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भारत का बरमूडा ट्रेगल

अटलांटिक महासागर मे मेक्सिको की खाड़ी मे एक कुख्यात त्रिभुजाकार क्षेत्र है। जिसमें से गुजरने वाले सारे जलयान और वायुयान रहस्यमय तरीके से गायब हो जाते हैं। बहुत ही कम लोग जानते है। भारत में भी एक ऐसी झील है। जो अपने उपर से गुजरने वाली हर चीज को निगल जाती है। देश के उत्तर पूर्वी सीमा पर अरूणंाचल प्रदेश के तिरहुत जिले से चीन के युनान प्रांत को जोड़ने वाली सड़क पर म्यांमार से छूती सीमा पर पनास दर्रे के ओर एक विशाल सुनसान दलदल भरी झील दिखाई देती है। द्वितीय विश्वयुद्ध के दौरान जापानियों ने इस मार्ग से असम पर कब्जा करने की योजना बनाई जापानियों की इस योजना को नाकाम करने के लिये अरूणंाचल प्रदेश के स्टेल बेस रोड से भारी संख्या मे सेना बर्मा बाॅडर पर भेजी यह सेना पनास दर्रे तक पहुँचीं बाद में उसका क्या हुआ यह अब तक एक रहस्य है। अंग्रेजों ने इसी मार्ग से और भी सेनाये भेजी लेकिन वे भी गायब हो गयीं। इन घटनाओं से अंजान जापानियों ने भी असम पर कब्जा करने हेतु अपनी फौजें भेजीं। पर उनकी भी अधिकांश फौजें इस रहस्यमय झील पर आकर गायब हो गयीं। फलतः पूर्वी मोर्चें पर जापानियों की हार हो गई उनका असम विजय का सपना चकनाचूर हो गया बाद मे इस झील पर कई सर्वेक्षण और अभियान दल भेजे गये तो उन्होंने बताया कि यह कोई झील नही बल्कि एक दलदल है। इसका हवाई दौरा करने वाले ने बताया कि कभी यह झील नजर आती है। कभी दलदल इसका सौन्दर्य अवर्णीय है। इसकी सबसे रहस्यमय बात यह है कि कैमरे से फोटो लेने पर कोई इसकी फोटो नही आती है। अतः आज तक इसका कोई फोटो नही लिया जा सका है। कुछ इसे एक घास से झका हुआ एक गढ्ढा मानते है। अंतरिक्ष से आने वाले यात्रियों का गुप्त अडड्ा।
 चीन का पहाड़ी बीहड़ या बरमूडा टेंªगल 
चीन की समाचार एजेंसी सिन्हुआ के अनुसार देश के सिचुआन प्रान्त के होजुओ क्षे़त्र मे एक पहाड़ी पर काले बांस का एक बीहड़ है जिसमे  जाने वाले लोग और विमान गायब हो जाते हैं। यहाँ वर्षों से सैकड़ों लोग रहस्यमय रूप से लापता होते रहे हैं। कोई वहां से लौटकर वापस नही आया वनस्पति विशेषज्ञ झांग यिझांग और भूवैज्ञाानिक लिउ जिग्रांक्ड के नेतृत्व मे 50 वैज्ञानिको के दल ने जंगल के बीचो बीच स्थित बीहड़ के चारों ओर फैले ठण्डे और कोहरे मे डूबी पहाड़ियों का सवेंक्षण किया जिन्होने पता लगाया कि जंगल मे पत्तियां सड़ रही है। जिसकी जहरीली गैस से वहां जाने वाले वे भटक कर गहरे गढढों और पहाड़ी नदियों मे गिर जाते हैं। रास्ते इतने दुर्गम और दुरूह हैं। कि लोग रास्ता भटक जाते हैं। वहां आये दिन तूफान आता रहता है। कोहरा छाया करता  है। लोंगों का दम घुट जाता है। जुलाई 1950 में चीन की कम्यूनिस्ट पार्टी छोड़कर भाग रहे करीब 100 सैनिक और एक अमरीकी विमान गायब हो गया सिन्हुआ के अनुसार विमान इस क्षेत्र के शक्तिशाली चुम्बकीय खिचांव के कारण दुर्घटनाग्रस्त हुआ था 1962 मे 5 भूवैज्ञानिकों के नेतृत्व मे गया एक अभियान दल लापता हो गया यहाँ के शक्तिशाली चुम्बकीय क्षेत्र के कारण विमान का या कोई अंय दिशासूचक यंत्र काम नही करता है। और विमान दुर्घटनाग्रस्त हो जाता है। 1962 मे 5 भूवैज्ञानिकों के नेतृत्व मे गया एक अभियान दल लापता हो गया वैज्ञानिकांे के अनुसार 4000 हजार मीटर उँचे इस पहाड़ पर दुर्लभ खनिजों, पेड़ पौधांे व जन्तुओं का भण्डार है।


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