्ति की कुण्डली में मंगल और राहु एक साथ किसी भाव में बैठकर युति करते हैं तो जेल योग बनता है केतु रस्सी बेड़ी हथकड़ी का कारक ग्रह हैं अशुभ मंगल व राहु के बीच दृष्टि संबंध बनता हो तो अंगारक योग की वजह से ऐसा इंसान हिंसक स्वभाव वाला हो जाता है और अपराध करता है जिससे जेल जाना पड जाता है। शनि मंगल व राहु मुख्य रूप से जेल यात्रा कराने का भी योग बनाते हैं और इनकी युति या आपस में दृष्टि इस तरह की स्थितियां बना देती है कि आखिर इंसान को जेल जाना ही पड जाता है। जन्मकुंडली में सूर्यादि ग्रह समान संख्या में लग्न एवं द्वादश तृतीय एवं एकादश, चतुर्थ, दशम, षष्ठ एवं अष्टम भाव में स्थित हो तो यह बंधन योग बनाता है यह स्थिति