सीधे मुख्य सामग्री पर जाएं

गंगा आस्था ही नही अर्थव्यवस्था से भी जुड़ी हुई है

रायबरेली। प्रदेश के गन्ना विकास एवं चीनी उद्योग राज्यमंत्री सुरेश पासी ने पावन गंगा यात्रा कार्यक्रम के तहत डलमऊ की ग्राम पंचायत संकट मोचन घाट पर गंगा आरती एवं अन्य कार्यक्रमों में प्रतिभाग किया। उन्होंने गंगा आस्था ही नही अर्थव्यवस्था से भी जुड़ी हुई है। गंगा के किनारे की जमीन बहुत उबजाऊ होती है जिसे ध्यान देने की जरूरत है। प्रदेश सरकार गंगा यात्रा के माध्यम से गंगा के किनारे खेती को बढ़ावा देकर किसानों की आय को दुगना करने के लिए दृढसंकल्पित है। गंगा की निर्मलता बनाने के लिए केन्द्र व प्रदेश सरकार के जिम्मेदार लोग लेग हुए है। गंगा यात्रा व अर्थ गंगा एक नही पहल है जिसका उद्देश्य गंगा के किनारे पड़ने गांवों का विकास करना तथा वहां के लोगों के प्रति आय को भी बढ़ाना है। देश में 2071 कि0मी व यूपी में गंगा 1140 कि0मी0 का प्रवाह होता है। गंगा की आस्था और अध्यात्मक को अर्थ से जोड़ना है। प्रदेश सरकार के मुखियां व युवा मुख्यमंत्री योगी आदित्नाथ जी द्वारा वृहद योजना बनायी है। अर्थ गंगा से जोड़कर बेहतर परिणाम भी आना शुरू हो गये है। राज्यमत्री ने राजा डलदेव पार्क सड़क घाट पर आयोजित चैपाल से सम्बन्धित जानकारी लीे तथा आमजन को गंगा यात्रा के महत्व को बताया तथा एसडीएम डलमऊ सविता यादव को निर्देश दिये कि आमजन की समस्याओं को सुने तथा समस्याओं का निस्तारण तत्काल किया जाये। जिलाधिकारी शुभ्रा सक्सेना व पुलिस अधीक्षक स्वप्निल ममगाई, मुख्य विकास अधिकारी राकेश कुमार आदि अधिकारियों ने आये हुए अतिथियों को आभार प्रकट किया। 
 बछरावा विधायक राम नरेश रावत गंगा यात्रा कार्यक्रम के दौरान गंगा पंचायत गेगासों सहित कई क्षेत्रों का भ्रमण किया। विकास खण्ड लालगंज के गेगासों गंगा पंचायत में चैपाल के दौरान आमजन की समस्याओं को सुना। गंगा यात्रा के सरकारी पम्पलेट ग्रामीण व आमजन मानस को देकर गंगा यात्रा के महत्व के बारे में विस्तरित जानकारी दी। उन्होंने कहा कि आदिकाल से गंगा का महत्व रहा है। गंगा नदी राष्ट्रीय धरोहर है। भारत ही एक ऐसा देश है जो नदी को अपनी मां के सामान मानता है। नदियों का कोई धर्म व जाति नही होता है। नदियां सिख, ईसाई, मुस्लिम, हिन्दु, बोद्ध सभी धर्म के लोग की है। उन्होंने कहा कि गंगा को प्रदूषण से बचना होगा। गंगा को शुद्ध अविरल रखना हम सभी लोगों का दायित्व है। उन्होंने कहा कि यूपी सकरार  गंगा के किनारे गांवों में जीरों बजट खेती व आगेनिक खेती को प्रोत्साहित कर रही है।  


