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उत्पाद सामान्य सुविधा केन्द्र

उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा संचालित एक जनपद एक उत्पाद सामान्य सुविधा केन्द्र सीएफसी योजनान्तर्गत काष्ठ कला (वुडवर्क) कलस्टर जिसमें टेस्टिंग लैब, डिजाईज डेवलपमेंट एण्ड टेªनिंग सेन्टर तकनीक अनुसंधान एवं विकास केन्द्र, उत्पाद प्रर्शन सहविक्रय केन्द्र, राॅ-मैटेरियल बैंक/कामॅन रिसोर्स सेन्टर, कामन प्रोडक्शन/प्रोसेसिंस सेन्टर, काॅमन लाॅजिस्टिक, सूचना संग्रह, विश्लेषण एवं प्रसार केन्द्र, पैकेजिंग, लेबिलिंग एवं बार कोडिंग की सुविधाये होंगी, की सीएफसी में एसपीवी के गठन हेतु आवेदन पत्र आमंत्रित किये जाते है। 
 संस्था में न्यूनतम 20 सदस्य होने चाहिए, कुल सदस्यों में न्यूनतम दो तिहाई सदस्य ओडीओपी उत्पाद से सम्बन्धित होने चाहिए, संस्था संक्षम पंजीयन प्राधिकारी के यहां पंजीकृत होनी चाहिए, संस्था के संविधान में सम्बन्धित उत्पाद से जुड़े हुए उत्पाद धारको तथा राज्य सरकार के एक प्रतिनिधि को सदस्य के रूप में शामिल करने के सुस्पष्ट प्राविधान होने चाहिए, संस्था के किसी भी सदस्य के पास संस्था के कुल शेयरों में से 10 प्रतिशत से अधिक शेयर नही होना चाहिए, योजनान्तर्गत स्वीकुत की जाने वाली परियोजनाओं के संचालन, प्रबन्धन एवं रख-रखाव का दायित्व सम्बन्धित एसपीवी का होगा तथा इसके संचालन प्रबन्धन एवं रख-रखाव पर आने वाले किसी भी प्रकार के आवर्ती व्यय इस योजान्तर्गत वहन नही किये जायेगे। अवधारणात्मक टिप्पणी (कन्सेप्ट नोट) के साथ सम्बन्धित फार्म जमा करेंगे, परियोजना हेतु समुचित विनिर्दिष्ट प्रयोजन हेतु उपयुक्त तथा भार विवाद रहित भूमि उपलब्ध कराने का दायित्व सम्बन्धित एसपीवी का होगा। परियोजना की स्थापना हेतु प्रस्तावित भूमि या तो एसपीवी के स्वामित्वाधीन होगी अथवा न्यूनतम 15 वर्षो हेतु लीज पर ली जा सकेगी। परियोजना लागत में भूमि की लागत किसी भी दशा में 25 प्रतिशत से अधिक आंकलित नही की जायेगी। भूमि की लागत में उक्त सीमा से अधिक व्यय भार एसपीवी द्वारा वहन किया जायेगा। एसपीवी द्वारा भूमि को राज्य सरकार के पक्ष में न्यूनतम 15 वर्षो तक बन्धक रखना होगा।
 उपरोक्त के सम्बन्ध में अधिक जानकारी हेतु इच्छुक आवेदक कार्यालय जिला उद्योग एवं उद्यम प्रोत्साहन केन्द्र रायबरेली में 25 जनवरी 2020 तक आवेदन-पत्र प्राप्त करना सुनिश्चित करें।


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मनुष्य का जीवन अपने आसपास के वातावरण से ही प्रभावित होता है। व्यक्ति के आस-पास के पशु पक्षी उसके जीवन का अभिन्न अंग है। भारतीय ऋर्षियों तथा संसार के अध्यात्मवादियो ने संसार के पक्षियों को ना केवल ज्योतिष तथा मनुष्य के भाग्य से जोड़ा है। बल्कि पक्षियों को उपयोग शकुन ज्योतिष, फलित तथा प्रष्न ज्योतिष तथा अनेकों ज्योतिष, तांत्रिक उपचारों और शारीरिक मानसिक रोगों के निवारण में किया है। भारत मे पंच प़क्षी शास्त्र, कल्ली पुराण पर आधारित तोते द्वारा भविष्यवाणी, पक्षी तंत्र तथा शकुन ज्योतिष का प्रयोग आदिकाल से ही किया जाता है भारत मे गरूड़ जी, नीलकंठ, काकभुषुंडी,, हंस, जटायु व संपाती, शुकदेव जी आदि दिव्य पक्षियों तथा अनेक देवी देवताआंे वाहन के रूप मे पक्षियों को प्रयोग किये जाने का  वर्णन है। जैसे भगवान विष्णु का गरूड़, कार्तकेय जी का मयूर, माता लक्षमी का उल्लू, विश्वकर्मा, वरूण जी तथा स्वरसती जी का हंस आदि शनिदेव का कौआ आदि का प्राचीन काल मे पक्षियों द्वारा डाक सेवा युद्ध संबधी शकुन का भी काम लिया जाता था पक्षियों को स्वतंत्रता, नवीन विचारों, आनंद, तनाव, मुक्ति, प्रषंसा, यष, धन्यवाद देने, प्रजनन श

परिवर्तन योग से करें भविष्यवाणी

भारतीय ज्योतिशशास्त्र में भविष्यकथन के सैकड़ों सूत्रो का वर्णन है। इन्ही सूत्रों मे से एक है परिवर्तन योग जिसका वर्णन पाराशरीय और नाड़ी ग्रन्थों दोंनों मे पाया जाता है। हाँलाकि दोनो प्रकार के ग्रन्थों में इन सूत्रों को विभिन्न तरीको से प्रयोग किया गया है ज्योतिष मे परिवर्तन योग के तीन रूप पाये जाते हैं। 1. भाव परिवर्तन 2. राशि परिवर्तन 3. नक्षत्र परिवर्तन  भाव परिवर्तन पाराशरीय व कुछ नाड़ी ग्रन्थों जैसे षुक्र नाड़ी मे इसके सूत्रो का वर्णन पाया जाता है। जो भावा के स्वामियो के बीच स्थान परिवर्तन से बनता है। जैसे चतुर्थेश षष्ठ भाव मे जाय और षष्ठेश चतुर्थ भाव मे जाय। इसके भी तीन भेद हैं। 1. दो शुभ भावों के स्वामियों का परस्पर परिवर्तन जैसे लग्न व पंचम भाव का परिवर्तन या दो केन्द्रेशों का परिवर्तन या केन्द्र और त्रिकोण भाव मे परस्पर परिवर्तन। 2. दो त्रिकेशांे का परिवर्तन जो विपरीत राजयोग बनाता है। 3. किसी केन्द्रेश या त्रिकोणेश का त्रिकेश से परिवर्तन। जैसे दशमेश का द्वादेश से परिवर्तन या पंचमेश या द्वादेश के बीच परिवर्तन। 2. ग्रह या राशि परिवर्तन  इसका वर्णन स्व. आर. जी. राव द्वारा अनुवादित और

जेल जाने के योग

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