सीधे मुख्य सामग्री पर जाएं

जवाबी कीर्तन सुन झूमे श्रोता

रायबरेली। जनपद अपनी प्रतिभाओ पर गर्व करता है, असि मसि की धरा समाज को राष्ट्रीय ही नही अंतराष्ट्रीय स्तर पर अपनी प्रतिभाओ का लोहा मनवाती रही है, पिछले पांच वर्षों से वर्ष के प्रथम दिवस पर आयोजित सद्भाव संगम 2020 सद्भाव सेवा संगम समिति ऐसी ही अद्भुत प्रतिभाओ को जनपद गौरव के रूप में सम्मानित करता रहा है। यह बात नव वर्ष के अवसर पर मलिकमऊ जवाहर विहार कालोनी में आयोजित भव्य समारोह के संयोजक रविन्द्र नारायण श्रीवास्तव ने कहते हुए कहा कि राणा बेनी माधव की क्रांति भूमि ने राष्ट्र का नाम रौशन करने वाली प्रतिभाएं दी, आचार्य महावीर प्रसाद द्विवेदी से लेकर कारगिल में शौर्य का अदम्य उदाहरण प्रस्तुत कर वीरता का डंका बजाने वाले यही जन्मे है। साल के प्रथम दिन जनपद की दृष्टिबाधित मेधा, चिकित्सा, समाजसेवा, पत्रकारिता, शिक्षा, कृषि बागवानी, सुरक्षा जैसे मामले में अपनी छाप छोड़ने वाली प्रतिभाओ को जनपद गौरव सम्मान से सम्मानित किया गया। समारोह में जवाबी कीर्तन देश की जानी मानी कीर्तनकार क्रांति माला व मुकेश मृदुल के बीच हुआ। साल के प्रथम दिन जनपद के नौ रत्न सम्मानित किए गए। जिसमे महिला प्रेरणा रत्न के रूप में नगर पालिका अध्यक्ष श्रीमती पूर्णिमा श्रीवास्तव को कार्यक्रम के सहयोजक रवींद्र नारायण श्रीवास्तव, शिक्षक राम उजागर व महिला रोग विशेषज्ञ डा. गीता शर्मा ने अंग वस्त्र, बुके, तुलसी का पौधा व प्रशस्त पत्र देकर सम्मानित किया। समाज सेवा रत्न के रूप में विनय द्विवेदी को नगर पालिका अध्यक्ष श्रीमती पूर्णिमा श्रीवास्तव, डा. गीता शर्मा, रवींद्र नारायण ने सम्मानित किया। चिकित्सा रत्न के रूप में सिमहँस हास्पिटल के डारेक्टर डा. मनीष सिंह चैहान का सम्मान वरिष्ठ व्यापारी नेता पंकज मुरारका, नगर पालिका अध्यक्ष व उनके प्रतिनिधि मुकेश श्रीवास्तव व आयोजक ने किया। पत्रकारिता रत्न के रूप में रोहित मिश्रा का सम्मान शहर के प्रमुख चिकित्सक डा. बृजेश सिंह, नगर पालिका अध्यक्ष व उनके प्रतिनिधि मुकेश श्रीवास्तव ने किया। किसान रत्न के रूप में कृषि बागवानी से जनपद के लेमनमैन आनंद मिश्रा का सम्मान शहर के प्रमुख चिकित्सक डा. विकास द्विवेदी, आयोजक धीरज श्रीवास्तव, एडवोकेट आनंद दीक्षित ने किया। मेधावी छात्र रत्न के रूप में अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान में चयनित कार्तिकेय शर्मा को धर्म गुरु शाण्डिल्य मुनि महाराज, पत्रकार विजय यादव, नपाप अध्यक्ष व प्रतिनिधि मुकेश श्रीवास्तव ने सम्मानित किया। मेधावी छात्रा रत्न के रूप में जनपद में टॉपर रही सुनिधि वसुंधरा को निखत कंप्यूटर के डारेक्टर मो अयाज, दस्तक इंस्टीयूट के डारेक्टर अमरेंद्र सिंह व आयोजक ने सम्मानित किया।
दिव्यांग मेधावी रत्न के रूप में डीह की छात्रा शिवानी का सम्मान समाजसेवी दिलीप श्रीवास्तव, कमल श्रीवास्तव ने किया। सुरक्षा रत्न के रूप में महिला थानाध्यक्ष श्रीमती संतोष कुमारी का सम्मान हुआ। समारोह में सम्मानित प्रतिभाओ को अंगवस्त्र, पुष्पगुच्छ, अभिनन्दनपत्र, के साथ पवित्र तुलसी का पौधा देकर अतिथियों ने सम्मानित किया। प्रतिवर्ष होने वाले सम्मान समारोह द्वारा आयोजक जनपदीय प्रतिभाओ को समाज के समक्ष एक प्रेरणा के रूप में प्रस्तुत करने का बीड़ा उठाये है जिससे समाज को सकारात्मक दृष्टि के साथ उन्हें अपनी प्रेरणा के रूप में स्वीकार कर भविष्य का अच्छा मार्ग प्राप्त कर सके। कार्यक्रम में जिला सहकारी बैंक के डारेक्टर विजय प्रताप सिंह उर्फ पप्पू लोहिया, जिला उपाध्यक्ष भाजपा अनुभव कक्कड़, मोहित अग्रवाल, शिक्षक श्याम सुन्दर पांडेय, सूरज शुक्ला, सपा नेता नीलू पांडेय, रामा पैथोलॉजी के डारेक्टर डा. सी बी सिंह, डॉ डी आर मौर्या, डा. आशा शंकर वर्मा, डा. राजेश राजपूत, डा. सीमा राजपूत, एडवोकेट शुभम श्रीवास्तव, शिक्षक बृजेश यादव, अजय श्रीवास्तव, अमित, नीरज, सपा नेता अखिलेश माही, सुरेश पटेल, बब्लू यादव, पारुल बाजपेई, वीरेंद्र मौर्या आदि लोग सैकड़ों लोग उपस्थित रहे।


