सीधे मुख्य सामग्री पर जाएं

रेडियो दिवस धूमधाम से मनाया

सिटी मांटेसरी स्कूल, लखनऊ कम्युनिटी रेडियो ने बड़े ही उल्लासपूर्वक एवं धूमधाम से ‘विश्व रेडियो दिवस’ मनाया। इस अवसर पर कम्युनिटी रेडियो ने छात्रों व शिक्षकों के अलावा ग्रामीण समुदाय के सदस्यों के साथ मिलकर रेडियो कार्यक्रम का सजीव प्रसारण किया एवं विभिन्न सामाजिक मुद्दों पर कार्यशाला सम्पन्न की। सी.एम.एस. गोमती नगर स्थित कम्यूनिटी रेडियो के कार्यालय में उपस्थित पर्यावरणविद चन्द्रभूषण तिवारी, सामाजिक कार्यकर्ता अरूण सिंह, पूर्व अध्यापिका सरोज शुक्ला, नीलम मनोचा, ज्ञानमती, शांती, सतीश, विनिता, अंजू, प्रेरणा, कोमल आदि ने छात्रों से संवाद किया जबकि सी.एम.एस. गोमती नगर कैम्पस के छात्रों ने कविता (राइम्स), भजन, गीतों के शानदार प्रस्तुतिकरण से सभी को रेडियो कार्यक्रमो के प्रति जागरूक किया।
 इसके अलावा, मकदूमपुर गाँव के लोगो के साथ विभिन्न सामाजिक मुद्दों पर बातचीत का रेडियो पर लाइव प्रसारण किया गया। यह प्रसारण सामाजिक मुद्दों पर ग्रामीण लोगों के विचारों को आगे लाने में बहुत ही प्रभावशाली व सार्थक सिद्ध हुआ। इस अवसर पर उपस्थित ग्रामीण समुदाय के लोगों ने सी.एम.एस. संस्थापक डा. जगदीश गाँधी एवं डा. (श्रीमती) भारती गाँधी एवं सी.एम.एस. रेडियो टीम को विशेष धन्यवाद देते हुए कहा कि सी.एम.एस. कम्युनिटी रेडियो इस तरह के कार्यक्रमो से लोगो में जागरूकता फैलाने का प्रयास करता है जिससे कि समाज को सही दिशा मिल सके।
 सी.एम.एस. रेडियो के श्री आर के सिंह ने रेडियो के इतिहास पर प्रकाश डालते हुए कहा कि आज के डिजीटल युग में भी रेडियो का अपना अलग महत्व है क्योंकि इसकी पहुँच आज भी समुदाय के आखिरी व्यक्ति तक है और सूचना प्रसारण का यह अति सुगम साधन माना जाता है। सी.एम.एस. कम्युनिटी रेडियो के प्रमुख श्री वर्गीज कुरियन ने बताया कि सी.एम.एस. रेडियो पर स्वास्थ्य एवं पोषण, महिला सशक्तिकरण, समाज कल्याण एवं जल संरक्षण आदि विषयों पर भी कार्यक्रमों का प्रसारण किया जाता है। इन कार्यक्रमों के माध्यम से ग्रामीण लोगों में भी बहुत महत्वपूर्ण परिवर्तन आया है तथा उनमें भी कुछ अलग करने की भावना को बल मिला है, जोकि सी.एम.एस. का हमेशा से प्रयास रहा है।


इस ब्लॉग से लोकप्रिय पोस्ट

पक्षी आपका भाग्य बदले

मनुष्य का जीवन अपने आसपास के वातावरण से ही प्रभावित होता है। व्यक्ति के आस-पास के पशु पक्षी उसके जीवन का अभिन्न अंग है। भारतीय ऋर्षियों तथा संसार के अध्यात्मवादियो ने संसार के पक्षियों को ना केवल ज्योतिष तथा मनुष्य के भाग्य से जोड़ा है। बल्कि पक्षियों को उपयोग शकुन ज्योतिष, फलित तथा प्रष्न ज्योतिष तथा अनेकों ज्योतिष, तांत्रिक उपचारों और शारीरिक मानसिक रोगों के निवारण में किया है। भारत मे पंच प़क्षी शास्त्र, कल्ली पुराण पर आधारित तोते द्वारा भविष्यवाणी, पक्षी तंत्र तथा शकुन ज्योतिष का प्रयोग आदिकाल से ही किया जाता है भारत मे गरूड़ जी, नीलकंठ, काकभुषुंडी,, हंस, जटायु व संपाती, शुकदेव जी आदि दिव्य पक्षियों तथा अनेक देवी देवताआंे वाहन के रूप मे पक्षियों को प्रयोग किये जाने का  वर्णन है। जैसे भगवान विष्णु का गरूड़, कार्तकेय जी का मयूर, माता लक्षमी का उल्लू, विश्वकर्मा, वरूण जी तथा स्वरसती जी का हंस आदि शनिदेव का कौआ आदि का प्राचीन काल मे पक्षियों द्वारा डाक सेवा युद्ध संबधी शकुन का भी काम लिया जाता था पक्षियों को स्वतंत्रता, नवीन विचारों, आनंद, तनाव, मुक्ति, प्रषंसा, यष, धन्यवाद देने, प्रजनन श

