ज्योतिषीय विश्लेषण हिटलर में एक सच्चे प्रेमी व पति का दिल भी था

विश्व के महातम तानाशाह हिटलर का जंम 20 अप्रैल सन् 1889 को साय - 6.20 मिनट पर ब्रनाउन गांव, आस्ट्रिया में हुआ था। 
जमांक-तुला लग्न में 2. 36 अंष। तृतीय में धनु में गुरू 16 अंश पर, चन्द्र 14 अंश पर तथा केतु 22 अंश पर 7 वें भाव पर मेष का सूर्य 8 अंश, मंगल 24 अंश, बुध 30 अंश पर वक्री शुक्र 24 अंश नवम में मिथुन मे राहू कर्क मे शनि। नवांश लग्न तुला में केतु वृश्चिक में शुक्र व मंगल, मकर मे शनि मेष में राहू वृष में बुध मिथुन में सूर्य, सिंह में चन्द्र गुरू।
 लग्न पर अग्नि प्रधान व क्रोधीले व अहंकारी ग्रहों राहू, सूर्य व मंगल की दृष्टि तथा लग्नेश शुक्र पर गर्म ग्रहों सूर्य, मंगल की युति व केतु की दृष्टि ने उसे अति क्रोधी व अहंकारी व युद्ध में दुष्ट व बुद्धिवान बनाया लग्नेश पर घृणा कारक केतु की दृष्टि ने क्रोध को घृणा में बदल दिया उसके शासन मे 55 से 60 लाख यहूदी और विश्वयुद्ध में लगभग दो करोड़ नब्बे लाख सैनिक व नागरिक मारे गये लग्न से दशम भाव (राज्य स्थान) में कर्क के शनि व अरूधा लग्न में शनि ने उसे प्रबल राजयोग दिया नवम भाव में उच्च के राहू पर गुरू व चन्द्र दृष्टि ने उसे शक्तिषाली नकारात्मक शक्ति योग व गुरू चाडंाल योग दिया, षष्ठपद मिथुन मे उच्च के राहू ने हिटलर को भयानक युद्ध और अति शक्तिशाली शत्रु दिये शक्तिषाली शक्ति योग व गुरू चाडंाल योग ने युद्ध भयानक दिया और विश्व शांति (गुरू) का विनाश किया मंगल की राशि मेष में चार ग्रहों की युति आत्मकारक, व लग्नेश शुक्र (स्वयं व विचार) नवमेश बुध धर्म, उच्च के सूर्य राजनीति व रूचक योग के मंगल ने अति प्रबल राजयोग दिया युद्ध के देवता मंगल की राशि मे राजयोग बनने के कारण इन सभी राजयोगों का एक ही उद्देश्य था युद्ध। वक्री लग्नेष व आत्मकारक शुक्र की विशोंतरी दशा में जंम होने के कारण उसका बचपन अत्यन्त गरीबी व कठिनाइयों में बीता। लग्न से सप्तमेश मंगल पर पंचमेश शनि की दृष्टि व चन्द्र लग्न से पंचमेश व सप्तमेश की युति ने प्रेम विवाह दिया बुध से त्रिकोण में केतु ने भी प्रेम संबध दिया इस पर गुरू की दृष्टि व बुध शुक्र युति नें प्रेम संबध को विवाह में बदला सप्तम स्थान पर सूर्य व सप्तम स्थान पर षनि की दृष्टि ने अति विलंब से 56 वर्ष में विवाह दिया सामान्यतः सप्तम स्थान पर सूर्य शनि का संयुक्त संबध अविवाह योग देता है। सप्तम पर शनि की दृष्टि नेे काफी छोटी उम्र की पत्नी दी उनकी पत्नी ईवा ब्राउन उनसे 23 साल छोटी थी 1903 में पिता की मृत्यु 1905 में माता की मृत्यु उसे बहादुरी का पदक आयरन क्रास भी मिला। अरूधा लग्न से 12 वें भाव पर उच्च का राहू महान संत या शैतान का पुजारी बनाता है। विश्वास किया जाता है। कि हिटलर को अक्सर दिव्य वाणी सुनाई देती थी और जो उसे विशेष काम करने की प्रेरित करती थी तथा हिटलर ने हिमालय मे बसने वाली एक अत्यंत प्राचीन, गुप्त व रहस्यमय सभ्यता के लोगों से सम्पर्क कर रखा था, जिनसे वह प्राचीन रहस्यमय शक्तियां पाना चाहता था कई तिब्बती ग्रन्थ व लामा उसके सपंर्क में थे उसकी मृत्यु के बाद एक बंकर से भी कुछ लामाओं के शव मिले थे। वक्री अष्ठमेश शुक्र ने हिटलर को मघ्यायु दी केतु का राशीश गुरू कार्मिक ग्रह केतु से युत है। जो आत्महत्या या हत्या करवाता है। कीरो के अनुसार हिटलर का जंम मेष राशि के सायन सौरमास (22 मार्च-21 अप्रैल) में हुआ था इस मास में जंमे जातक की मृत्यु अग्नि, विस्फोट, हथियार, बम विस्फोट से होती है। हिटलर ने गोली मार कर पत्नी सहित आत्महत्या की। भृगुनाड़ी के अनुसार धनु में गुरू ने उसे हंसयोग दिया गजकेसरी योग ने उसका जंम स्थान से दूरस्थान पर भाग्योदय दिया तथा गजकेसरी योग के कारण प्रथम विश्वयुद्ध में हिटलर 50 बार मौत के मुंह से बचा गुरू केतु योग ने विजय योग दिया गुरू से त्रिकोण में सूर्य मंगल ने राजप्रताप दिया जाॅब कारक शनि के राशीश चन्द्र की राष्ट्रध्वज कारक केतु की युति व त्रिकोण में सूर्य ने उसे राजा बनाया। केतु गुरू की युति ने 56 वर्ष में आत्महत्या से मृत्यु दी भृगु सूत्रों कें अनुसार गुरू 56 वर्ष में वृश्चिक से निकल रहा था उसकी जिसका स्वामी वृश्चिक से छठी राशि मेष में है। जो मृत्यु दायक था गुरू प्रर्याय में भी 56 वर्ष मे गुरू कर्क से निकल रहा था जिसका स्वामी चन्द्र कर्क से छठे भाव में था। अतः 56 वां वर्ष मृत्युकारी था, तानाशाही व्यक्तित्व से अलग उसमें एक मानवतावादी, वात्सल्य से भरा पिता व वफादार प्रेम की मधुर भावनाओं से जुड़ा एक सच्चे प्रेमी व पति का दिल भी था उसका राष्ट्रप्रेम, देशभक्ति, देश की असाधारण उन्नति की भावना तथा चमत्कारी वैज्ञानिक व तकनीकी प्रगति सराहनीय थी, उसके शत्रु देश भी मानते थे कि जर्मन टेक्नोलाॅजी कमाल की थी हिटलर ने विश्व के दो महायुद्धों में सक्रिय भूमिका निभाई यद्यपि वह खुद साम्राज्यवादी था पर उसने स्वयं हारकर भी दुनिया के कई दर्जन देशों को ब्रिटिश साम्राज्य की गुलामी से मुक्ति दिला दी आजाद हिन्द फौज और स्वतंत्रता सेनानी नेताजी सुभाष चन्द्र बोस की मदद करके भारतीय स्वतंत्रता संग्राम में अमूल्य योगदान दिया है।