ऐसा कहाँ नजर आता है


हर चेहरे में उसका 
चेहरा नजर आता है
भूल पायेंगे हम उसे,
 ऐसा कहाँ नजर आता है
हर कोई हमसे गर्मजोशी से 
मिलता नजर आता है
होगा हमसे खफा वो भी 
ऐसा कहाँ नजर आता है
वो तो हमें वफाओं का 
शंाहसाह नजर आता है
होगा बेवफा वो भी कभी, 
ऐसा नजर आता है
ये रास्ता मंजिल की तरफ 
जाता नजर आता है
कर देगा मंजिल से दूर,
 ऐसा कहाँ नजर आता है
नदियाँ, झरना, पंछी, पर्वत 
सब गुलजार नजर आता है
होगी धरती भी वीरान कभी, 
ऐसा कहाँ नजर आता है
हर शक्स में हिन्दु, 
मुसलमाँ नजर आता है
है इसां में इसां, 
ऐसा कहाँ नजर आता है