21वीं सदी की शिक्षा

शिक्षा हमें मिल-जुलकर रहना सीखाती है:- महात्मा गाँधी -सदाचार और निर्मल जीवन सच्ची शिक्षा का आधार है तथा जैसे सूर्य सबको एक-सा प्रकाश देता है, बादल जैसे सबके लिए समान बरसते हैं, इसी तरह विद्या-दृष्टि सब पर बराबर होनी चाहिए। हरबर्ट स्पेंसर, शिक्षा का उद्देश्य चरित्र निर्माण है। स्वामी विवेकानन्द, मनुष्य में जो सम्पूर्णता गुप्त रूप से विद्यमान है उसे प्रत्यक्ष करना ही शिक्षा का कार्य है तथा शिक्षा विविध जानकारियों का ढेर नहीं है। प्लेटो, शरीर और आत्मा में अधिक से अधिक जितने सौदंर्य और जितनी सम्पूर्णता का विकास हो सकता है उसे सम्पन्न करना ही शिक्षा का उद्देश्य है।   शिक्षा द्वारा युवा पीढ़ी अपने समक्ष मानव जाति की सेवा का आदर्श रखे:- हर्बर्ट स्पेन्सर, शिक्षा का महान उद्देश्य ज्ञान नहीं, कर्म है। बर्क, शिक्षा क्या है? क्या एक पुस्तकों का ढेर? बिल्कुल नहीं, बल्कि संसार के साथ, मनुश्यों के साथ और कार्यों से पारस्परिक सम्बन्ध। अरस्तु, जिन्होंने शासन करने की कला का अध्ययन किया है उन्हें यह विश्वास हो गया है कि युवकों की शिक्षा पर ही राज्यों का भाग्य आधारित है। महामना मदनमोहन मालवीय, युवकों को यह शिक्षा मिलना बहुत जरूरी है कि वे अपने सामने सर्वोत्तम आदर्श रखें। एडीसन, शिक्षा मानव-जीवन के लिए वैसे ही है जैसे संगमरमर के टुकड़े के लिए शिल्प कला। निराला, संसार में जितने प्रकार की प्राप्तियाँ हैं, शिक्षा सबसे बढ़कर है। प्रेमचन्द, जो शिक्षा हमें निर्बलों को सताने के लिए तैयार करे, जो हमें धरती और धन का गुलाम बनाये, जो हमें भोग-विलास में डुबोये, वह शिक्षा नहीं भ्रष्टता है। नेलशन मण्डेला, विश्व में शिक्षा सबसे शक्तिशाली हथियार है जिससे सामाजिक बदलाव लाया जा सकता है।   प्रत्येक बच्चे का दृष्टिकोण सारी मानव जाति की भलाई का बनाना चाहिए:- महात्मा गांधी, एक दिन आयेगा, जब शांति की खोज में विश्व के सभी देश भारत की ओर अपना रूख करेंगे और विश्व को शांति की राह दिखाने के कारण भारत विश्व का प्रकाश बनेगा। डाॅ.बी.आर. अम्बेडकर, कानून और व्यवस्था किसी भी राजनीति रूपी शरीर की औषधि है और जब राजनीति रूपी शरीर बीमार हो जाये तो हमें कानून और व्यवस्था रूपी औषधि का उपयोग राजनीति रूपी शरीर को स्वस्थ करने के लिए करना चाहिए। डाॅ. राम मनोहर लोहिया, विश्व विकास परिषद’ का गठन किया था जो कि सम्पूर्ण विष्व में षांति स्थापित करने के लिए विश्व सरकार के गठन की ओर एक महत्वपूर्ण कदम था। डाॅ. सर्वपल्ली राधाशणन् , निःसंदेह आज हम एक एकताबद्ध विश्व की ओर अग्रसर है, जिसमें एक केन्द्रीय प्राधिकरण की स्थापना होगी, जिसके आगे बल प्रयोग के सभी कारकों का समर्पण किया जायेगा और सभी स्वतंत्र राष्ट्रों को, सम्पूर्ण विश्व की सुरक्षा के हित में, अपनी स्वायत्ता के कुछ अंश का परित्याग करना होगा। मार्टिन लूथर किंग, या तो हम संसार में रहने वाले सभी भाई-बहिन की तरह मिलकर रहे अन्यथा हम सभी मूर्खों की तरह एक साथ मरेंगे। जाॅन एफ. कैनेडी, हमें मानव जाति को महाविनाश से बचाने के लिए विश्वव्यापी कानून बनाना एवं इसको लागू करने वाली संस्था को स्थापित करना आवश्यक होगा और विश्व में युद्ध और हथियारों की दौड़ को विधि विरूद्ध घोषित करना होगा। विन्सटन चर्चिल, यदि हम विश्व सरकार न बना पाये, तो तृतीय विश्व युद्ध से संसार को कोई नहीं बचा पायेगा। सबसे अधिक शक्तिशाली वह विचार है जिसका समय आ गया है:- यू थाॅन्ट, संयुक्त राष्ट्र संघ के पूर्व महासचिव, कानून की डोर से बंधा हुआ विश्व पूर्णतया वास्तविक है तथा इसे प्राप्त किया जा सकता है। अल्बर्ट आइंस्टीन, केवल विश्व कानून एक सभ्य व शंातिपूर्ण समाज की ओर ले जाने की गांरटी दे सकता है। मिखाईल गोर्वाचोव ने कहा है कि एक विश्व सरकार की जरूरत की बारे में जागरूकता तेजी से फैल रही है। एक ऐसी व्यवस्था जिसमें विष्व के प्रत्येक देश अपना-अपना योगदान करेंगे। ड्वाइट डी. आइजनहाॅवर, एक ऐसा कानून होना चाहिए, जो सभी राष्ट्रों पर लागू होता हो क्योंकि बिना ऐसे कानून के विश्व सिर्फ अपूर्ण न्याय ही दे सकेगा जैसे एक बाहुबली के द्वारा कमजोर को दी गई दया की भीख। पोप जाॅन पाल द्वितीय,अंतर्राष्ट्रीय समुदाय को अंतर्राष्ट्रीय संबंधों को नियमित करने के लिए कानून की व्यवस्था का समर्थन करना चाहिए। बर्टेन्ड रसेल, मैं फिर से कहता हूँ कि ‘हमारा लक्ष्य’ एक विश्व सरकार के गठन का होना चाहिए। जैन टिनबरजन, मानवजाति की समस्याओं का हल अब राष्ट्रीय सरकारों द्वारा सम्भव नहीं है। आज विश्व सरकार के गठन की आवश्यकता है। यह संयुक्त राष्ट्र संघ को अधिक शक्तिशाली बनाकर ही सम्भव है, अर्थात यह तभी संम्भव है जबकि संयुक्त राष्ट्र संघ से वीटो पावर व्यवस्था समाप्त कर दी जाए। विक्टर ह्यूगो, विश्व की सारी सैन्य शक्ति से अधिक शक्तिशाली वह विचार है जिसका समय आ गया है। नेलशन मण्डेला, शिक्षा संसार का सबसे शक्तिशाली हथियार है। सीएमएस, विश्व एकता की शिक्षा की इस युग में सर्वाधिक आवश्यकता है।