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शरीर में तिल और लग्न निर्धारण

ज्योतिष के कुछ ग्रन्थों जैसे भाव कुतुहलम, वृहत संहिता, संकेत निधी, कुबलय माला, नष्ट जातक् तथा अनेक नाड़ी ग्रन्थों मे जातक के जंमस्थ ग्रहों की भावस्थ, तथा राशिस्थ स्थितियों के अनुसार शरीर के विभिन्न अंगों मे पाये जाने वाले तिलों और अंय चिंहों का वर्णन है। हांलाकि इसके सूत्र बिखरे हुये पाये जाते है पर यह इस बात का संकेत है कि कभी प्राचीन काल मे एक ऐसा दिव्य ग्रन्थ था जिसमे इस विद्या के सम्पूर्ण सूत्र उपलब्ध थे ऐसा एक विलुप्त ग्रन्थ कार्तिकेय जी द्वारा रचित अंग लक्षण शास्त्र था जिसे नाराज होकर भगवान शिव जी ने समुद्र में फेंक दिया था। प्रस्तुत लेख मे इस विषय के कुछ सूत्र दिये जा रहे हैं। जिन्हे कुछ दुर्लभ और अप्राप्य ग्रन्थों से अनुवादित किया गया है।
1. जंमस्थ चन्द्र व सूर्य काल पुरूष की जिस राशि पर हों उस राषि के शारीरिक अंग पर लाल रंग का तिलादि चिन्ह होगा तथा शनि व राहूगत राशि के अंग पर काला तिल होगा।
2. लग्न मे गुरू या शुक्र हो और 8 वें भाव मे पाप ग्रह हांे तो बांये हाथ मे तिल हो। मंगल शु़क्र योग 3, 6, 11 व 12 वें भाग मे होतो बांये हाथ मे चोट का चिन्ह हो। लग्न मे शुक्र हो और 8 वें भाव मे राहू हांे तो माथे, बांये कान, बंाये हाथ मे तिल हो।
3. यदि द्वितीय मे शुुक्र, लग्न मे सूर्य, या 8 वें मे हो और मंगल शनि युत तृतीय भाव मे हो कमर मे चिन्ह हो। यदि चतुर्थ भाव मे राहू व शु़क्र हो तो या लग्न मे शनि या मंगल हो तो कमर मे तिल हो।
4. यदि लग्नस्थ मंगल को शुक्र देखता हो तो लिंग या नितम्ब मे तिल हो या 5 या 9 भाव मे षनि या बुध या मंगल लग्न मे और राहू 5, 6, 9, भाव मे हो तो उपरोक्त फल मिले।
5. यदि बुध 3, 6, 11 मे हो  या चन्द्रमा नवम भाव मे हो तथा गुरू लग्न या 12 वें भाव मे हो तो नितम्ब मे चोट या गोलाकार धब्बा हो या गुदा मे तिल हो।
6. यदि मंगल लग्न मे हो या 7 वें भाव मे गुरू या शुक्र हो तो सिर पर चिन्ह होगा। यदि लग्न मे षु़क्र, चन्द्र व मंगल की युति हो तो 12 वें वर्श मे सिर पर चिन्ह होगा या यदि 7 भाव मे मे शु़क्र, गुरू व मंगल की युति हो तो उपरोक्त फल मिले।
7. लग्न मे शुक्र तथा 8 वें भाव मे राहू हो तो सिर या बांये कान मे चिन्ह हो। लग्न गुरू मे व 7 वें मे राहू हो तो शरीर के बांये भाग मे या बांये कान मे चिन्ह हो। कुछ विद्वानों के अनुसार लग्न गुरू मे तथा 8 वें या 12 वें भाव मे हो तो बांये कंधे पर चिन्ह हो। यदि 3. 6. 11 वें भाव मे मंगल, या गुरू शुक्र हो तो बांये कंधे पर चिन्ह हो।
