राजनीतिक, सामाजिक और धार्मिक प्रतिस्पर्धा चरम पर है

देशभर में नागरिकता संशोधन कानून और राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर पर चर्चा चल रही इसके पक्ष में अधिक, विरोध में कम संख्या दिखाई दे रही है। जहां केन्द्र सरकार और भारतीय जनता पार्टी के राज्यों और उसके सहयोग से बनी सरकार समर्थन में खड़ी है। केरल विधान सभा में राज्यपाल आरिफ मुहम्मद खान के साथ दुव्र्यवहार और हंगामे की घटना से विधायिका की गरिमा को अघात लगा है। देश के अन्दर ही भड़काऊ भाषण दिये जा रहे है, अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय में भड़काऊ देने वाले डा. वफील को एसटीएफ गिरफ्तार भी किया। दूसरी घटना में नागरिकता संशोधन कानून को लेकर विरोध प्रदर्शनों में असम को देश से काटने का भाषण देने के आरोपित शरलीज इमाम को दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच ने बिहार से गिरफ्तार किया। नागरिकता संशोधन कानून के विरोध में हिंसक प्रदर्शनों के पीछे पापुलर फ्रंट आफ इंडिया कांग्रेस नेता कपिल सिब्बल और अधिवक्ता इंदिरा जय सिंह को भुगतान का भी मामला सामने आया है। जबकि कपिल सिब्बल ने पैसे लेने पर कहा, सुप्रीम कोर्ट में हदिया का केस लड़ा था उसी की फीस के रूप में उन्हें 77 लाख रूपये मिले थे।
नागरिकता संशोधन कानून पर सुप्रीम कोर्ट ने अंतरिम रोक लगाने से इंकार कर दिया है। कोर्ट ने कहा, वह केन्द्र सरकार को सुने बगैर एकतरफा कोई आदेश पारित नहीं करेगा। कोर्ट राष्ट्रीय जनसंख्या रजिस्टर और राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर को तीन महीने के लिए टालने की मांग को भी ठुकरा दी। कांग्रेस नेता और पूर्व कानून मंत्री कपिल सिब्बल का मत है, राज्य सरकारे नागरिकता संशोधन कानून को लागू करने मना नहीं कर सकती है। ऐसा करना न सिर्फ असंवैधानिक होगा, बल्कि आगे मुश्किलें भी खड़ी हो सकती हैं। नागरिकता संशोधन कानून के मुद्दे पर देशभर में राजनीतिक सामाजिक और धार्मिक प्रतिस्पर्धा चरम पर है। लोग सड़कों पर उतर आये। जब कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी, गृहमंत्री अमित शाह और उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ विरोध करने वालों पर सख्त हैं। हालात जो भी हो संसद से कानून बनने के बाद अब कोई भी राज्य सरकार विरोध कर अलग रास्ता अपना सके ऐसा संभव नहीं दिखाई दे रहा है। देश हित में सभी राजनीतिक पार्टियां और समाजिक संगठनों का दायित्व है कि इस गम्भीर मसले पर मिल-बैठकर इसका सर्वमान्य हल निकालकर देश की प्रगति के मार्ग को प्रशास्त करें।