ऊँ वासुदेवाय नमः पंच महापुरूष योग

द थ्योरी आफ प्लेनटरी वाॅर का अध्ययन करते समय यह विचार मन में आयाकि पंच महापुरूष योग क्यों बनते है। उनके बनने का क्याकारण है? वास्तव मे जंम कुण्डली उस वर्ष का प्रतीक है। क्यो गोचर मे पंच महापुष योग नही बनता है। और यदि बनता है। तो उसके फलित होने की पैरा कन्डीशन क्या है। इस संबध मे जाॅन मेजर की जंम कुण्डली का अध्ययन करने पर बढे रोचक तथ्य सामने आये जाान मेजर  29 मार्च 1943 को स्टेन्डर्ड टाइम लंदन मे हुये थे उनके जन्म कालीन ग्रहों की स्थितियों का अध्ययन करने पर पता चलता है। कि उनका जंमकालीन लग्न मंगल मकर मे स्थित है। यद्यपि जिस समय वे प्रधानमंत्री बने (28 नवम्बर 1990) उस समय केवल बृहस्पति उनके सप्तम भाव मे उच्च का होकर लग्न को देख रहा था उस समय पंचम भाव का स्वामी शनि वृष मे होकर अपनी पूर्ण तृतीय दृष्टि से लग्नेश होने के कारण देख रहा था पंच महापुरूष योगों मे केवल मंगल ही उच्च का है। जो सप्तम भाव कर्क राशि को पूर्ण दृष्टि से देख रहा है। जंमकालीन शनि जो लग्नेश है। उसकी भी पूर्ण दृष्टि कर्क राशि पर है। जहाँ पंच महपुरूष योग बन रहा है। अतः गोचर का विचार पंच महापुरूष योग पर लागू होता है। जब तक लग्नेश का संबध ग्रह योगों से नही होता है। तब तक योग कभी फलीभूत नही होता है। अतः लग्नेश से ही गणना का आधार बनना चाहिये। मकर लग्न की कुण्डली मे शनि लग्नेश है। और यह पंचम भाव मे बैठकर द्वितीय पंचम, और लाभ भाव  को पूर्ण दृष्टि से देख रहा है। अतः इतने स्थानों पर राजयोग की संभावना बनती है। सर्वप्रथम लग्न से लेकर सभी भावों मे ग्रह है। 
ग्रहांे की स्थिति:-
1. लग्न  271.07
2.  सूर्य  15.57
3. चन्द्र  16.40
4. मंगल  293.50
5.  बुध  339.40
6. गुरू  84.00
7. शुक्र  17.08
8.  शनि  46.14
9.  राहू  12.17
10.  केतु  12.17
शुक्र दशा-14वर्ष 11 माह 26 दिन।
1. सूर्य  उ. भाद्रपद
2.  चन्द्र  पूर्वाषाढा
3. मंगल  घनिष्ठा
4.  बुध  उ भाद्रपद
5. गुरू  पुर्नवसु
6.  शुक्र  भरणी
7. शनि  रोहहणी
8.  राहू  मघा
9.  केतु  घनिष्ठा
10. लग्न  उ. भाद्रपद
राहू अन्र्तदशा-7.8.1990 से 24.12.1990। बुध भुक्ति। राहू दशा मे राहू का अंतर निष्कर्ष:-
1. ग्रह पचं महापुरूष योग बना रहे है। 
2. वर्तमन मे बनने वाला पंच महापुरूष पाप प्रभाव स्रे मुक्त होना चाहिये।
3. इसका कुछ संबध अपने भाव से होना चाहिये।
4. राजयोग का समय गोचर के आधार पर घटित होगा
5. वेध का अध्ययन ना केवल जमांक के सन्दर्भ मे बल्कि गोचर के आधार पर भी करना चाहिये।
6. जमांक की व्याख्या अलग से केवल ताजिक के आधार पर करना चाहिये। 
1. राज्य साहम।
2. कर्म साहम।