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आधुनिक भारत में मानवतावादी, करुणामय सिद्धान्त आज ज्यादा प्रासांगिक हैं

समाज के उपेक्षित, कमजोर वर्ग, शोषित, निर्बल वर्ग व महिलाओं को उन्नति, उन्नयन करने तथा देशसेवा के लिए निरन्तर कार्य करना चाहिए। साथ ही हमे अच्छे नागरिक के कर्तव्यो का पालन करना चाहिए। आधुनिक भारत में मानवतावादी, करुणामय सिद्धान्त आज ज्यादा प्रासांगिक हैं। मानवता और देश की सेवा देश उन महापुरूषों के लिए सच्ची श्रद्धांजलि है जिन्होंने देश व समाज को आगे बढ़ाने में अपना निरन्तर योगदान दिया परिणाम स्वरूप राष्ट्रीय एकता अखण्डता भाईचारे को अधिक मजबूत बना है जिससे हमे और आगे बढ़ाना होगा। हमे अपने केवल पड़ोसी के साथ ही अच्छा व्यवहार नहीं करना बल्कि सम्पूर्ण क्षेत्र, प्रदेश, देश, विश्व के मानवमात्र से सदव्यवहार करना चाहिए अगर हम किसी का नुकसान करने के लिए गरम कोयला हाथ में पकड़ते है तो हमारा अपना ही हाथ सबसे पहले जलता है। यह उदगार विचार जनपद में विगत दिनों संत निरंकारी मण्डल द्वारा आयोजित निरंकारी संत सामागम में सद्गुरू माता सुदीक्षा द्वारा हजारों श्रद्धालुओं जो कि अनुशासन की तरह गोराबाजार स्थित बिजली मैदान में जमा थे के सम्मुख व्यक्त किये। प्रदेश सरकार के विकास एवं सुशासन सबका साथ सबका विकास सबका विश्वास पुस्तक सद्गुरू माता सुदीक्षा जी को सहायक निदेशक सूचना प्रमोद कुमार ने देते हुए कहा कि देश व प्रदेश के साथ ही जनपद में अनेक निर्माण एवं विकास के कार्य पूर्ण किये जा चुके है पुस्तक में लेखा जोखा प्रकाशित किया गया है साथ ही प्रदेश सरकार की महत्वपूर्ण पुस्तक है। 
 पुस्तक में प्रकाशित महत्वपूर्ण जानकारियों को जन-जन में पहुचाकर आम जन को लाभान्वित करें। पुस्तक में प्रदेश सरकार के साथ ही भारत सरकार की उपलब्धियों को भी विस्तार से बताया गया है। समाज के सभी वर्गो को समाजिक न्याय सुनिश्चित कराना, बाल अधिकारों का संरक्षण पाक्सों अधिनियम में संशोधन, किसानों की आमदनी दो गुनी करने के ठोस कदम, सभी का सशक्तिकरण, प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना, योग दिवस एवं फिट इण्डिया अभियान, सड़क सुरक्षाः सुगम परिवहन, देश में नम्बर वन, राजस्व खेत की मेड़ों तक की टेक्नालाजी, प्रदेश कैबिनेट द्वारा जनहित मेें लिए गये महत्वपूर्ण निर्णय, मा0 मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के ट्विटर के चुर्नीदा ट्विस आदि महत्वपूर्ण जानकारियों के साथ ही विकास पूर्ण चित्रों का समावेश भी है। सद्गुरू माता सुदीक्षा ने सरकार द्वारा प्रकाशित विकास एवं सुशासन की पुस्तक, मोक्ष की अभिलाष प्रयागराज कुम्भ व उत्तर प्रदेश संदेश प्राप्त कर आभार प्रकट किया तथा कहा कि यू0पी0 नही देखा तो इण्डिया नही देखा, नये प्रयास नई पहचान पुस्तक में पूरा समावेश है। सद्गुरू माता सुदीक्षा ने कहा कि आज कल हृदय रोग व मधुमेह रोगों से लोग पीडित है इन बिमारियों से हम संतसमागम के माध्यम से बचाओं के तरीको से नियंत्रण कर सकते है। इन बीमारियांे को टेशन व जीवन शैली पर थोड़ा ध्यान देकर नियत्रण किया जा सकता है। बीमारियों के चिकित्सक की बात व संतसमागम में बताये गये अनुशासन, योग आदि को फालो करना व परहेज कराना होगा। शरीर का सौदर्य स्वास्थ पर निर्भर करता है स्वस्थ सुन्दर कार्य कुशल दिखने के लिए खान पान की स्वास्थ्यकर आदतों पर ध्यान दें तभी ऊर्जावान रहकर सभी कार्यो को बखूबी अंजाम दे सकते है। सकारात्मक, रचनात्मक सोच के रूप कार्य करे खुश रहे मस्त रहे तनाव मुक्त की ओर बढ़े स्वस्थ रहे पर भी समागम में विस्तार से चर्चा की गई और कहा कि स्वास्थ्य के नियमों को अपना कर स्वस्थ जीने की कला को जाने।



