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जहाज डूबने की अचूक भविष्यवाणीं

विश्व जहाजरानी के इतिहास के पन्नों मे दर्ज है। एक विचित्र, रहस्यमय और भुतहा जहाज की दास्तां, जो ना केवल पादरी की अनोखी और मनहूस भविष्यवाणी का शिकार हुआ बल्कि डूबने के कई शताब्दी के बाद भी अनेक बार भुतहा शिप के रूप मे मशहूर व प्रकृट हुआ। कोलंबस युग के इस व्यापारिक डच शिप का नाम ‘डच ईस्ट इंडियामैन’ था जो फलाइंग डचमैन के रूप मे मशहूर हुआ जो भारत और योरोप के मध्य कपड़े, मसालें और सोना लाद कर लाता था इसका कप्तान हैंडरिक वान डेर डेरिक बेहद साहसी, योग्य व अनुभवी व्यक्ति था। सन 1680 के अक्टूबर माह मे डचमैन एम्सरर्डन से बटाविया के लिये रवाना होने वाला था तब कुछ पादरियों ने कप्तान हैंडरिक को भविष्यवाणी करते हुये चेताया कि अभी तुम कुछ दिन तक यात्रा मत करो तुम्हारे सिर पर मौत मंड़रा रही है। तुम्हारा जहाज तूफान मे घिर कर डूब जायेगा, हैंडरिक के कुछ दोस्तों ने भी उसे रोकने की कोशिश की किन्तु वह बोला मै ऐसी बेहुदा भविष्यवाणियों पर विश्वास नही करता हूँ। जहाज माल और 150 यात्रियों के साथ रवाना हुआ जब जहाज अफ्रीका के केप आफ गुड होप के पास पहुँचा तो समंदर में भयंकर तूफान आ गया नाविकों ने तूफान की ताकत का अंदाजा लगा कर कप्तान से प्रार्थना की कि जहाज को मोड़कर तूफान के रास्ते से हटा ले लेकिन अति आत्मविश्वास से भरे कैप्टन ने जहाज मोड़ने से मना कर दिया देखते ही देखते जहाज भयंकर तूफान मे फँस गया और चटट्ानो से टकरा कर ना केवल उसमे आग लग गई बल्कि उसके परखच्चे उड़ गये। जहाज 150 यात्रियों सहित डूब गया एक नाविक को मछली मारने वाली एक नौका ने बचा लिया उससे सारे हादसे का पता चला कहा जाता है। जहाज डूबने से पूर्व कैप्टन ने शाप दिया कि अंतिम न्याय के दिन तक वह केप आफ गुड होप मे अपना जहाज चलाता रहेगा जब पादरियों को जहाज डूबने की बात पता चली तो उन्होने पुनः भविष्यवाणी को कि यह जहाज अपने कप्तान, कर्मचारियों, यात्रियों सहित अनंत काल तक मंड़राता रहेगा। तब से अब तक करीब तीन सौ सालो मे उस जलते और डूबते हुये भुतहे जहाज को देखने की कई प्रामाणिक घटनायें दर्ज की गई। जिसने भी इसे देखा उसकी बदकिस्मती शुरू हो गई। पिछले तीन सौ सालों मे इस घटना पर अनेकों कवितायें, लेख और उपन्यास लिखे जा चुके हैं। विश्व मे इस विषय पर कई फिल्मे भी बन चुकी है। द्वितीय विश्वयुद्ध के दौरान के जर्मन पनडुब्बी के कर्मचारियों ने इसे देखे जाने का वर्णन दर्ज किया सबसे प्रामाणिक घटना 11 जुलाई 1881 को ब्रिटेन के रायल नेवी शिप बैकंेट (इऩ्क्रोस्टेंट) के लाॅगबुक मे दर्ज हुयी। तब बेंकेट केप आॅफ गुड होप से गुजर रहा था जहाज में 16 वर्षीय प्रिंस जार्ज आफ साउथ वेल्स जो आगे चल कर ब्रिटेन के किंग जाॅर्ज पंचम बने और उनके साथ उनके बड़े भाई ंिप्रंस अल्बर्ट विक्टर और शिक्षक डाल्टन भी साथ थे वे तीन साल की यात्रा पर थे प्रातः चार बजे का समय था तब उन्होने और सारे कर्मचारियों ने फलाइंग डचमैन को देखा विवरण इस प्रकार था 200 गज दूर एक जलते हुये भुतहे जहाज की विचित्र तेज लाल रोशनी नजर आ रही थी उसमे करीब यात्रियों, नाविको सहित दो सौ लोग मदद के लिये पुकार रहे थे। देखते-देखते वह जहाज गायब हो गया इस घटना को 13 अन्य नाविको ने तथा साथ चल रहे दो अन्य जहाजों के नाविकों ने भी देखा। यात्रा के अगले दिन 12 जुलाई को इऩ्क्रोस्टेंट के पोतध्वज पर निगरानी टावर पर खड़ा रहने वाला नाविक एल्फ्रेट नीेचे गिर कर मर गया कुछ दिन बाद जहाजी बेडे़ के एडमिरल की भी मौत हो। 25 मार्च 1939 मे ग्लेनकैर्न बीच पर फाल्स बे पर करीब 150 लोगों ने इसे देखा। केपटाउन के दक्षिणपूर्व मे स्थित इस तट पर उस समय हंगामा हो गया जब कोलंबस युग का पुराना जहाज अपने पाल ताने तट के सामने गुजरते दिखाई दिया इसके पहले कि लोग कैमरों मे इसकी तस्वीर कैद कर पाते भुतहा जलपोत हवा मे गायब हो गया। सितम्बर 1942 को इसी जहाज को केपटाउन के मोउले पांइट के सामने से टेबल बे की ओर आते देखा और सैकड़ों लोगों ने उसे राबिन द्वीप के पीछे गायब होते देखा। बाद मे यह 1952, 1975, 1996 और 1999 मे भी किसी को बिना कोई नुकसान पहुँचाये दिखाई दिया। सन 1835 मे भी एक ब्रिटिश शिप मे सवार 125 यात्रियों ने इसे डगमगाते देखा वे चीखने चिल्लाने लगे उनके देखते देखते फलाइंग डचमैन गायब हो गया। 


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