चर्चित मौत के कारण

आरूषी तलवार मर्डर केस- 
आरूश्ष्ी का जंम 24 मई 1993 को मिथुन लग्न में ग्रेटर नोएडा मे हुआ था, उसके पिता डा. राजेश तलवार पेशे से चिकित्सक और माँ नुपूर तलवार ग्रहणी थीं, नवीं की छात्रा आरूषी ने एडवेंचर के लिये अपनी दो दोस्तों बिन्दू व श्रेया के कहने पर अपने नेपाली नौकर हेमराज के साथ यौन संबध बनाये थे, जिसकी जानकारी तलवार दंपति को हो गई थी, घर की प्रतिष्ठा बचाने के लिये 15/16 मई 2008 की रात करीब दो बजे माता-पिता ने तेज धारदार हथियार से आरूषी और नौकर हेमराज की हत्या कर दी तलवार दंपत्ति पकड़े गये और उन्हें गंभीर सजा हुयी।
 आरूषी का जंमाक इस प्रकार है। मिथुन लग्न में चन्द 12 अंश, कर्क मे मंगल 19 अंष, कन्या मे गुरू वक्री 11 अंश, तुला मे मंदि, वृश्चिक मे राहू 18 अंश, कंुभ मे शनि 6 अंश, मीन मे शुक्र 25 अंश व वृष मे सूर्य 9 अंश, बुध 19 अंश, केतु 18 अंश। 
नवांश मे मकर मे चन्द, कुंभ मे शुक्र, मीन मे सूर्य, मेष मे गुरू, मिथुन मे बुध केतु, वृश्चिक मे शनि धनु मे राहू, मंगल।
मृत्यु कालीन लग्न- कुंभ, मेष मे शुक्र, वृष मे, सूर्य बुध, कर्क मे मंगल केतु, सिंह मे शनि, कन्या में चन्द्र, धनु मे वक्री गुरू, मकर मे राहू। मृत्यु कालीन गुरू धनु मे वक्री होकर जंमस्थ राहू से निकल रहा था जो स्पष्ठ मृत्यु योग दे रहा था नवांश में गुरू बुध कार्मिक ग्रह है। कार्मिक बुघ की केतु से युति है। जो हत्या होने का योग बना रहा है। नवांश मे मंगल राहू युति ने भंयकर तरीके से हत्या करवाई।
शीना बोरा मर्डर केस:-
शीना के पिता सिद्धार्थ दास के अनुसार शीना का जंम 11 फरवरी 1987 को दोपहर 2.23 मिनट पर शिंलंाग मेघालय मे हुआ था उसकी जंम पत्री इस प्रकार है।
वृष लग्न, मिथुन मे चन्द्र पुर्नवसु नक्षत्र तृतीय चरण। द्वितीय भाव मे मिथुन मे चन्द्र, कन्या मे केतु, वृश्चिक मे शनि, धनु मे शुक्र, मकर मे सूर्य, कुंभ मे बुध, मीन मे राहू मंगल व गुरू।
 नवांश लग्न सिंह कन्या मे सूर्य, धनु मे राहू, कुंभ मे बुध शनि, मीन मे मंगल,सिंह मे चन्द्र केतु, कर्क मे गुरू व शुक्र। शीना के गुरू व बुध कार्मिक ग्रह है। गुरू राहू व मंगल से युत होकर हत्या का स्पष्ट योग बना रहा है। 24 अप्रैल 2012 को माँ इन्द्राणी मुखर्जी ने अपने पूर्व पति संजीव खन्ना, ड्राइवर श्यामराम  पिंटूराम राय तथा एक अंय अज्ञात सहयोगी की मदद से कार मे शीना की गला घोटकर हत्या दी।
फूलन देवी:- 
मीन लग्न में शुक्र, बुध, मंगल, मेष मे सूर्य, राहू, वृष में गुरू व शनि, तुला मे केतु और वृश्चिक मे चन्द्र। बुध लग्न मे नीच का होकर मंगल है। तथा राहू उससे द्वितीय है। मंगल व षुक्र कार्मिक ग्रह से युत है। 
डा. श्यामा प्रसाद मुखर्जी:-
