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मरीजों ने निशुल्क शिविर का लाभ लिया

रायबरेली। पंडित सूर्य दिन बाजपेई किस्मत में आयोजित निशुल्क स्वास्थ्य शिविर में 600 मरीजों में लाभ लिया। ग्राम प्रधान शशी सिंह एवं आईएमए के सहयोग से प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र बेहटा कला में आयोजित शिविर में वरिष्ठ चिकित्सक आईएमए अध्यक्ष व फिजीशियन डक्टर के.पी. वर्मा, डा. राजेश गुप्ता डा. बीरबल डा. बृजेश सिंह डा. मनीष सिंह चैहान मरीजों को देखा व दवाएं लिखी। सर्जन प्रदीप कुमार अग्रवाल हाइड्रोसील वह अन्य परेशानियों से जूझ रहे मरीजों को देखा साथ ही आपरेशन के लिए एक दर्जन मरीजों को चिन्हित कर 3 फरवरी की तिथि निर्धारित की। आर्थोपेडिक सर्जन डाक्टर संजीव जयसवाल आईएमए सचिव डा. मनीष त्रिपाठी ने हाथ पैर में दर्द से पीड़ित मरीजों को देखा। बाल रोग विशेषज्ञ वरिष्ठ चिकित्सक डा. के.एस. सिंह ज्ञानेंद्र चतुर्वेदी ने बीमार बच्चों को देखा कुपोषित बच्चों को चिन्हित किया दवा दी। महिला चिकित्सक डा. गीता शर्मा आदित्य सिंह ने महिला मरीजों को देखा। दंत रोग चिकित्सक डा. आशीष पांडे डाक्टर पवन सिंह डा. अशोक नेता से पीड़ित मरीजों को देखा वह दवा दी। वहीं चिकित्सा शिविर का उद्घाटन आईएमए अध्यक्ष डाक्टर के. वर्मा के साथ अन्य चिकित्सकों गांव के वरिष्ठ जन राधाकृष्ण तिवारी  विनयानंद बाजपेई राम वरदान सिंह एडवोकेट ने फीता काटकर किया। अतिथि पूर्व नगरपालिका अध्यक्ष राघवेंद्र प्रताप सिंह प्रवीण सिंह विनय द्विवेदी प्रेमेंद्र पाल गुलाटी अजीत सिंह राकेश सिंह राणा  राणा के साथ समस्त चिकित्सकों स्वास्थ्य विभाग के स्टाफ को अंग वस्त्र भेंट कर प्रधान प्रतिनिधि से गोपाल सिंह रोहिताश प्रताप सिंह राजेंद्र सिंह उर्फ रामू राजेश सिंह पवन सिंह हनुमान सिंह जनार्दन सिंह बच्चा सिंह विशंभर सिंह वंश बहादुर सिंह जगेश्वर सिंह अनंत विजय सिंह अन्य लोगों ने सम्मानित किया। अस्पताल के प्रभारी डाक्टर तापस त्रिपाठी ने आए हुए अतिथियों का स्वागत किया। शिविर में सभी मरीजों को निशुल्क दवा दी गई है इस मौके पर गौतम और सर्वेश अमन डब्लू सचिव विकास यादव गौरव सिंह सुरजन सिंह संतोष प्रजापत गुड्डू भदोरिया सुरेश सिंह ठाकुर दीन बचान चैरसिया किशन समेत अन्य लोग मौजूद थे। हाइड्रोसील से पीड़ित मरीजों का ऑपरेशन 3 फरवरी को लालगंज सीएससी में किया जाएगा।


