सीधे मुख्य सामग्री पर जाएं

नन्दिनी दारूक को 99.84 परसेन्टाइल अर्जित कर बालिका वर्ग में सिटी टापर

सिटी मोन्टेसरी स्कूल, लखनऊ के मेधावी छात्रों ने अभी हाल ही में घोषित हुए ‘आई.आई.टी.-जे.ई.ई. मेन्स’ परीक्षा परिणाम में अभूतपूर्व सफलता का परचम लहराकर विद्यालय का नाम पूरे देश में गौरवान्वित किया है। अभी तक मिली जानकारी के अनुसार, इस वर्ष सी.एम.एस. के 84 छात्र ‘आई.आई.टी.-जे.ई.ई. मेन्स’ परीक्षा में सफल हुए हैं, जिसमें सी.एम.एस. छात्रा नन्दिनी दारूक ने 99.84 परसेन्टाइल अर्जित कर बालिका वर्ग में सिटी टापर का गौरव अपने नाम किया है जबकि 17 छात्रों ने 99 परसेन्टाइटल से अधिक अंक अर्जित कर विद्यालय के गौरवमयी इतिहास में नया आयाम जोड़ा है। इन मेधावी छात्रों में नन्दिनी दारूक (99.84 परसेन्टाइल), आयुष कुमार द्विवेदी (99.85 परसेन्टाइल), श्रेयांस सिंह (99.85 परसेन्टाइल), पार्थ बंसल (99.73 परसेन्टाइल), आदर्श गोयल (99.71 परसेन्टाइल), विवान मैत्रेय (99.60 परसेन्टाइल), खुशी वर्मा (99.60 परसेन्टाइल), कनद (99.55 परसेन्टाइल), अनुभा त्रिपाठी (99.54 परसेन्टाइल), यश पन्त (99.50 परसेन्टाइल), आर्यन अग्रवाल (99.59 परसेन्टाइल), आदर्श कुमार (99.48 परसेन्टाइल), सत्विक चंद्र शुक्ला (99.42 परसेन्टाइल), अमृतांश नारायन (99.26 परसेन्टाइल), पियूष (99.24 परसेन्टाइल), ज्योदिरादित्य (99.22 परसेन्टाइल), श्रेया भगत (99.07 परसेन्टाइल) शामिल हैं। इंजीनियरिंग की प्रवेश परीक्षा में चयनित सी.एम.एस. छात्रों ने अपनी अभूतपूर्व सफलता के लिए सी.एम.एस. शिक्षकों के प्रति हार्दिक आभार व्यक्त किया है। 
 सी.एम.एस. संस्थापक डा. जगदीश गाँधी ने सभी सफल छात्रों को हार्दिक बधाई देते हुए उनके उज्जवल भविष्य की कामना की और कहा कि सी.एम.एस. के प्रतिभाशाली छात्रों की बदौलत ही पूरे विश्व में सी.एम.एस. की एक अलग पहचान बनी है।
 सी.एम.एस. के मुख्य जन-सम्पर्क अधिकारी श्री हरि ओम शर्मा ने बताया कि शुरूआती जानकारी के अनुसार, ‘आई.आई.टी.-जे.ई.ई. मेन्स’ परीक्षा में अभी तक सी.एम.एस. के 84 छात्रों की सफलता की जानकारी मिली है, जबकि काफी बड़ी संख्या में सफल छात्रों की जानकारी आनी अभी शेष है। उम्मीद है कि इस वर्ष सर्वाधिक संख्या में सी.एम.एस. छात्र इस प्रतिष्ठित परीक्षा में चयनित होकर नया कीर्तिमान स्थापित करेंगे।
 श्री शर्मा ने बताया कि सी.एम.एस. में आई.एस.सी. की पढ़ाई के दौरान ही छात्रों को प्रोफेशनल कोर्सो की तैयारी हेतु प्रोत्साहित किया जाता है। इसके अलावा, छात्रों की प्रतिभा को निखारने व संवारने के लिए प्रत्येक वर्ष विभिन्न अन्तर्राष्ट्रीय प्रतियोगिताओं के माध्यम से छात्रों को अन्तर्राष्ट्रीय मंच उपलब्ध कराया जाता है जिससे उनमें विभिन्न विषयों के ज्ञान के साथ साथ आत्मविश्वास का संचार भी होता है। इन्ही प्रयासों का प्रतिफल है कि विगत वर्षों की भाँति इस वर्ष भी सी.एम.एस. के मेधावी छात्रों ने आई.आई.टी.-जे.ई.ई. मेन्स परीक्षा में अपने मेधात्व का परचम लहराया है।


 