भारतीय जनसंघ के संस्थापक डा. श्यामा प्रसाद मुखर्जी सन् 1952 मे कश्मीर मे गिरफ्तार किये गये थे। वही जेल मे रहस्यमय परिस्थितियों मे उनकी मृत्यु हो गयी थी कुछ लोगों का विश्वास था कि उनको विष दे दिया गया था। उनका जंमाक इस प्रकार है। 
 वृष लग्न द्वितीय भाव मे मिथुन का सूर्य, कर्क मे बुध व शुक्र, पंचम मे कन्या का मंगल, छठे भाव मे तुला का राहू, अष्ठम मे धनु का वक्री शनि व गुरू, कुंभ का चन्द्र मकर मे, 12 वें भाव मे मेष का केतु।
 डा. मुखर्जी का भाग्य भाव पापकत्र्तरी में था लग्न पापकत्र्तरी मे थी अतः उन्हें जेल हुयी। लग्न से आठवें भाव मे शनि तथा चन्द्र लग्न से आठवें भाव मे शत्रु राशि कन्या मे मंगल था जिसने हिंसक मृत्यु दी। आठवें भाव मे स्वग्रही गुरू तथा अष्ठमस्थ शनि दीर्घायु योग देता है किन्तु दोनो वक्री थे जिसके कारण वे अकाल मत्यु मरे अष्ठम भाव से केतु का संबध रहस्यमय मृत्यु देता है डा. मुखर्जी के आठवें भाव पर केतु की दृष्टि ने उन्हें रहस्यमय मृत्यु दी। अष्ठमेश गुरू पर शत्रु राशिगत सूर्य और केतु की दृष्टि घातक है। चन्द्रमा से द्वादेश शनि की चन्द्रमा पर दृष्टि स्पष्ट हत्या योग बना रहा था चन्द्रमा से चतुर्थ भाव पापकत्र्तरी मे है।
3. लाल बहादुर शास्त्री:- शास्त्री जी का जंम 2 अक्टूबर 1904 को प्रातः-10ः10 मिनट पर वाराणसी मे हुआ उनका जमांक इस प्रकार है। वृश्चिक लग्न तृतीय भाव मे मकर का स्वग्रही शनि, चतुर्थ भाव मे कुंभ का केतु, षष्ठ भाव मे मेष का गुरू, अष्ठम भाव मे मिथुन का चन्द्र, दशम भाव मे सिंह का राहू, मंगल, बुध, लाभभाव मे कन्या का सूर्य तथा 12 वें भाव मे तुला का शुक्र। 9 जून 1964 को वे भारत के प्रधानमंत्री बने 1965 के  भारत पाक यु़द्ध के बाद 1966 मे वे समझौते हेतु ताशकंद (रूस) गये जहाँ 10 जनवरी की रात कथित हार्ट अटैक के कारण उनकी संदेहात्मक पस्थितियों मे मृत्यु हो गई कुछ लोगांे को संदेह था कि उनको विष देकर मार दिया गया था लग्नेश व षष्ठेश मंगल राहू के साथ है। जो शत्रु द्वारा विष प्रयोग को बताता है। लग्न से तृतीय शनि और चन्द लग्न से तृतीय राहू विष द्वारा मृत्यु योग दे रहे हैं। लग्न से अष्ठमेश बुध और गुरू लग्न से अष्ठमेश  मंगल भी राहू से युत है जो विष द्वारा अकाल मृत्यु का घोतक है। चन्द लग्न से आठवें वक्री शनि दुःमरण योग दे रहा है। अष्ठम भाव पर रहस्यमय केतु की दृष्टि ने उनकी मृत्यु को रहस्यमय बना दिया आठवें भाव में चन्द्र दूघ मे जहर दिया गया जैसा कुछ लोगो का विचार था चन्द्रमा दूध का कारक ग्रह है। लग्नेश की त्रिकेश बुध से युति व लग्न से चतुर्थ भाव मे पापी ग्रह केतु व चन्द्र लग्न से चतुर्थ भाव मे शत्रु राशि सूर्य और चतुर्थेश बुध चतुर्थेश से 12 वंे भाव मे मंगल व राहू से युत स्पष्ठ रूप से हत्या का योग बना रहे है।
