हस्तरेखा और शनि

हस्तरेखा शास्त्र मे शनि का महत्वपूर्ण स्थान है, हस्तरेखा मे मध्यमा उंगली की जड़ के नीचे हथेली मे शनि का पर्वत होता है। जो जीवन कई महत्वपूर्ण घटनाओं की भविष्यवाणी करता है। हथेली मे मणिबंध की रेखाओं से शनि पर्वत की ओर जाने वाली खड़ी रेखा शनि रेखा या भाग्य रेखा होती है। मध्यमा उंगली शनि की उंगली होती है। टेढी मध्यमा लीवर के रोग व गैस के रोग को बताती है तथा जीवन मे भारी संघर्ष और जाॅब मे उतार चढाव देती है।
शनि पर्वत के फलादेश:ः- अति विकसित शनि पर्वत वैवाहिक विलंब, विवाहोपरान्त वैवाहिक जीवन मे लंबे समय तक रोग, पति-पत्नी मे कलह य अन्य कोई बड़ा दुःख आता है यदि गुरू पर्वत भी सुविकिसित गुरू पर्वत शनि के इस दोष को समाप्त कर देता है। और डिप्रेशन का रोगी बनाता है। धंसा हुआ शनि पर्वत बताता है कि जातक के जमांक मे शनि किसी अंय शत्रु ग्रह के साथ युत होता है। जैसे सूर्य, केतु, मंगल, जिसके कारण जाब मे बाधा आती है। शनि पर्वत पर काला तिल दांत मे रोग, कर्ज, आग से खतरा देता है शनि पर्वत पर वर्गाकृति जातक को घातक दुर्घटना व आपरेशन से पूरी सुरक्षा करता है। शनि पर आड़ी रेखायें की संख्या जातक के उतने ही प्रमोशन तथा उन्नतियों को बताता है। तथा शनि पर्वत पर जितनी खड़ी रेखायें हो जातक के जीवन मे उतनी ही संख्या मे बड़ी बाधायें आती है। शनि पर्वत के नीचे हृदय रेखा पर द्वीप रीढ की हडडी के रोग देता है, शनि पर आकर यदि हृदय रेखा रूक जाय तो जातक के का अपने जीवन साथी के प्रति प्रेम अति स्वार्थपूर्ण व कपटपूर्ण होता है। जिसके कारण वैवाहिक जीवन मे तलाक या अंय कोई घातक घटना घटती है। शनि पर्वत से यदि कोई रेखा जीवन रेखा को काटती हुयी निम्न मंगल पर्वत पर जाये तो जातक के जीवन मे घातक दुर्घटना घटती है। शनि पर्वत पर वलय या रिंग की आकृति जीवन मे भारी दुर्भाग्य व संधर्ष देती है
भाग्य रेखा के फलादेश:- चन्द्रमा या शुक्र पर्वत से भाग्य रेखा निकल कर यदि षनि पर्वत पर जाय तो जातक कृषि, व्यापार या प्राईवेट नौकरी करता है। यदि भाग्य रेखा निम्न या उच्च मंगल या हथेली के मध्य के धंसे राहू के क्षेत्र से निकल कर शनि पर्वत पर जाय तो जातक नौकरी करेगा बिजनेस नहीं केतु क्षेत्र या मणिबंध के पास से निकली भाग्य रेखा भी नौकरी देती है। मस्तक रेखा व हृदय के रेखा के मध्य से क्षेत्र से निकली भाग्य रेखा भी नौकरी देती है। मस्तक रेखा से निकली भाग्य रेखा जातक को बौद्धिक जाब या मानसिक कार्य जैसे शिक्षक, वकील, डाक्टर, पत्रकार आदि का जाब देती है। लहराती भाग्य रेखा जीवन मे अति मंद गति से उन्नति देती है। यदि भाग्य रेखा ना हो जातक को जीवन मे समाज परिवार से कोई मदद नही है। वह अपनी मेहनत व संघर्ष से अपनी किस्मत खुद बनाता है। भाग्य रेखा यदि अचानक टूट जाये तो उस उम्र के बाद जातक का जीवन तुच्छ व व्यर्थ भटकने वाला हो जाता है यदि टूटी भाग्य रेखा के समीप कोई दूसरी भाग्य रेखा शनि पर्वत पर जा रही हो तो जातक के जाब मे परिवर्तन होता है। वह एक जाब छोड़कर दूसरा जाब करता है। यदि भाग्य रेखा पर द्वीप हो तो नौकरी या व्यापार छूट जाता है। जातक पर कोई मुकदमा या आरोप लगता है शुक्र से निकली भाग्य रेखा जाब करने वाली पत्नी देती है। दो भाग्य रेखायें भी जाब करने वाली पत्नी देती है। और जातक को कई स्त्रोंतों से आय होती है। भाग्य रेखा पर तिल रोग के कारण नौकरी या व्यापार मे हानि होेगी शुक्र या चन्द्रमा पर्वत से कोई रेखा निकल कर यदि शनि या भाग्य रेखा के समान्ती जाय तो जातक के लव एफयर्स हो यदि ऐसी रेखा भाग्य रेखा मे मिल जाय तो प्रेमी या प्रेमिका से विवाह हो जायेगा यदि शुक्र या निम्न मंगल से कोई आड़ी रेखा निकल कर जीवन रेखा व भाग्य रेखा को काट आगे निकल जाय तो जातक के जीवन उस उम्र मे प्रबल शत्रु पैदा होगा जो जीवन संकट, दुर्भाग्य व भारी हानि पहुँचायेगा भाग्य रेखा से कोई शाखा निकलकर किसी पर्वत पर जाये तो उस पर्वत के ग्रह की वस्तुओं से जातक को भारी लाभ होगा यदि किसी अंय पर्वत से निकल कर कोई रेखा भाग्य रेखा मे मिल तो भी उपरोक्त फल की प्राप्ति होगी फल प्राप्ति को समय भाग्य रेखा से निकलने  वाले या अंय रेखा के भाग्य रेखा मे मिलने वाले बिंदू से निर्धारित किया जायेगा