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राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम

जिलाधिकारी, रायबरेली शुभ्रा सक्सेना के निर्देश पर मुख्य विकास अधिकारी राकेश कुमार ने राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम व एनीमिया मुक्त भारत अभियान की समीक्षा बैठक गांधी सभागार में करते हुए अधिकारियों को निर्देश दिये कि दोनो कार्यक्रम सरकार के शीर्ष प्राथमिकताओं के कार्यक्रमों से है। जिसे सभी एमओआईसी, एसीएमओ, एचयू, बीपीएम, बीसीपीएम, आरबीएसके जो भी अन्य अधिकारी व कर्मचारी को गम्भीरता से लेकर सरकार की मंशा के अनुरूप अपने कार्यो में रूची लेकर योजनाओं के क्रियान्वयन को सफल बनाया जाये। आरबीएसके कार्यक्रम 18 वर्ष 11 महीने एवं 29 दिन के आयु तक के सभी बच्चों के स्वास्थ्य संरक्षण हेतु है जो कि प्रदेश सहित पूरे देश में संचालित है। उत्तर प्रदेश में पूर्व से संचालित बाल स्वास्थ्य गारंटी योजना को राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम में समाहित कर लिया गया है। जनपद के 18 ब्लाक में 36 आरबीएसके मोबाइल हेल्थटीम भी कार्यरत है। इसके अलावा बड़ी संख्या मंे चिकित्साधिकारी, एएनएम, स्टाफ नर्स, फामसिस्ट आदि पूरी टीम इस योजना को सफल बनाने में लगी हुई है। इसके बाद भी राही,जगतपुर, डीह, दीनशाह गौरा आदि ब्लाकों की प्रगति संतोषजनक न पाये जाने पर सीडीओं ने सम्बन्धित अधिकारियों को कड़ी फटकार लगाई तथा निर्देश दिये कि लक्ष्य के अनुरूप कार्यो में प्रगति लाये।
 बैठक में सीडीओं ने भारत व उत्तर प्रदेश में एनीमिया की स्थिति पर चर्चा करते हुए कहा कि हर प्रदेश में हर दुसरी महिला व बच्चों एनीमिया से ग्रहसित है सबसे ज्यादा किशोरियों को एनीमिया का अधिक खतरा होता है एनीमिया के कारण ही मातृ मत्युदर मुख्य कारण है। नियमित आयरन की गोली लेने से एनीमिया में कमी लाई जा सकती है। एनीमिया के बारे में चिकित्सक जागरूकता के साथ ही आयरन व फोलिकएसिड की टेबलेट निर्धारित खुराक में लोगों में वितरित कराना सुनिश्चित करें तथा आयरन की गोलियों को किस प्रकार से खाना है इसके बारे में भी लोगों को विस्तार से बताये। 
 इस मौके पर मुख्य चिकित्साधिकारी डाॅ0 संजय कुमार शर्मा, अपर मुख्य चिकित्साधिकारी डाॅ0 एस0के0 चक, डाॅ0 एम नारायन, एडी सूचना प्रमोद कुमार सहित ब्लाकों के एमओआईसी आदि चिकित्सक व अन्य कर्मचारी भी उपस्थित थे।


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