सीधे मुख्य सामग्री पर जाएं

सरकार की योजनाओं की जानकारियां दी जा रही है

विकास व निर्माण कार्यो की प्रगति चैतरफा होकर सबका साथ-सबका विकास-सबका विश्वास मूलमंत्र साथक हो रहा है। सरकार के विकास एवं सुशासन के 30 माह सबका साथ सबका विकास सबका विश्वास नामक प्रदेश सरकार की पुस्तिका में दी गई जानकारियों के बारे में बताया और कहा कि केन्द्र सरकार की उपलब्धियों के साथ ही प्रदेश सरकार की उपलब्धियों का भी समावेश है। जिसकी जानकारी सूचना विभाग द्वारा सभी विकास खण्डों, तहसीलों, प्रमुख स्थानों पर एलईडी व विकास एवं सुशासन के 30 माह पूर्ण की महत्वपूर्ण पुस्तिका लोगों को देकर सरकार की योजनाओं की जानकारियां दी जा रही है। 
जिलाधिकारी शुभ्रा सक्सेना ने बताया कि प्रदेश सरकार द्वारा गोवंश संरक्षण पशुओं की सुरक्षा सरकार की प्राथमिकता है सभी जनपद में छुट्टा गोवंश के भरण-पोषण के लिए 2-2 वृहद गोवंश संरक्षण केन्द्रों की स्वीकृति दी गई है। प्रदेश सरकार विकास एवं सुशासन के 30 माह सबका साथ सबका विकास सबका विश्वास पूर्ण हो चुके है इस दौरान प्रदेश के साथ ही जनपद में अनेक निर्माण एवं विकास के कार्य पूर्ण किये जा चुके है। जो कार्य अभी पूर्ण नही है या आधे-अधूरे उन कार्यो को गुणवत्ता व मानक के अनुसार शीघ्र पूर्ण कर लिया जाये। उन्होंने प्रदेश सरकार की विकास एवं सुशासन के 30 माह महत्वपूर्ण पुस्तिका में प्रकाशित महत्वपूर्ण जानकारियों को जन-जन में पहुचाकर आम जन को लाभान्वित करें। पुस्तक में प्रदेश सरकार के साथ ही भारत सरकार की उपलब्धियों को भी विस्तार से बताया गया है। समाज के सभी वर्गो को समाजिक न्याय सुनिश्चित कराना, बाल अधिकारों का संरक्षण पाक्सों अधिनियम में संशोधन, किसानों की आमदनी दो गुनी करने के ठोस कदम, सभी का सशक्तिकरण, प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना, योग दिवस एवं फिट इण्डिया अभियान, सड़क सुरक्षाः सुगम परिवहन, देश में नम्बर वन, राजस्व खेत की मेड़ों तक की टेक्नालाजी, प्रदेश कैबिनेट द्वारा जनहित मेें लिए गये महत्वपूर्ण निर्णय, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के ट्विटर के चुर्नीदा ट्विस आदि महत्वपूर्ण जानकारियों के साथ ही विकास पूर्ण चित्रों का समावेश भी है। जनपद में विकास एवं सुशासन के 30 माह पूर्ण होने पर जनपद के समस्त विकास खण्डों में, तहसील प्रांगण सहित अनेक महत्वपूर्ण स्थलों पर होर्डिंग जानकारी व पुस्तक वितरण आदि के माध्यम से सरकार की उपलब्धियों का प्रचार-प्रसार किया जा रहा है। फिरोज गांधी डिग्री कालेज, रायबरेली की प्रचार्या यामिनी सिंह, डा0 अनिल कुमार, डा0 रामबाबू, डा0 संजय सिंह, डा0 बीएन खान, अम्बारा पश्चिम के प्रचार्या श्रीकान्त त्रिवेदी आदि सहित सैकड़ो छात्र-छात्राआंे आमजनों द्वारा पुस्तक प्राप्त करने के बाद बताया गया कि विकास एवं सुशासन के 30 माह पूर्ण होने पर वितरित पुस्तिका सरकारी योजनाओं की जानकारी के साथ ही प्रतियोगिता के लिये लाभ दायक है।



