नाग मंदिर

मध्य प्रदेश के होशंगाबाद जिले की हरदा तहसील में खिड़किया रेलवे स्टेशन से आठ किमी दक्षिण में पहटे गाँव में स्याणी नदी के मध्य एक चबूतरे पर एक करीब सौ सवा सौ साल पुराना नाग मंदिर बना हुआ है। जिसमें सालिगराम के आकार की अति प्राचीन शेष नारायण जी की प्रतिमा स्थापित है। जिसे गत सदी में शुरूआती सालों में पं मुकुंद राम जी ने बनवाया था जो महान नाग भक्त और चमत्कारी पुरूष थे। जिन्होने हजारों सर्प दंश पीड़ित को जीवन दान दिया था। बताया जाता हैंे कि वे महान साधक थे और साक्षात शेषनाग के अवतार है। उन्हें कई बार साक्षात शेषनाग ने दर्शन दिये थे। उनके जंम के बारे में कई विचित्र और सत्य घटनायें प्रचलित हैं। मुकंदराम जी का जंम विक्रम संवत 1825 में श्रावण शुक्ल पंचमी नागपंचमी को प्रातः चार बजे ब्रह्म मुहुर्त में पंडित कालूराम नागर तथा श्रीमती गंगा देवी के घर हुआ था। उनके जंम के तुरन्त बाद पिता को घर के बाहर कुछ अजीब सी आवाज सुनाई दी उन्होने बाहर निकल कर देखा तो घर के बाहर एक अति विशालकाय सर्प बैठा था जिसका फन असाधारण रूप से विशाल था अचानक उन्होंने देखा कि सर्प के स्थान पर स्वयं शेषनाग जी खड़े हैं और फिर वे भी अन्र्तध्यान हो गये। मुकुदराम जी बचपन से की नाग भक्त थे और उनके चारों और अक्सर सर्प रहा करते थे उन्हांेने ही यह मंदिर बनवाया था।