परिवर्तन योग से करें भविष्यवाणी

भारतीय ज्योतिशशास्त्र में भविष्यकथन के सैकड़ों सूत्रो का वर्णन है। इन्ही सूत्रों मे से एक है परिवर्तन योग जिसका वर्णन पाराशरीय और नाड़ी ग्रन्थों दोंनों मे पाया जाता है। हाँलाकि दोनो प्रकार के ग्रन्थों में इन सूत्रों को विभिन्न तरीको से प्रयोग किया गया है ज्योतिष मे परिवर्तन योग के तीन रूप पाये जाते हैं। 1. भाव परिवर्तन 2. राशि परिवर्तन 3. नक्षत्र परिवर्तन  भाव परिवर्तन पाराशरीय व कुछ नाड़ी ग्रन्थों जैसे षुक्र नाड़ी मे इसके सूत्रो का वर्णन पाया जाता है। जो भावा के स्वामियो के बीच स्थान परिवर्तन से बनता है। जैसे चतुर्थेश षष्ठ भाव मे जाय और षष्ठेश चतुर्थ भाव मे जाय। इसके भी तीन भेद हैं। 1. दो शुभ भावों के स्वामियों का परस्पर परिवर्तन जैसे लग्न व पंचम भाव का परिवर्तन या दो केन्द्रेशों का परिवर्तन या केन्द्र और त्रिकोण भाव मे परस्पर परिवर्तन। 2. दो त्रिकेशांे का परिवर्तन जो विपरीत राजयोग बनाता है। 3. किसी केन्द्रेश या त्रिकोणेश का त्रिकेश से परिवर्तन। जैसे दशमेश का द्वादेश से परिवर्तन या पंचमेश या द्वादेश के बीच परिवर्तन। 2. ग्रह या राशि परिवर्तन  इसका वर्णन स्व. आर. जी. राव द्वारा अनुवादित और

जेल जाने के योग

ज्योतिष शास्त्र अनुसार कुंडली के आठवें मतांतर से बारहवें भाव से कारावास तथा सजा का विचार किया जाता है। कुंडली के इस घर में राहु अगर अष्टमेश के साथ हो तो उसके अशुभ प्रभाव के कारण व्यक्ति को किसी बड़े अपराध के कारण जेल जाना पड़ता है। शनि  मंगल और राहू मुख्य रूप से यह तीन ग्रह एवम् इनका आपसी सम्बन्ध जेल के कारक है। शनि व 12 भाव सजा का कारक है। छठा भाव व मंगल राहू अपराध के कारक है। अगर किसी व्यक्ति की कुण्डली में मंगल और राहु एक साथ किसी भाव में बैठकर युति करते हैं तो जेल योग बनता है केतु रस्सी बेड़ी हथकड़ी का कारक ग्रह हैं अशुभ मंगल व राहु के बीच दृष्टि संबंध बनता हो तो अंगारक योग की वजह से ऐसा इंसान हिंसक स्वभाव वाला हो जाता है और अपराध करता है जिससे जेल जाना पड जाता है। शनि मंगल व राहु मुख्य रूप से जेल यात्रा कराने का भी योग बनाते हैं और इनकी युति या आपस में दृष्टि इस तरह की स्थितियां बना देती है कि आखिर इंसान को जेल जाना ही पड जाता है। जन्मकुंडली में सूर्यादि ग्रह समान संख्या में लग्न एवं द्वादश तृतीय एवं एकादश, चतुर्थ, दशम, षष्ठ एवं अष्टम भाव में स्थित हो तो यह बंधन योग बनाता है यह स्थिति