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फिलाडेल्फिया एक्सपेरीमेंट

11 जनवरी 1955 मे 55 वर्षीय अमरीकी खगोलशास़्त्री, पुरात्ववेत्ता, जंगल अन्वेषक, और खोजकर्ता डां. मौरिस जेसप को कार्लोस एलनडे नामक व्यक्ति द्वारा लिखे कुछ पत्र प्राप्त हुये जिनमे 28 अक्टूबर 1943 मे अमरीकी नेवी द्वारा फिलाडेल्फिया नेवल षिपयार्ड, फिलाडेल्फिया, पेंन्सुलानिया मे महान वैज्ञानिक अल्बर्ट आइनस्टाइन की यूनीफाइड फील्ड थ्योरी के आधार पर एक अमरीकी युद्धपोत यू.एस.एस. एल्डरिज. को पूर्ण रूप से गायब किये जाने के प्रयोग का वर्णन था जहाज प्रयोग की नीली रोशनी के क्षे़त्र मे क्रू मेंम्बरर्स सहित वास्तव मे पूर्णतः गायब हो गया था, प्रयोग क्षेत्र के बाहर के लोंगों को केवल लहलहाता सागर नजर आ रहा था जहाज पुनः 600 किमी दूर नोफोल्क बर्जीनिया मे प्रकृट हुआ वहां एक व्यापारिक जहाज के कर्मचारियों ने उसे कुछ मिनट देखा था वह वहां से फिर गायब हो गया और 10 मिनट बाद पुनः फिलाडेल्फिया मे वापस आ गया। पत्र लेखक एलन का दावा था कि प्रयोग के समय वह स्वयं निकट खड़े एक व्यापारी जहाज एण्डूª फरसेह मे उपस्थित था और पूरा प्रयोग उसने स्वयं अपनी आँखों से देखा था किन्तु जहाज के क्रू मेंम्बरर्स को इसकी भयानक कीमत चुकानी पड़ी थी जहाज के कुछ कर्मी अपंग व कर्मचारी पागल हो गये थे कुछ जहाज की दीवार से चिपक कर मर गये थे। कुछ कर्मचारियों ने दावा किया प्रयोग के काल मे वे दीवार के आर-पार जा सकते थे कुछ की यादाश्त चली गई थी। कुछ सूत्रों के अनुसार वैज्ञानिक अल्बर्ट आइनस्टाइन ने यूनीफाइड फील्ड थ्योरी की कोई खोज नही की थी उसे वैज्ञानिक निकोला टेस्ला ने 1943 मे खोजा था।


 


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पक्षी आपका भाग्य बदले

मनुष्य का जीवन अपने आसपास के वातावरण से ही प्रभावित होता है। व्यक्ति के आस-पास के पशु पक्षी उसके जीवन का अभिन्न अंग है। भारतीय ऋर्षियों तथा संसार के अध्यात्मवादियो ने संसार के पक्षियों को ना केवल ज्योतिष तथा मनुष्य के भाग्य से जोड़ा है। बल्कि पक्षियों को उपयोग शकुन ज्योतिष, फलित तथा प्रष्न ज्योतिष तथा अनेकों ज्योतिष, तांत्रिक उपचारों और शारीरिक मानसिक रोगों के निवारण में किया है। भारत मे पंच प़क्षी शास्त्र, कल्ली पुराण पर आधारित तोते द्वारा भविष्यवाणी, पक्षी तंत्र तथा शकुन ज्योतिष का प्रयोग आदिकाल से ही किया जाता है भारत मे गरूड़ जी, नीलकंठ, काकभुषुंडी,, हंस, जटायु व संपाती, शुकदेव जी आदि दिव्य पक्षियों तथा अनेक देवी देवताआंे वाहन के रूप मे पक्षियों को प्रयोग किये जाने का  वर्णन है। जैसे भगवान विष्णु का गरूड़, कार्तकेय जी का मयूर, माता लक्षमी का उल्लू, विश्वकर्मा, वरूण जी तथा स्वरसती जी का हंस आदि शनिदेव का कौआ आदि का प्राचीन काल मे पक्षियों द्वारा डाक सेवा युद्ध संबधी शकुन का भी काम लिया जाता था पक्षियों को स्वतंत्रता, नवीन विचारों, आनंद, तनाव, मुक्ति, प्रषंसा, यष, धन्यवाद देने, प्रजनन श

परिवर्तन योग से करें भविष्यवाणी

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जेल जाने के योग

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