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पक्षी आपका भाग्य बदले

मनुष्य का जीवन अपने आसपास के वातावरण से ही प्रभावित होता है। व्यक्ति के आस-पास के पशु पक्षी उसके जीवन का अभिन्न अंग है। भारतीय ऋर्षियों तथा संसार के अध्यात्मवादियो ने संसार के पक्षियों को ना केवल ज्योतिष तथा मनुष्य के भाग्य से जोड़ा है। बल्कि पक्षियों को उपयोग शकुन ज्योतिष, फलित तथा प्रष्न ज्योतिष तथा अनेकों ज्योतिष, तांत्रिक उपचारों और शारीरिक मानसिक रोगों के निवारण में किया है। भारत मे पंच प़क्षी शास्त्र, कल्ली पुराण पर आधारित तोते द्वारा भविष्यवाणी, पक्षी तंत्र तथा शकुन ज्योतिष का प्रयोग आदिकाल से ही किया जाता है भारत मे गरूड़ जी, नीलकंठ, काकभुषुंडी,, हंस, जटायु व संपाती, शुकदेव जी आदि दिव्य पक्षियों तथा अनेक देवी देवताआंे वाहन के रूप मे पक्षियों को प्रयोग किये जाने का  वर्णन है। जैसे भगवान विष्णु का गरूड़, कार्तकेय जी का मयूर, माता लक्षमी का उल्लू, विश्वकर्मा, वरूण जी तथा स्वरसती जी का हंस आदि शनिदेव का कौआ आदि का प्राचीन काल मे पक्षियों द्वारा डाक सेवा युद्ध संबधी शकुन का भी काम लिया जाता था पक्षियों को स्वतंत्रता, नवीन विचारों, आनंद, तनाव, मुक्ति, प्रषंसा, यष, धन्यवाद देने, प्रजनन श

परिवर्तन योग से करें भविष्यवाणी

भारतीय ज्योतिशशास्त्र में भविष्यकथन के सैकड़ों सूत्रो का वर्णन है। इन्ही सूत्रों मे से एक है परिवर्तन योग जिसका वर्णन पाराशरीय और नाड़ी ग्रन्थों दोंनों मे पाया जाता है। हाँलाकि दोनो प्रकार के ग्रन्थों में इन सूत्रों को विभिन्न तरीको से प्रयोग किया गया है ज्योतिष मे परिवर्तन योग के तीन रूप पाये जाते हैं। 1. भाव परिवर्तन 2. राशि परिवर्तन 3. नक्षत्र परिवर्तन  भाव परिवर्तन पाराशरीय व कुछ नाड़ी ग्रन्थों जैसे षुक्र नाड़ी मे इसके सूत्रो का वर्णन पाया जाता है। जो भावा के स्वामियो के बीच स्थान परिवर्तन से बनता है। जैसे चतुर्थेश षष्ठ भाव मे जाय और षष्ठेश चतुर्थ भाव मे जाय। इसके भी तीन भेद हैं। 1. दो शुभ भावों के स्वामियों का परस्पर परिवर्तन जैसे लग्न व पंचम भाव का परिवर्तन या दो केन्द्रेशों का परिवर्तन या केन्द्र और त्रिकोण भाव मे परस्पर परिवर्तन। 2. दो त्रिकेशांे का परिवर्तन जो विपरीत राजयोग बनाता है। 3. किसी केन्द्रेश या त्रिकोणेश का त्रिकेश से परिवर्तन। जैसे दशमेश का द्वादेश से परिवर्तन या पंचमेश या द्वादेश के बीच परिवर्तन। 2. ग्रह या राशि परिवर्तन  इसका वर्णन स्व. आर. जी. राव द्वारा अनुवादित और

जेल जाने के योग

ज्योतिष शास्त्र अनुसार कुंडली के आठवें मतांतर से बारहवें भाव से कारावास तथा सजा का विचार किया जाता है। कुंडली के इस घर में राहु अगर अष्टमेश के साथ हो तो उसके अशुभ प्रभाव के कारण व्यक्ति को किसी बड़े अपराध के कारण जेल जाना पड़ता है। शनि  मंगल और राहू मुख्य रूप से यह तीन ग्रह एवम् इनका आपसी सम्बन्ध जेल के कारक है। शनि व 12 भाव सजा का कारक है। छठा भाव व मंगल राहू अपराध के कारक है। अगर किसी व्यक्ति की कुण्डली में मंगल और राहु एक साथ किसी भाव में बैठकर युति करते हैं तो जेल योग बनता है केतु रस्सी बेड़ी हथकड़ी का कारक ग्रह हैं अशुभ मंगल व राहु के बीच दृष्टि संबंध बनता हो तो अंगारक योग की वजह से ऐसा इंसान हिंसक स्वभाव वाला हो जाता है और अपराध करता है जिससे जेल जाना पड जाता है। शनि मंगल व राहु मुख्य रूप से जेल यात्रा कराने का भी योग बनाते हैं और इनकी युति या आपस में दृष्टि इस तरह की स्थितियां बना देती है कि आखिर इंसान को जेल जाना ही पड जाता है। जन्मकुंडली में सूर्यादि ग्रह समान संख्या में लग्न एवं द्वादश तृतीय एवं एकादश, चतुर्थ, दशम, षष्ठ एवं अष्टम भाव में स्थित हो तो यह बंधन योग बनाता है यह स्थिति