प्रेसीडेंट अब्राहम लिंकन का जंम 12 फरवरी 1809 को वाशिंगटन मे कुंभ लग्न व कुंभ नवांश मे हुआ उनका जमांक इस प्रकार है। कुंभ लग्न मे सूर्य, बुध द्वितीय भाव मे मीन का गुरू शुक्र, तृतीय मे मेष का केतु, नवम भाव मे तुला का मंगल-राहू, वृश्चिक मे शनि, 12 वें भाव मे मकर का चन्द्र। अमरीका के सबसे लोकप्रिय राष्ट्रपति श्री लिंकन सन 1860 में अमरीका के 16 वें राष्ट्रपति चुने गये 15 अप्रैल 1863 को फोर्ड थियेटर मे एक दक्षिपंथी हत्यारे विलकोस बूथ नेे गोली मार की उनकी हत्या कर दी द्वादश भाव मे चन्द्र पर शनि व मंगल की दृष्टि है। मंगल व शु़क्र कार्मिक ग्रह हंै। मंगल राहू के साथ है। जो हत्या का योग दे रहा है।
 ज्योतिषी माणिक चन्द जैन के ज्येष्ठ पुत्र की गोली मार कर हत्या । जंम- 24 अप्रैल 1940। 11.05। धनु लग्न चतुर्थ मे मीन मे नीच बुध व केतु मेष मे सूर्य 11 अंश, गुरू, शनि 11ने0, वृष मे मंगल 22 व शुक्र, कर्क मे प्लू, कन्या मे राहू, वृश्चिक मे नीच का चन्द्र, 25 अंष। कार्मिक ग्रह बुध, गुरू है।
हैं। कार्मिक ग्रह गुरू केतु से युत होकर हत्या होने का योग बना रहा है। मीन मे कार्मिक ग्रह बुध केतु से युत होकर हत्या होने का योग बना रहा है। 
 महर्षि दयानंद- 28. फरवरी 1825। 1.30 दोपहर, मोरबी गुजरात। मिथुन मे केतु, चन्द्र, कर्क मे गुरू, धनु मे राहू मकर मे बुध, कुंभ मे सूर्य, मीन मे मंगल, मेष मे शुक्र, वृष मे शनि। नरक चर्तुदशी के दिन मृत्यु जहर देने से हुयी। कार्मिक ग्रह बुध, गुरू परस्पर दृष्ट तथा मकरगत बुध वक्री होकर धनु का फल दे रहा है। जो राहू से युत है। स्पष्ट हत्या का योग है। नन्ही वेश्या ने अपमानित होकर इन्हें दूध मे पिसा कांच पिलवा कर हत्या कर दी थी।
प. जवाहर लाल नेहरू- 14 नवम्बर 1888। 11.14 मिनट रात्रि। इलाहाबाद। कर्क लग्न मे चन्द्र सिंह मे शनि कन्या मे मंगल तुला मे बुध, शुक्र वृश्चिक मे सूर्य, धनु मे केतु गुरू, मिथुन मे राहू। कार्मिक ग्रह बुध, गुरू हैं। कार्मिक ग्रह गुरू केतु से युत होकर हत्या होने का योग बना रहा है। नेहरू के मारण के लिये मछलियां आहूति मे डाली जाती रहीं 40 वें दिन पूर्णाहुति के साथ ही प. जवाहर लाल नेहरू की मृत्यु हो गई एक विदेशी पत्रकार ने लिखा कि हवन के समय वह स्वयं वहां उपस्थित था साभार- तंत्र विषेशांक, कादम्बिनी, 1979।
नेपाली राजकुमारी श्रुति प्रिया- 16 अक्टूबर 1976। तुला लग्न अजमेर। पति पत्नी साथ मरे। तुला लग्न मे चन्द्र, यूरेनस, राहू, वृश्चिक मे शुक्र, मेश मे केतु, वृष मे गुरू,  मिथुन मे चन्द्र, कर्क मे शनि, कन्या मे सूर्य, बुध,। मंगल व शु़क्र कार्मिक ग्रह हंै। मंगल तुला मे राहू के साथ है। जो हत्या का पूर्ण योग दे रहा है।
