विशाल भंडारा का आयोजन


चंद्रमा ऋषि जो सती अनुसुइया के सबसे बड़े पुत्र थे जिनको ब्रह्मा के अंश माना जाता है जिनके दो अनुज ऋषि दत्तात्रेय जिनको भगवान विष्णु का अंश और ऋषि दुर्वासा को भगवान शिव का अंश मानते है। आजमगढ़ शहर से 15 किलोमीटर दूर है यह पौराणिक स्थल है। इस जनपद में बहुत से आश्रम थे इसीलिए इस जनपद की पहचान आश्रम की बहुलता के कारण आश्रमगढ़ के रूप में भी रही है। चंद्रमा ऋषि के मूर्ति की स्थापना आज के ही दिन हुई थी इस उपलक्ष्य में एक विशाल भंडारा का आयोजन किया गया जो प्रत्येक वर्ष होता है । इस आश्रम के महंत बाल ब्रह्मचारी महंत बम बम जी महाराज ने बताया कि यह स्थान बहुत ही ऊर्जावान है और परेशानी से घिरे लोग जब यहां आते है तो उनको बहुत शांति मिलती है। यह एक शक्ति पीठ है। चंद्रमा ऋषि के तपस्या के कारण यह स्थान की महिमा बहुत ज्यादा है। यह तपोस्थली मंजूषा और तमसा नदी के संगम पर स्थित है।
यह स्थल पौराणिक दृष्टि से बहुत महत्वपूर्ण है इसलिए यहां बहुत से लोग नियमित आते रहते है। नियमित रूप से आने वाले श्रद्धालु राजन उपाध्याय जी ने बताया कि वो पिछले कई वर्षों से आते है और उनको यहां बहुत ही शांति व सकून मिलता है।