इस ब्लॉग से लोकप्रिय पोस्ट

पक्षी आपका भाग्य बदले

मनुष्य का जीवन अपने आसपास के वातावरण से ही प्रभावित होता है। व्यक्ति के आस-पास के पशु पक्षी उसके जीवन का अभिन्न अंग है। भारतीय ऋर्षियों तथा संसार के अध्यात्मवादियो ने संसार के पक्षियों को ना केवल ज्योतिष तथा मनुष्य के भाग्य से जोड़ा है। बल्कि पक्षियों को उपयोग शकुन ज्योतिष, फलित तथा प्रष्न ज्योतिष तथा अनेकों ज्योतिष, तांत्रिक उपचारों और शारीरिक मानसिक रोगों के निवारण में किया है। भारत मे पंच प़क्षी शास्त्र, कल्ली पुराण पर आधारित तोते द्वारा भविष्यवाणी, पक्षी तंत्र तथा शकुन ज्योतिष का प्रयोग आदिकाल से ही किया जाता है भारत मे गरूड़ जी, नीलकंठ, काकभुषुंडी,, हंस, जटायु व संपाती, शुकदेव जी आदि दिव्य पक्षियों तथा अनेक देवी देवताआंे वाहन के रूप मे पक्षियों को प्रयोग किये जाने का  वर्णन है। जैसे भगवान विष्णु का गरूड़, कार्तकेय जी का मयूर, माता लक्षमी का उल्लू, विश्वकर्मा, वरूण जी तथा स्वरसती जी का हंस आदि शनिदेव का कौआ आदि का प्राचीन काल मे पक्षियों द्वारा डाक सेवा युद्ध संबधी शकुन का भी काम लिया जाता था पक्षियों को स्वतंत्रता, नवीन विचारों, आनंद, तनाव, मुक्ति, प्रषंसा, यष, धन्यवाद देने, प्रजनन श

परिवर्तन योग से करें भविष्यवाणी

भारतीय ज्योतिशशास्त्र में भविष्यकथन के सैकड़ों सूत्रो का वर्णन है। इन्ही सूत्रों मे से एक है परिवर्तन योग जिसका वर्णन पाराशरीय और नाड़ी ग्रन्थों दोंनों मे पाया जाता है। हाँलाकि दोनो प्रकार के ग्रन्थों में इन सूत्रों को विभिन्न तरीको से प्रयोग किया गया है ज्योतिष मे परिवर्तन योग के तीन रूप पाये जाते हैं। 1. भाव परिवर्तन 2. राशि परिवर्तन 3. नक्षत्र परिवर्तन  भाव परिवर्तन पाराशरीय व कुछ नाड़ी ग्रन्थों जैसे षुक्र नाड़ी मे इसके सूत्रो का वर्णन पाया जाता है। जो भावा के स्वामियो के बीच स्थान परिवर्तन से बनता है। जैसे चतुर्थेश षष्ठ भाव मे जाय और षष्ठेश चतुर्थ भाव मे जाय। इसके भी तीन भेद हैं। 1. दो शुभ भावों के स्वामियों का परस्पर परिवर्तन जैसे लग्न व पंचम भाव का परिवर्तन या दो केन्द्रेशों का परिवर्तन या केन्द्र और त्रिकोण भाव मे परस्पर परिवर्तन। 2. दो त्रिकेशांे का परिवर्तन जो विपरीत राजयोग बनाता है। 3. किसी केन्द्रेश या त्रिकोणेश का त्रिकेश से परिवर्तन। जैसे दशमेश का द्वादेश से परिवर्तन या पंचमेश या द्वादेश के बीच परिवर्तन। 2. ग्रह या राशि परिवर्तन  इसका वर्णन स्व. आर. जी. राव द्वारा अनुवादित और

जेल जाने के योग

ज्योतिष शास्त्र अनुसार कुंडली के आठवें मतांतर से बारहवें भाव से कारावास तथा सजा का विचार किया जाता है। कुंडली के इस घर में राहु अगर अष्टमेश के साथ हो तो उसके अशुभ प्रभाव के कारण व्यक्ति को किसी बड़े अपराध के कारण जेल जाना पड़ता है। शनि  मंगल और राहू मुख्य रूप से यह तीन ग्रह एवम् इनका आपसी सम्बन्ध जेल के कारक है। शनि व 12 भाव सजा का कारक है। छठा भाव व मंगल राहू अपराध के कारक है। अगर किसी व्यक्ति की कुण्डली में मंगल और राहु एक साथ किसी भाव में बैठकर युति करते हैं तो जेल योग बनता है केतु रस्सी बेड़ी हथकड़ी का कारक ग्रह हैं अशुभ मंगल व राहु के बीच दृष्टि संबंध बनता हो तो अंगारक योग की वजह से ऐसा इंसान हिंसक स्वभाव वाला हो जाता है और अपराध करता है जिससे जेल जाना पड जाता है। शनि मंगल व राहु मुख्य रूप से जेल यात्रा कराने का भी योग बनाते हैं और इनकी युति या आपस में दृष्टि इस तरह की स्थितियां बना देती है कि आखिर इंसान को जेल जाना ही पड जाता है। जन्मकुंडली में सूर्यादि ग्रह समान संख्या में लग्न एवं द्वादश तृतीय एवं एकादश, चतुर्थ, दशम, षष्ठ एवं अष्टम भाव में स्थित हो तो यह बंधन योग बनाता है यह स्थिति