कुमारी कण्डम जलमग्न

प्राचीन तमिल ग्रन्न्थो जैसे कलिटेकई (संगम साहित्य), 5 वीं सदी का काव्य सिलापधिकरम व 12 वी सदी की टीका अदिया रक्कुनलार में पांडय् राजा द्वारा शासित कुमारी कण्डम या कुमारीक्कग्म नामक एक विशाल भूखंड का वर्णन है। जो वर्तमान कन्याकुमारी जिले के दक्षिण में स्थित था और कई हजार वर्ष पूर्व समुद्र मे डूब गया। जो अधिकांश हिन्द महासागर में फैला हुआ था और सुमात्रा और मलेशिया उसके पूर्वी सिरे हैं। उसके दक्षिण में कुमारी और उत्तर मे पहरूली दो नदी थी। कुमारी नदी के किनारे पर कई पर्वत थे। जो सात खडों और 49 उपखंडों मे बटा था उसके दो खण्ड़ वर्तमान मे कोल्लम और कन्याकुमारी के भाग हैं। इसमें द्वितीय तमिल संगम हुआ था। जो भूकंप और ज्वालामुखी से नष्ट हो गई। अययजही दर्शन मे भी अकिलट्रिआटू एम्मानई में भी कन्याकुमारी जिले के दक्षिणपूर्व 159 मील लंबी भूमि समुद्र मे डूब गयी। सन 1798 मे ब्रिटिश यात्री जे. गोल्डीन्घम दक्षिण भारत समुद्र तट पर महाबलिपुरम आये थे। उन्होने महाबलिपुरम की एक किवदन्ती के बारे मे लिखा हैं कि उस समय नाविकांे में यह भूमि सात मंदिरों की भूमि मानी जाती थी दंतकथा के अनुसार छह मंदिर समुद्र में डूब गये थे और सातवां तट पर स्थित है। दंतकथा तट पर बसे एक विशाल नगर के बारे बताती थी जिससे जल कर देवताओं मे उसे डूबो दिया।
 जर्मन भूगर्भशास्त्री वेगनर  कुमारी कंडम को रावण की लंका मानते हैं। जो 3500 वर्ष पूर्व डूब गई। सन 1991 मे देवान्य पावनर के शिष्य दावा किया कि सिधंु सभ्यता की लिपी तमिल है। कुमारी कंडम सभ्यता 50,000 हजार वर्ष ईसा पूर्व थी 20,000 हजार वर्ष ईसा पूर्व ईस्टर आईलैण्ड की तमिल सभ्यता नष्ट हो गई। 16,000 हजार वर्ष ईसा पूर्व कुमारी कंडम जलमग्न हो गया। जोएडस रिसोल्वेशन रिसर्च वेसल जो समुद्र की तह मे दो कि.मी. गहरा छेद कर चटट्ानों के नमूने एकत्र करता था ने खोज कर बताया कि दक्षिणी हिन्द महासागर मे आस्ट्रेलिया के आकार का एक तिहाई आकार का महाद्वीप 20 मिलियन वर्ष पूर्व समुद्र मे डूब गया था जो केरूग्युलेन प्लेटो पर था वेसल ने समुद्र तल में कई छेद कर कुछ ज्वालामुखी व अन्य पत्थरों पदार्थों से नमूने लिये जिसमें दो कि.मी. नीचे के नमूने में जो आस्टेलिया व भारत में पायी जाने वाली चटट्ानों से समानता रखते थे। टेक्सास विश्वविद्यालय के डा. माइक काॅफिन के अनुसार कि केरूग्युलेन प्लेटो कभी समुद्र जल से उपर थी वैज्ञानिकांे के अनुसार 110 मिलियन वर्ष पूर्व भारी ज्वालामुखी विस्फोट की श्रंखला के कारण समुद्र का जलस्तर उपर उठ गया और 20 मिलियन वर्ष पूर्व महाद्वीप डुबने लगा।