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पक्षी आपका भाग्य बदले

मनुष्य का जीवन अपने आसपास के वातावरण से ही प्रभावित होता है। व्यक्ति के आस-पास के पशु पक्षी उसके जीवन का अभिन्न अंग है। भारतीय ऋर्षियों तथा संसार के अध्यात्मवादियो ने संसार के पक्षियों को ना केवल ज्योतिष तथा मनुष्य के भाग्य से जोड़ा है। बल्कि पक्षियों को उपयोग शकुन ज्योतिष, फलित तथा प्रष्न ज्योतिष तथा अनेकों ज्योतिष, तांत्रिक उपचारों और शारीरिक मानसिक रोगों के निवारण में किया है। भारत मे पंच प़क्षी शास्त्र, कल्ली पुराण पर आधारित तोते द्वारा भविष्यवाणी, पक्षी तंत्र तथा शकुन ज्योतिष का प्रयोग आदिकाल से ही किया जाता है भारत मे गरूड़ जी, नीलकंठ, काकभुषुंडी,, हंस, जटायु व संपाती, शुकदेव जी आदि दिव्य पक्षियों तथा अनेक देवी देवताआंे वाहन के रूप मे पक्षियों को प्रयोग किये जाने का  वर्णन है। जैसे भगवान विष्णु का गरूड़, कार्तकेय जी का मयूर, माता लक्षमी का उल्लू, विश्वकर्मा, वरूण जी तथा स्वरसती जी का हंस आदि शनिदेव का कौआ आदि का प्राचीन काल मे पक्षियों द्वारा डाक सेवा युद्ध संबधी शकुन का भी काम लिया जाता था पक्षियों को स्वतंत्रता, नवीन विचारों, आनंद, तनाव, मुक्ति, प्रषंसा, यष, धन्यवाद देने, प्रजनन श

परिवर्तन योग से करें भविष्यवाणी

भारतीय ज्योतिशशास्त्र में भविष्यकथन के सैकड़ों सूत्रो का वर्णन है। इन्ही सूत्रों मे से एक है परिवर्तन योग जिसका वर्णन पाराशरीय और नाड़ी ग्रन्थों दोंनों मे पाया जाता है। हाँलाकि दोनो प्रकार के ग्रन्थों में इन सूत्रों को विभिन्न तरीको से प्रयोग किया गया है ज्योतिष मे परिवर्तन योग के तीन रूप पाये जाते हैं। 1. भाव परिवर्तन 2. राशि परिवर्तन 3. नक्षत्र परिवर्तन  भाव परिवर्तन पाराशरीय व कुछ नाड़ी ग्रन्थों जैसे षुक्र नाड़ी मे इसके सूत्रो का वर्णन पाया जाता है। जो भावा के स्वामियो के बीच स्थान परिवर्तन से बनता है। जैसे चतुर्थेश षष्ठ भाव मे जाय और षष्ठेश चतुर्थ भाव मे जाय। इसके भी तीन भेद हैं। 1. दो शुभ भावों के स्वामियों का परस्पर परिवर्तन जैसे लग्न व पंचम भाव का परिवर्तन या दो केन्द्रेशों का परिवर्तन या केन्द्र और त्रिकोण भाव मे परस्पर परिवर्तन। 2. दो त्रिकेशांे का परिवर्तन जो विपरीत राजयोग बनाता है। 3. किसी केन्द्रेश या त्रिकोणेश का त्रिकेश से परिवर्तन। जैसे दशमेश का द्वादेश से परिवर्तन या पंचमेश या द्वादेश के बीच परिवर्तन। 2. ग्रह या राशि परिवर्तन  इसका वर्णन स्व. आर. जी. राव द्वारा अनुवादित और

जेल जाने के योग

ज्योतिष शास्त्र अनुसार कुंडली के आठवें मतांतर से बारहवें भाव से कारावास तथा सजा का विचार किया जाता है। कुंडली के इस घर में राहु अगर अष्टमेश के साथ हो तो उसके अशुभ प्रभाव के कारण व्यक्ति को किसी बड़े अपराध के कारण जेल जाना पड़ता है। शनि  मंगल और राहू मुख्य रूप से यह तीन ग्रह एवम् इनका आपसी सम्बन्ध जेल के कारक है। शनि व 12 भाव सजा का कारक है। छठा भाव व मंगल राहू अपराध के कारक है। अगर किसी व्यक्ति की कुण्डली में मंगल और राहु एक साथ किसी भाव में बैठकर युति करते हैं तो जेल योग बनता है केतु रस्सी बेड़ी हथकड़ी का कारक ग्रह हैं अशुभ मंगल व राहु के बीच दृष्टि संबंध बनता हो तो अंगारक योग की वजह से ऐसा इंसान हिंसक स्वभाव वाला हो जाता है और अपराध करता है जिससे जेल जाना पड जाता है। शनि मंगल व राहु मुख्य रूप से जेल यात्रा कराने का भी योग बनाते हैं और इनकी युति या आपस में दृष्टि इस तरह की स्थितियां बना देती है कि आखिर इंसान को जेल जाना ही पड जाता है। जन्मकुंडली में सूर्यादि ग्रह समान संख्या में लग्न एवं द्वादश तृतीय एवं एकादश, चतुर्थ, दशम, षष्ठ एवं अष्टम भाव में स्थित हो तो यह बंधन योग बनाता है यह स्थिति