सेक्स बिफोर मैरिज

संसार में सेक्स बिफोर मैरिज की समस्या कोई आज की नही है, यह एक आदिम प्रवृत्ति है। जो सारे संसार के देषों मे पाया जाती है। पुराणों, महाभारत आदि गन्थों मे भी इस तरह के प्रसंग पाये सेक्स बिफोर मैरिज जाते हैं। कभी ऐसे संबध विवाहोपरान्त भारी समस्या पैदा कर देते है। ऐसे संबध स्त्री-पुरूष को उनके जीवन के लक्ष्य से भटका देते है। इस लेख का उदद्ेष्य उन माता-पिता को सचेत करना है। जिनके बच्चों की कुण्डली मे ऐसे ग्रह योग हो उन्हें अपने बच्चों की कम उम्र मे शादी करके या उनकी विशेष देखभाल करके बच्चों को बचाने का प्रयास करना चाहिये ताकि बच्चों का भविष्य नष्ट होने से बचाया जाय। चन्द्रमा विवाह पूर्व सेक्स का मुख्य ग्रह है कुछ ग्रह योग निम्न है।
1. यदि स्त्री जमांक मे मंगल काफी बलवान हो तो जातिका विवाह पूर्व यौन संबध स्थापित करे। यदि मंगल के साथ चन्द्रमा भी पापग्रस्त हो तो कन्या शीघ्र ही अन्य के बहकाने मे आ जाती है।
2. शुक्र मंगल युति यदि 4, 5, 7, या 12 वें भाव मे हो तो जातक या जातिका विवाह पूर्व यौन संबध स्थापित करे।
3. यदि चन्द्रमा या मंगल पर या सप्तम भाव या सप्तमेश पर पाप ग्रह की युति या दृष्टि हो तो जातक या जातिका विवाह पूर्व यौन संबध स्थापित करे।
4. यदि मंगल की राहू से युति या दृष्टि संबध हो तो जातक या जातिका विवाह पूर्व यौन संबध स्थापित करे।
5. यदि चतुर्थ भाव मे पाप ग्रह हों और लग्न, चन्द्र, शुक्र, शनि या मंगल के नवांश मे जायें।
6. चन्द्रमा यदि शुक्र की राशि मे हो तथा शनि या मंगल के नवंाश मे हो तो उपरोक्त फल हों।
7. चन्द्रमा यदि शनि की राशि मकर या कुंभ मे हो तथा बुध के नवंाश मे हो तो उपरोक्त फल हों।
8. चन्द्र राहु की युति 12 वें भाव हो और उन पर किसी शुभ ग्रह की दृष्टि पा हो।
9. चतुर्थेश अष्ष्ठम मे, सप्तमेश लग्न या अष्ष्ठम मे या द्वादेश चतुर्थेष या सप्तम भाव मे जाये तो जातिका विवाह पूर्व यौन संबध स्थापित करे।
10. बुघ या लग्नगत राशि या चन्द्रमा नवांश चक्र मे 5 वें भाव मे हो तो जातिका विवाह पूर्व यौन संबध स्थापित करे।
11. यदि लग्न या चन्द्र लग्न से 7 वें भाव मे शनि हो और शुक्र लग्न या चन्द्र लग्न से 12 वें भाव मे हो तो उपरोक्त फल हों।
12. सप्तमेश राहू या केतु के साथ द्वितीय भाव मे हो। तो उपरोक्त फल हों।