एस्ट्रोलाजी एण्ड गायक्नोलाजी

ज्योतिष में स्त्री बांझपन के अनेक योगांे का वर्णन है किन्तु उसमे मेडिकल गायक्नोलाजी के सूत्र अति कम और बिखरे हुये हैं। अतः ज्योतिषयों के सामने जब पीड़ित जोडे अपनी समस्या लेकर आते है, तो ज्योतिषी गायक्नोलाजी का एस्ट्रोलॅजी से संबध नही बना पाता है और आधुनिक पैथोलाजिकल रिर्पोटस की उपेक्षा करते हुये वह बिना समस्या या ज्योतिष कारण समझे संतान गोपाल मंत्र तथा हरिवंश पुराण जैसे परम्परागत या उपचार देता है। और 95 फीसदी केसस मे हार जाता है। नीचे कुछ सूत्र अमूल्य सूत्र प्रस्तुत है।
1. चन्द्रमा स्त्री हारमोन्स व गर्भाशय का कारक है यदि गर्भाशय मे विकृति के कारण संतान बाधा हो तो चन्द्रमा, माता पार्वती और गंगा जी के मंत्रोपचार करना चाहिये।
2. बुघ फेलोपीन टयूब का कारक है इनके बंद होने या इनमे विकृति के कारण संतान बाधा हो तो बुध या का संतान गोपाल मंत्र तथा हरिवंश पुराण उपचार दो। साथ ही कार्तिकेय स्वामी का भी मंचोपचार दो।
3. शुक्र ओवरीज या डिम्बाशय का कारक है। यदि डिम्ब नही बन पाता है। तो शुक्र, माता, लक्ष्मी, गौ सेवा का उपचार दो।
4. यदि टयूमर, सूजन या सिस्ट हो तो मंगल ग्रह, कार्तिकेय स्वामी या षष्ठी देवी के व्रत या मंत्रोपचार दो।
5. यदि चर्बी चढने या मोटापे के कारण बाधा हो तो बृहस्पति का मंत्रोपचार दो।
6. यदि गुप्त रोगो या संक्रमण हो तो के कारण बाधा हो तो राहू केतु का मंत्रोपचार दो।
7. यदि गर्भाशय या फेलोपीन टयूब मे गांठ हो मंगल, बुघ व केतु का संयुक्त मंत्रोपचार देना चाहिये। 
8. गर्भाशय या जनननांगों मे निरन्तर सूजन हो चन्द्रमा, माता पार्वती और गंगा जी का मंत्रोपचार करना चाहिये।
9. शनि जननांगों के अपूर्ण विकास का परिचायक है। यह अधिकांश मामलों मे असाध्य है। कहीं-कहीं सफल सर्जरी हेतु मंगल, केतु का होम लाभ देता हैं।
10.राहू आर टी फैक्टर का ना मिलने से संतान बाधा हो सर्प होम व दुर्गा जी के अनुष्ठान करवायें। अी डी आर या अंय कारणों मे गणेश जी व सूर्य का मंचोपचार दो।