इस ब्लॉग से लोकप्रिय पोस्ट

पक्षी आपका भाग्य बदले

मनुष्य का जीवन अपने आसपास के वातावरण से ही प्रभावित होता है। व्यक्ति के आस-पास के पशु पक्षी उसके जीवन का अभिन्न अंग है। भारतीय ऋर्षियों तथा संसार के अध्यात्मवादियो ने संसार के पक्षियों को ना केवल ज्योतिष तथा मनुष्य के भाग्य से जोड़ा है। बल्कि पक्षियों को उपयोग शकुन ज्योतिष, फलित तथा प्रष्न ज्योतिष तथा अनेकों ज्योतिष, तांत्रिक उपचारों और शारीरिक मानसिक रोगों के निवारण में किया है। भारत मे पंच प़क्षी शास्त्र, कल्ली पुराण पर आधारित तोते द्वारा भविष्यवाणी, पक्षी तंत्र तथा शकुन ज्योतिष का प्रयोग आदिकाल से ही किया जाता है भारत मे गरूड़ जी, नीलकंठ, काकभुषुंडी,, हंस, जटायु व संपाती, शुकदेव जी आदि दिव्य पक्षियों तथा अनेक देवी देवताआंे वाहन के रूप मे पक्षियों को प्रयोग किये जाने का  वर्णन है। जैसे भगवान विष्णु का गरूड़, कार्तकेय जी का मयूर, माता लक्षमी का उल्लू, विश्वकर्मा, वरूण जी तथा स्वरसती जी का हंस आदि शनिदेव का कौआ आदि का प्राचीन काल मे पक्षियों द्वारा डाक सेवा युद्ध संबधी शकुन का भी काम लिया जाता था पक्षियों को स्वतंत्रता, नवीन विचारों, आनंद, तनाव, मुक्ति, प्रषंसा, यष, धन्यवाद देने, प्रजनन श

परिवर्तन योग से करें भविष्यवाणी

भारतीय ज्योतिशशास्त्र में भविष्यकथन के सैकड़ों सूत्रो का वर्णन है। इन्ही सूत्रों मे से एक है परिवर्तन योग जिसका वर्णन पाराशरीय और नाड़ी ग्रन्थों दोंनों मे पाया जाता है। हाँलाकि दोनो प्रकार के ग्रन्थों में इन सूत्रों को विभिन्न तरीको से प्रयोग किया गया है ज्योतिष मे परिवर्तन योग के तीन रूप पाये जाते हैं। 1. भाव परिवर्तन 2. राशि परिवर्तन 3. नक्षत्र परिवर्तन  भाव परिवर्तन पाराशरीय व कुछ नाड़ी ग्रन्थों जैसे षुक्र नाड़ी मे इसके सूत्रो का वर्णन पाया जाता है। जो भावा के स्वामियो के बीच स्थान परिवर्तन से बनता है। जैसे चतुर्थेश षष्ठ भाव मे जाय और षष्ठेश चतुर्थ भाव मे जाय। इसके भी तीन भेद हैं। 1. दो शुभ भावों के स्वामियों का परस्पर परिवर्तन जैसे लग्न व पंचम भाव का परिवर्तन या दो केन्द्रेशों का परिवर्तन या केन्द्र और त्रिकोण भाव मे परस्पर परिवर्तन। 2. दो त्रिकेशांे का परिवर्तन जो विपरीत राजयोग बनाता है। 3. किसी केन्द्रेश या त्रिकोणेश का त्रिकेश से परिवर्तन। जैसे दशमेश का द्वादेश से परिवर्तन या पंचमेश या द्वादेश के बीच परिवर्तन। 2. ग्रह या राशि परिवर्तन  इसका वर्णन स्व. आर. जी. राव द्वारा अनुवादित और

जेल जाने के योग

ज्योतिष शास्त्र अनुसार कुंडली के आठवें मतांतर से बारहवें भाव से कारावास तथा सजा का विचार किया जाता है। कुंडली के इस घर में राहु अगर अष्टमेश के साथ हो तो उसके अशुभ प्रभाव के कारण व्यक्ति को किसी बड़े अपराध के कारण जेल जाना पड़ता है। शनि  मंगल और राहू मुख्य रूप से यह तीन ग्रह एवम् इनका आपसी सम्बन्ध जेल के कारक है। शनि व 12 भाव सजा का कारक है। छठा भाव व मंगल राहू अपराध के कारक है। अगर किसी व्यक्ति की कुण्डली में मंगल और राहु एक साथ किसी भाव में बैठकर युति करते हैं तो जेल योग बनता है केतु रस्सी बेड़ी हथकड़ी का कारक ग्रह हैं अशुभ मंगल व राहु के बीच दृष्टि संबंध बनता हो तो अंगारक योग की वजह से ऐसा इंसान हिंसक स्वभाव वाला हो जाता है और अपराध करता है जिससे जेल जाना पड जाता है। शनि मंगल व राहु मुख्य रूप से जेल यात्रा कराने का भी योग बनाते हैं और इनकी युति या आपस में दृष्टि इस तरह की स्थितियां बना देती है कि आखिर इंसान को जेल जाना ही पड जाता है। जन्मकुंडली में सूर्यादि ग्रह समान संख्या में लग्न एवं द्वादश तृतीय एवं एकादश, चतुर्थ, दशम, षष्ठ एवं अष्टम भाव में स्थित हो तो यह बंधन योग बनाता है यह स्थिति