इस ब्लॉग से लोकप्रिय पोस्ट

पक्षी आपका भाग्य बदले

मनुष्य का जीवन अपने आसपास के वातावरण से ही प्रभावित होता है। व्यक्ति के आस-पास के पशु पक्षी उसके जीवन का अभिन्न अंग है। भारतीय ऋर्षियों तथा संसार के अध्यात्मवादियो ने संसार के पक्षियों को ना केवल ज्योतिष तथा मनुष्य के भाग्य से जोड़ा है। बल्कि पक्षियों को उपयोग शकुन ज्योतिष, फलित तथा प्रष्न ज्योतिष तथा अनेकों ज्योतिष, तांत्रिक उपचारों और शारीरिक मानसिक रोगों के निवारण में किया है। भारत मे पंच प़क्षी शास्त्र, कल्ली पुराण पर आधारित तोते द्वारा भविष्यवाणी, पक्षी तंत्र तथा शकुन ज्योतिष का प्रयोग आदिकाल से ही किया जाता है भारत मे गरूड़ जी, नीलकंठ, काकभुषुंडी,, हंस, जटायु व संपाती, शुकदेव जी आदि दिव्य पक्षियों तथा अनेक देवी देवताआंे वाहन के रूप मे पक्षियों को प्रयोग किये जाने का  वर्णन है। जैसे भगवान विष्णु का गरूड़, कार्तकेय जी का मयूर, माता लक्षमी का उल्लू, विश्वकर्मा, वरूण जी तथा स्वरसती जी का हंस आदि शनिदेव का कौआ आदि का प्राचीन काल मे पक्षियों द्वारा डाक सेवा युद्ध संबधी शकुन का भी काम लिया जाता था पक्षियों को स्वतंत्रता, नवीन विचारों, आनंद, तनाव, मुक्ति, प्रषंसा, यष, धन्यवाद देने, प्रजनन श

परिवर्तन योग से करें भविष्यवाणी

भारतीय ज्योतिशशास्त्र में भविष्यकथन के सैकड़ों सूत्रो का वर्णन है। इन्ही सूत्रों मे से एक है परिवर्तन योग जिसका वर्णन पाराशरीय और नाड़ी ग्रन्थों दोंनों मे पाया जाता है। हाँलाकि दोनो प्रकार के ग्रन्थों में इन सूत्रों को विभिन्न तरीको से प्रयोग किया गया है ज्योतिष मे परिवर्तन योग के तीन रूप पाये जाते हैं। 1. भाव परिवर्तन 2. राशि परिवर्तन 3. नक्षत्र परिवर्तन  भाव परिवर्तन पाराशरीय व कुछ नाड़ी ग्रन्थों जैसे षुक्र नाड़ी मे इसके सूत्रो का वर्णन पाया जाता है। जो भावा के स्वामियो के बीच स्थान परिवर्तन से बनता है। जैसे चतुर्थेश षष्ठ भाव मे जाय और षष्ठेश चतुर्थ भाव मे जाय। इसके भी तीन भेद हैं। 1. दो शुभ भावों के स्वामियों का परस्पर परिवर्तन जैसे लग्न व पंचम भाव का परिवर्तन या दो केन्द्रेशों का परिवर्तन या केन्द्र और त्रिकोण भाव मे परस्पर परिवर्तन। 2. दो त्रिकेशांे का परिवर्तन जो विपरीत राजयोग बनाता है। 3. किसी केन्द्रेश या त्रिकोणेश का त्रिकेश से परिवर्तन। जैसे दशमेश का द्वादेश से परिवर्तन या पंचमेश या द्वादेश के बीच परिवर्तन। 2. ग्रह या राशि परिवर्तन  इसका वर्णन स्व. आर. जी. राव द्वारा अनुवादित और

जेल जाने के योग

ज्योतिष शास्त्र अनुसार कुंडली के आठवें मतांतर से बारहवें भाव से कारावास तथा सजा का विचार किया जाता है। कुंडली के इस घर में राहु अगर अष्टमेश के साथ हो तो उसके अशुभ प्रभाव के कारण व्यक्ति को किसी बड़े अपराध के कारण जेल जाना पड़ता है। शनि  मंगल और राहू मुख्य रूप से यह तीन ग्रह एवम् इनका आपसी सम्बन्ध जेल के कारक है। शनि व 12 भाव सजा का कारक है। छठा भाव व मंगल राहू अपराध के कारक है। अगर किसी व्यक्ति की कुण्डली में मंगल और राहु एक साथ किसी भाव में बैठकर युति करते हैं तो जेल योग बनता है केतु रस्सी बेड़ी हथकड़ी का कारक ग्रह हैं अशुभ मंगल व राहु के बीच दृष्टि संबंध बनता हो तो अंगारक योग की वजह से ऐसा इंसान हिंसक स्वभाव वाला हो जाता है और अपराध करता है जिससे जेल जाना पड जाता है। शनि मंगल व राहु मुख्य रूप से जेल यात्रा कराने का भी योग बनाते हैं और इनकी युति या आपस में दृष्टि इस तरह की स्थितियां बना देती है कि आखिर इंसान को जेल जाना ही पड जाता है। जन्मकुंडली में सूर्यादि ग्रह समान संख्या में लग्न एवं द्वादश तृतीय एवं एकादश, चतुर्थ, दशम, षष्ठ एवं अष्टम भाव में स्थित हो तो यह बंधन योग बनाता है यह स्थिति