सीधे मुख्य सामग्री पर जाएं

सांस्कृतिक एवं शैक्षिक समारोह बच्चों के सर्वांगीण विकास हेतु बेहद महत्वपूर्ण


सिटी मोन्टेसरी स्कूल, अलीगंज (प्रथम कैम्पस), लखनऊ द्वारा 'एनुअल डे समारोह' का भव्य आयोजन आज सी.एम.एस. गोमती नगर (द्वितीय कैम्पस) आॅडिटोरियम में सम्पन्न हुआ। मुख्य अतिथि मुकेश मेश्राम, कमिश्नर, लखनऊ मंडल ने दीप प्रज्वलित कर समारोह का विधिवत् उद्घाटन किया। इस अवसर पर अभिभावकों को संबोधित करते हुए मुख्य अतिथि श्री मुकेश मेश्राम, आई.ए.एस., ने कहा कि इस तरह के सांस्कृतिक एवं शैक्षिक समारोह बच्चों के सर्वांगीण विकास हेतु बेहद महत्वपूर्ण हैं। यह समारोह सिर्फ बच्चों के लिए ही नहीं अपितु बड़ों के लिए भी प्रेरणादायी है, जिससे हम सभी एक स्वस्थ, समृद्ध व खुशहाल विश्व समाज के नव-निर्माण में योगदान दे सकें।
 इससे पहले, वार्षिक समारोह में सी.एम.एस. छात्रों ने अपनी भावपूर्ण प्रस्तुतियों से अभिभावकों को गद्गद् कर दिया। समारोह का शुभारम्भ विश्व शान्ति एवं ईश्वरीय एकता का सन्देश देती 'सर्व-धर्म एवं विश्व शान्ति प्रार्थना' से हुआ, जिसके माध्यम से विद्यालय के छात्रों ने सभी के हृदयों को प्रभु प्रेम से सराबोर कर दिया। इस भव्य समारोह में रंग-बिरंगी पोशाकों में हँसते-गाते नन्हें-मुन्हें बच्चों ने जीवन का उल्लास बिखरते हुए एक से बढ़कर एक शानदार शैक्षिक एवं सांस्कृतिक कार्यक्रमों के माध्यम से अनेकता में एकता, सहयोग, सहकार एवं सामूहिकता का अभूतपूर्व एवं विराट दृश्य प्रस्तुत कर उपस्थित दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया एवं तालियों की गड़गड़ाहट से सम्पूर्ण आॅडिटोरियम गूँज उठा। जहाँ एक ओर भावपूर्ण नृत्य प्रस्तुतियों ने अभिभावकों को गद्गद् कर दिया तो वहीं दूसरी ओर 'वल्र्ड पार्लियामेन्ट' के शानदार प्रस्तुतिकरण ने सभी का ध्यान आकर्षित किया।
 सी.एम.एस. संस्थापक व प्रख्यात शिक्षाविद् डा. जगदीश गाँधी ने इस अवसर पर कहा कि विश्व शान्ति, विश्व एकता एवं वसुधैव कुटुम्बकम् के विचारों को बचपन से ही प्रत्येक बालक को देने की आवश्यकता है। अतः सी.एम.एस. द्वारा ऐसे प्रयास किये जा रहे हंै जिससे कि प्रत्येक बालक को घर व विद्यालय दोनों जगह विश्व एकता एवं विश्व शान्ति के विचार मिल सके। उन्होंने अभिभावकों का आह्वान किया कि भावी पीढ़ी के चारित्रिक, नैतिक व आध्यात्मिक उत्थान के लिए संकल्पबद्ध हों। 
 सी.एम.एस. अलीगंज (प्रथम कैम्पस) की वरिष्ठ प्रधानाचार्या श्रीमती ज्योति कश्यप ने गणमान्य अतिथियों सहित उपस्थित अभिभावकों का हार्दिक स्वागत करते हुए कहा कि बच्चों को अच्छा संसार देने की शुरूआत अपने घर-परिवार से करनी चाहिए, क्योंकि एकता व शान्ति के वातावरण में बच्चों का संतुलित विकास बहुत तेजी से होता है। सी.एम.एस. अलीगंज (प्रथम कैम्पस) की प्रधानाचार्या श्रीमती शिवानी सिंह ने अभिभावकों के प्रति हार्दिक आभार व्यक्त करते हुए कहा कि प्रत्येक बालक को अच्छा और स्मार्ट बनाने का विद्यालय का लक्ष्य अभिभावकों के सहयोग से ही पूरा हो सकता है।



