न्यूट्रीशियन का हमारे स्वस्थ्य जीवन स्वस्थ्य शरीर में क्या महत्व है

भोजन प्रचुर मात्रा में हमारे शरीर को मिलता रहे तो हमारा शरीर सदैव स्वस्थ्य और निरोगी बना रहता है। जब भी हमारे शरीर में न्यूट्रीशियन की कमी होती है तो हमारा शरीर असंतुलित होने लगता है अर्थात बीमारियों से ग्रसित हो जाता है।
न्यूट्रीशियन अर्थात पोषक तत्व:- जैसे, प्रोटीन, विटामिन, एमिनोएसीड, फाइबर, कैल्शियम, आयरन और कई अन्य तरह के तत्व मिलकर हमारे शरीर को पोषण देते हैं जिनको हम पोषक तत्व (न्यूट्रीशियन) के नाम से जानते हैं।
न्यूट्रीशियन ही हमारे शरीर को संतुलित यानि कि निरोगी बनाये रखता है।
न्यूट्रीशियन की कमी से हमारा शरीर कई प्रकार की बीमारियों से ग्रसित हो जाता है, इसका दुष्प्रभाव बहुत कम उम्र के बच्चों, नौजवानों और बुजुर्गो में देखने को मिल रहा है। जैसे, आँखों की समस्या, बाल पकना या झड़ना, पैरो और जोड़ों में दर्द, उम्र से पहले बुढापा या झुर्रियां पड़ना, मेमोरी लाॅस, ब्लडप्रेशर, हार्ट अटैक, पेट सम्बंधित समस्या, पाईल्स, शुगर, किडनी की समस्या, कैंसर, अस्थमा, गठिया, सरवाइकल, हीमोग्लोबिन, महिलाओं में कई प्रकार की आंतरिक समस्या व अन्य शरीरिक समस्याओं इत्यादि इनमें से कुछ बीमारियां महामारी का रूप लेती चली जा रही हैं।
न्यूट्रीशियन हमें कई तरह की दालों, हरी सब्जियों, फलों, अनाज, दूध और मांसाहारी चीजो को खाने से मिलता है। आज हम खाने में इन सभी चीजो का उपयोग तो कर रहे हे लेकिन उपयुक्त्त मात्रा में न्यूट्रीशियन हमारे शरीर को नहीं मिल पा रहा है। जिससे हमारा शरीर पूरी तरह से असंतुलित होता जा रहा। इसका प्रमुख कारण हमारी भाग दौड़ भरी जिंदगी, अशुद्ध खान पान और हमारे रहन सहन में परिवर्तन है। 
जिस गति से जनसंख्या बढ़ रही है उसी गति से हमारा उत्पादन भी बढ़ा है। लेकिन हमारी मिट्टी और उत्पादन दोनों ही पेस्टिसाइड और केमिकल पर लगभग पूर्णतः आधारित हो चुकी है, और ये केमिकल व पेस्टिसाइड को फास्ट फूड, फल, सब्जियों, दाल और अनाज इत्यादि के माध्यम से जिस गति से हम सेवन कर रहे हैं, इसका दुष्प्रभाव हमें बीमारियों के रूप में देखने को मिल रहा है और आनें वाले समय में चाह के भी हम इसके दुष्प्रभाव से नहीं बच पायेंगे। 
जिस गति से हमारे खान पान में पेस्टिसाइड और केमिकल बढ़ रहा है इसको देखते हुए ये तय हो चुका है की आने वाले विगत कुछ वर्षों में हर व्यक्ति के शरीर में न्यूट्रीशियन की बहुत ज्यादा कमी हो जाएगी, और लगभग सबके लिए स्वस्थ्य जीवन निरोगी काया एक चैलेंज बन जायेगा और मनुष्य के लिए 2022 तक स्वस्थ्य जीवन ब्यतीत करना इस पृथ्वी का सबसे बड़ा संघर्ष बन चुका होगा। अगर आज हम पूर्णतः संकल्प लें कि पेस्टिसाइड और केमिकल का प्रयोग नहीं करेंगे तो भी इसके दुष्परिणाम को रोकने में लगभग 5 से 10 वर्ष से अधिक का समय लग जायेगा। अब समय ऐसा आ चुका है कि हमें अपने शरीर को स्वस्थ्य और निरोगी बनाए रखने के लिए भोजन के अतिरिक्त अलग से न्यूट्रीशियन फूड्सप्लिमेंट लेना हमारे स्वस्थ्य जीवन के लिए अति आवश्यक हो चुका है।