8. यदि 3. 6. 11 वें भाव मे बुध, 12 वें गुरू व तृतीय मे शुक्र हो तो हृदय पर चिन्ह हो। लग्न मे बुध तथ सूर्य व शनि युति 10 वें भाव मे हो दांये भाग पर चिन्ह हो।
9.  8 वें भाव मे गुरू बुध युति हो शनि लग्न या चतुर्थ भाव मे हो तथा केन्द्र मे शु़क्र हो तो पेट पर चिन्ह हो। 10. यदि 3. 6. 11 वें भाव मे गुरू, तृतीय मे शुक्र हो तो हृदय पर चिन्ह हो तो पेट पर चिन्ह हो।
11. यदि दशम मे शनि राहू युति, 8 वें मे सूर्य नवम मे शुक्र तो बांयी नाभि पर चिन्ह हो। या 2 या 9 वें मे शुक्र, दशम मे शनि राहू युति, 8 वें मे सूर्य हो तो उपरोक्त फल मिले।
12. द्वितीय भाव मे चन्द्र, 10 भाव मे गुरू, तृतीय भाव मे शुक्र राहू युति हो तो कमर मे चिन्ह हो। तृतीय मे शुक्र हो तो हृदय पर चिन्ह हो। लग्न मे मंगल व शनि युति हो तथा चतुर्थ भाव मे शुक्र राहू युति होे तो हथेली, बांये पैर, या पंाव के तलुये मे चिन्ह हो। द्वितीय मे चन्द्र तथ शुक्र राहू युति तीसरे भाव मे हो कमर पर चिन्ह हो।
कुछ अनुभूत योग-
1. लग्न मे सूर्य कंठ या गुदा मे तिल हो।
2. मेष लग्न हाथ मे तिल वृष लग्न मुख, पीठ या बगल मे तिल वृश्चिक लग्न हाथ पांव मे पद्यम रेखाय मछली, कन्या का चन्द्रमा कुठ या लिंग मे तिलादि चिन्ह, वृश्चिक मे चन्द्र मछली, ब्रज पक्षी का चिन्ह कुंभ का चन्द्रमा हाथ मे चिन्ह। कन्या लग्न गोरा, कंठ जांध मे तिल, मस्सा, पेट मे तिल। मेष या वृष लग्न या चन्द्र राशि गुदा गर्दन पर तिल। लग्न मे मंगल व शुक्र युति या अकेला मंगल माथे पर चोटादि चिन्ह, 7 वें गुरू राहू योग माथे पर चोट चिन्ह लग्न मे गुरू बांयी बांह पर तिल 8 वें मे शुक्र पापग्रह युत माथे या बांयी बांह पर तिल। 7 वें मे राहू लग्न मे गुरू 8 वें मे पापयुत शुक्र बांये हाथ मे चिन्ह हो। 3, 6, 11 मे मंगल, या मंगल शुक्र युति 12 वें मे हो तो बांये अंग पर तिल। लग्न मे गुरू बांयी बांह पर तिल, लग्न मे या शनि मंगल त्रिकोण मे और उन पर शुक्र की दृष्टि यौनांग या गुदा की दृष्टि, शुक्र पंचम या नवम भाव मे बुघ 8 वें तथा शनि लग्न या चैथे भावा मे पेट मे तिल। लग्न मे मंगल व 7 वें भाव मे शुक्र या गुरू सिर मे तिल, लग्न मे राहू मुख मे दाग, घाव, राहू द्वितीय भाव मे टोढी पी तिल, तृतीय भाव मे भुजा पर तिल छठे भाव मे राहू कमर मे तिल, दाग लग्न मे या मेष मे शरीर मे मिल मस्से अधिक हों धनु मे षनि जांध पर तिल हो। यदि 3. 6. 11 वें भाव मे मंगल, या 12 वें भाव मे मंगल शुक्रयोग हो तो बांये कंधे पर चिन्ह हो। 


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