 जातक का जंम 26 जुलाई 1857। विक्रम संवत 1914  श्रावण शुक्ल पंचमी रविवार, 12 वें नक्षत्र उत्तरा फाल्गुनी द्वितीय चरण मे सूर्योदयादिष्ट 25 /00 घटी पर हुआ है।  जमंाक- धनु लग्न मे राहू, मेष मे गुरू, वृष मे शुक्र, मिथुन मे शनि व केतु, कर्क मे सूर्य, मंगल व बुध वक्री कन्या मे चन्द्र। सूर्य महादशा शेष 4 साल। जातक की पहली पत्नी 50 वर्ष की आयु मे निःसंतान मर गई थी उसने दूसरी शादी की पत्नी क्रूर स्वभाव की थी जातक पिता बनने हेतु अयोग्य था अतः पत्नी ने मां बनने के लिये कुछ पुलिस वालों और एक डाक्टर्स के साथ अवैध संबध बनाये लेकिन माँ नही बन सकी उसने एक दिन एक रजिस्ट्रार के कार्यालय मे पति द्वारा बनवाया एक दस्तावेज पेश करके जातक की सारी जायदाद अपने नाम करवा ली उसके एक माह बाद एक सुबह मकान के बरामदे मे जातक मृत पाया गया उसके गुदा से खून बह रहा था महिला के प्रेमी पुलिस इन्सपेक्टर व डाक्टर ने मौत का कारण अन्तःस्त्राव माना लेकिन स्थानीय निवासियों ने अपनी जाँच मे इसे हत्या माना महिला ने अपने पति को जहर दे दिया विद्वान ज्योतिषी एम के गणपति अययर ने पति के ज्योतिषी से जातक की कुण्डली प्राप्त की और अघ्यन किया और वह हत्या ही साबित हुआ। कौशिक चिंतामणि ग्रन्थ के अनुसार यदि जमांक मे सूर्य व मंगल 8 वें भाव मे हो तथा 7 वें भाव मे शनि हो तो जातक की मृत्यु पत्नी द्वारा दिये गये घातक विष के कारण होगी। जमांक मे गुरू बुध कार्मिक ग्रह है। कर्क का बुध वक्री होकर मिथुन का फल दे रहा है। जहाँ कार्मिक ग्रह बुध शनि व केतु से युत होगा। यह स्पष्ठ हत्या का योग है। 
हत्या होने के योग-
दुर्भाग्य से इस विषय पर आधुनिक और प्राचीन ग्रन्थों मे कुछ खास और प्रामाणिक सामग्री उपलब्ध नही है। इस विषय पर एक मात्र रचना फेट एंड डेटिनी के संपादक स्व. माणिक चन्द्र जैन का ग्रन्थ कार्मिक कन्ट्रोल प्लेनेट के अलावा कोई अंय प्रामाणिक ग्रन्थ  नहीं है। इस ग्रन्थ मे उन्होंने निम्न हत्या होने के महत्वपूर्ण सिडान्त बताये हैं।
1. 12 वां भाव हत्या होने, अपराध का शिकार होने, बंधन, सजा, जेल, कष्ट व पीड़ा, गत जंम के कर्मों, गुप्त गुप्त शत्रुओं व पश्चाताप का है।
2. चैथा भाव जीवन के अंत का भाव है।
3. कार्मिक कन्ट्रोल प्लेनेट यदि परस्पर युत हों तो व्यक्ति को महान ऊँचाई तक ले जाता है। लेकिन यदि वह राहू या केतु से युत होकर 8 वें या 12 वें भाव मे जाय तो भारी विनाश देता है। और जातक की अप्राकृतिक मृत्यु देता है। 
4. 12 वें भाव का राहू भारी विनाश देता है। यदि मंगल के साथ हो हिंसा का शिकार होगा यदि मंगल कार्मिक ग्रह हो तो हत्या होगी।
5. कार्मिक ग्रह यदि चतुर्थ भाव मे हो तो जीवन हेतु घातक घटना देता है।
6. कार्मिक ग्रह यदि यूरेनस के साथ हो तो अचानक,असामान्य और असंभावित घटना देता है।
7. कार्मिक ग्रह यदि राहू या केतु के नक्षत्र मे हो या एक कार्मिक ग्रह यदि दूसरे कार्मिक ग्रह के नक्षत्र मे जाय तो हत्या के योग देता है।
8. यदि लग्नेश 6, 8, या 12 वें भाव मे राहू/केतु या कार्मिक ग्रह के साथ हो तो अकाल और अप्राकृतिक मृत्यु देता है।