इस ब्लॉग से लोकप्रिय पोस्ट

पक्षी आपका भाग्य बदले

मनुष्य का जीवन अपने आसपास के वातावरण से ही प्रभावित होता है। व्यक्ति के आस-पास के पशु पक्षी उसके जीवन का अभिन्न अंग है। भारतीय ऋर्षियों तथा संसार के अध्यात्मवादियो ने संसार के पक्षियों को ना केवल ज्योतिष तथा मनुष्य के भाग्य से जोड़ा है। बल्कि पक्षियों को उपयोग शकुन ज्योतिष, फलित तथा प्रष्न ज्योतिष तथा अनेकों ज्योतिष, तांत्रिक उपचारों और शारीरिक मानसिक रोगों के निवारण में किया है। भारत मे पंच प़क्षी शास्त्र, कल्ली पुराण पर आधारित तोते द्वारा भविष्यवाणी, पक्षी तंत्र तथा शकुन ज्योतिष का प्रयोग आदिकाल से ही किया जाता है भारत मे गरूड़ जी, नीलकंठ, काकभुषुंडी,, हंस, जटायु व संपाती, शुकदेव जी आदि दिव्य पक्षियों तथा अनेक देवी देवताआंे वाहन के रूप मे पक्षियों को प्रयोग किये जाने का  वर्णन है। जैसे भगवान विष्णु का गरूड़, कार्तकेय जी का मयूर, माता लक्षमी का उल्लू, विश्वकर्मा, वरूण जी तथा स्वरसती जी का हंस आदि शनिदेव का कौआ आदि का प्राचीन काल मे पक्षियों द्वारा डाक सेवा युद्ध संबधी शकुन का भी काम लिया जाता था पक्षियों को स्वतंत्रता, नवीन विचारों, आनंद, तनाव, मुक्ति, प्रषंसा, यष, धन्यवाद देने, प्रजनन श

परिवर्तन योग से करें भविष्यवाणी

भारतीय ज्योतिशशास्त्र में भविष्यकथन के सैकड़ों सूत्रो का वर्णन है। इन्ही सूत्रों मे से एक है परिवर्तन योग जिसका वर्णन पाराशरीय और नाड़ी ग्रन्थों दोंनों मे पाया जाता है। हाँलाकि दोनो प्रकार के ग्रन्थों में इन सूत्रों को विभिन्न तरीको से प्रयोग किया गया है ज्योतिष मे परिवर्तन योग के तीन रूप पाये जाते हैं। 1. भाव परिवर्तन 2. राशि परिवर्तन 3. नक्षत्र परिवर्तन  भाव परिवर्तन पाराशरीय व कुछ नाड़ी ग्रन्थों जैसे षुक्र नाड़ी मे इसके सूत्रो का वर्णन पाया जाता है। जो भावा के स्वामियो के बीच स्थान परिवर्तन से बनता है। जैसे चतुर्थेश षष्ठ भाव मे जाय और षष्ठेश चतुर्थ भाव मे जाय। इसके भी तीन भेद हैं। 1. दो शुभ भावों के स्वामियों का परस्पर परिवर्तन जैसे लग्न व पंचम भाव का परिवर्तन या दो केन्द्रेशों का परिवर्तन या केन्द्र और त्रिकोण भाव मे परस्पर परिवर्तन। 2. दो त्रिकेशांे का परिवर्तन जो विपरीत राजयोग बनाता है। 3. किसी केन्द्रेश या त्रिकोणेश का त्रिकेश से परिवर्तन। जैसे दशमेश का द्वादेश से परिवर्तन या पंचमेश या द्वादेश के बीच परिवर्तन। 2. ग्रह या राशि परिवर्तन  इसका वर्णन स्व. आर. जी. राव द्वारा अनुवादित और

जेल जाने के योग

ज्योतिष शास्त्र अनुसार कुंडली के आठवें मतांतर से बारहवें भाव से कारावास तथा सजा का विचार किया जाता है। कुंडली के इस घर में राहु अगर अष्टमेश के साथ हो तो उसके अशुभ प्रभाव के कारण व्यक्ति को किसी बड़े अपराध के कारण जेल जाना पड़ता है। शनि  मंगल और राहू मुख्य रूप से यह तीन ग्रह एवम् इनका आपसी सम्बन्ध जेल के कारक है। शनि व 12 भाव सजा का कारक है। छठा भाव व मंगल राहू अपराध के कारक है। अगर किसी व्यक्ति की कुण्डली में मंगल और राहु एक साथ किसी भाव में बैठकर युति करते हैं तो जेल योग बनता है केतु रस्सी बेड़ी हथकड़ी का कारक ग्रह हैं अशुभ मंगल व राहु के बीच दृष्टि संबंध बनता हो तो अंगारक योग की वजह से ऐसा इंसान हिंसक स्वभाव वाला हो जाता है और अपराध करता है जिससे जेल जाना पड जाता है। शनि मंगल व राहु मुख्य रूप से जेल यात्रा कराने का भी योग बनाते हैं और इनकी युति या आपस में दृष्टि इस तरह की स्थितियां बना देती है कि आखिर इंसान को जेल जाना ही पड जाता है। जन्मकुंडली में सूर्यादि ग्रह समान संख्या में लग्न एवं द्वादश तृतीय एवं एकादश, चतुर्थ, दशम, षष्ठ एवं अष्टम भाव में स्थित हो तो यह बंधन योग बनाता है यह स्थिति