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तीर्थान घाटी प्रकृति प्रेमी के लिए स्वर्ग समान है


आप हिमाचल प्रदेश में पर्यटन के नाम पर शिमला या फिर कुल्लू-मनाली, जैसे हिमाचल के लोकप्रिय हॉलिडे डेस्टिनेशन से गायें हैं तो घबराइए नहीं, हमारे पास आपके लिए एक बेहतरीन विकल्प है. बीते कुछ सालों में ये जगहें पर्यटकों की भीड़ से एकदम पट चुके शहरों से आगे हिमाचल में कुछ ऐसी जगह भी हैं जहाँ  आप वैसे छुट्टियां मन सकते हैं जिसकी आपको दरकार होती है। ये ऐसी जगह की तलाश का नतीजा हैं, जहां शांति भी हो, और खूबसूरत नजारों के बीच छुट्टियां भी अच्छे से बीत सकें। ऐसे में हम आपको बताना चाहेंगे धरती पे स्वर्ग जैसी सुन्दर तीर्थन घाटी के बारे में। कसोल से करीबन 75 किमी की दूरी पर स्थित इस घाटी के आसपास कई खूबसूरत गांव भी हैं जहां आप प्राकृतिक छटाओं का मजा ले सकते हैं। सालभर इस घाटी का मौसम बेहद सुहावना रहता है। विभिन्न एडवेंचर करने के विकल्प यहाँ मौजूद हैं। इस शांत जगह को देखने के लिए हर तरह के पर्यटक आते हैं। तो क्यों ना इन छुट्टियों में मनाली की जगह इस प्राकृतिक सौन्दर्य और शांतिप्रिय स्थल की सैर की जाये, क्यूंकि इसके बारे में और जानने के बाद आप आप तीर्थान घाटी को जीवन में एकबार अवश्य घूमना चाहेंगे। 
तीर्थान घाटी प्रकृति प्रेमियों के लिए किसी स्वर्ग से कम नहीं है। खूबसूरत हरे जंगलों में फूलों और पहाड़ों के बीच यह जगह विभिन्न तरह के ट्रेकिंग ट्रेल्स का प्रवेश द्वार भी है। पर्यटक यहां ट्रेकिंग अपनी क्षमता और कठिनाई के स्तर के आधार पर, आधा दिन या फिर एक पूरे दिन में कर सकते हैं, इसके साथ ही यहां कैम्पिंग भी की जा सकती है। इसके अलावा पर्यटक तीर्थान नदी में ट्राउट फिशिंग जैसे बेहतरीन और मनोरंजक गतिविधियों के साधन भी मौजूद हैं. 
इस पार्क की वनस्पति में चंदवा वन, ओक जंगल, अल्पाइन झाड़ियाँ, उप अल्पाइन समुदायों, और अल्पाइन घास शामिल हैं। बैरबैरिस,इंडिगोफेरा, सारकोकोआ और वाईबर्नम क्षेत्र में देखी जाने वाली वनस्पति की अन्य प्रजातियां हैं। पार्क कई फूलों की प्रजातियों के लिए भी घर है जिनका सुगंधित और औषधीय गुणों के लिए उपयोग किया जा सकता है।
तीर्थन घाटी  का मौसम पूरे साल खुशनुमा बना रहता है। इस पूरे क्षेत्र में वनस्पतियां फैली हुई हैं और तेज हवांए चलती हैं। साथ ही पूरी घाटी फूलों की खुशबू से महकती है। सर्दियों के मौसम में पर्यटक यहां बर्फबारी का भी मजा ले सकते हैं। हालांकि अधिक सर्दी में यहाँ पर जनजीवन काफी मुश्किल हो जाता है और हमारी सलाह है की सर्दियों में यहाँ तभी जाएं यदि आप कुछ कठिनाई झेलने के लिए तैयार हो. यहाँ सैर का सही समय मार्च से लेकर अक्टूबर तक होता है। 


 


 


 


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