इस ब्लॉग से लोकप्रिय पोस्ट

पक्षी आपका भाग्य बदले

मनुष्य का जीवन अपने आसपास के वातावरण से ही प्रभावित होता है। व्यक्ति के आस-पास के पशु पक्षी उसके जीवन का अभिन्न अंग है। भारतीय ऋर्षियों तथा संसार के अध्यात्मवादियो ने संसार के पक्षियों को ना केवल ज्योतिष तथा मनुष्य के भाग्य से जोड़ा है। बल्कि पक्षियों को उपयोग शकुन ज्योतिष, फलित तथा प्रष्न ज्योतिष तथा अनेकों ज्योतिष, तांत्रिक उपचारों और शारीरिक मानसिक रोगों के निवारण में किया है। भारत मे पंच प़क्षी शास्त्र, कल्ली पुराण पर आधारित तोते द्वारा भविष्यवाणी, पक्षी तंत्र तथा शकुन ज्योतिष का प्रयोग आदिकाल से ही किया जाता है भारत मे गरूड़ जी, नीलकंठ, काकभुषुंडी,, हंस, जटायु व संपाती, शुकदेव जी आदि दिव्य पक्षियों तथा अनेक देवी देवताआंे वाहन के रूप मे पक्षियों को प्रयोग किये जाने का  वर्णन है। जैसे भगवान विष्णु का गरूड़, कार्तकेय जी का मयूर, माता लक्षमी का उल्लू, विश्वकर्मा, वरूण जी तथा स्वरसती जी का हंस आदि शनिदेव का कौआ आदि का प्राचीन काल मे पक्षियों द्वारा डाक सेवा युद्ध संबधी शकुन का भी काम लिया जाता था पक्षियों को स्वतंत्रता, नवीन विचारों, आनंद, तनाव, मुक्ति, प्रषंसा, यष, धन्यवाद देने, प्रजनन श

परिवर्तन योग से करें भविष्यवाणी

भारतीय ज्योतिशशास्त्र में भविष्यकथन के सैकड़ों सूत्रो का वर्णन है। इन्ही सूत्रों मे से एक है परिवर्तन योग जिसका वर्णन पाराशरीय और नाड़ी ग्रन्थों दोंनों मे पाया जाता है। हाँलाकि दोनो प्रकार के ग्रन्थों में इन सूत्रों को विभिन्न तरीको से प्रयोग किया गया है ज्योतिष मे परिवर्तन योग के तीन रूप पाये जाते हैं। 1. भाव परिवर्तन 2. राशि परिवर्तन 3. नक्षत्र परिवर्तन  भाव परिवर्तन पाराशरीय व कुछ नाड़ी ग्रन्थों जैसे षुक्र नाड़ी मे इसके सूत्रो का वर्णन पाया जाता है। जो भावा के स्वामियो के बीच स्थान परिवर्तन से बनता है। जैसे चतुर्थेश षष्ठ भाव मे जाय और षष्ठेश चतुर्थ भाव मे जाय। इसके भी तीन भेद हैं। 1. दो शुभ भावों के स्वामियों का परस्पर परिवर्तन जैसे लग्न व पंचम भाव का परिवर्तन या दो केन्द्रेशों का परिवर्तन या केन्द्र और त्रिकोण भाव मे परस्पर परिवर्तन। 2. दो त्रिकेशांे का परिवर्तन जो विपरीत राजयोग बनाता है। 3. किसी केन्द्रेश या त्रिकोणेश का त्रिकेश से परिवर्तन। जैसे दशमेश का द्वादेश से परिवर्तन या पंचमेश या द्वादेश के बीच परिवर्तन। 2. ग्रह या राशि परिवर्तन  इसका वर्णन स्व. आर. जी. राव द्वारा अनुवादित और

जेल जाने के योग

ज्योतिष शास्त्र अनुसार कुंडली के आठवें मतांतर से बारहवें भाव से कारावास तथा सजा का विचार किया जाता है। कुंडली के इस घर में राहु अगर अष्टमेश के साथ हो तो उसके अशुभ प्रभाव के कारण व्यक्ति को किसी बड़े अपराध के कारण जेल जाना पड़ता है। शनि  मंगल और राहू मुख्य रूप से यह तीन ग्रह एवम् इनका आपसी सम्बन्ध जेल के कारक है। शनि व 12 भाव सजा का कारक है। छठा भाव व मंगल राहू अपराध के कारक है। अगर किसी व्यक्ति की कुण्डली में मंगल और राहु एक साथ किसी भाव में बैठकर युति करते हैं तो जेल योग बनता है केतु रस्सी बेड़ी हथकड़ी का कारक ग्रह हैं अशुभ मंगल व राहु के बीच दृष्टि संबंध बनता हो तो अंगारक योग की वजह से ऐसा इंसान हिंसक स्वभाव वाला हो जाता है और अपराध करता है जिससे जेल जाना पड जाता है। शनि मंगल व राहु मुख्य रूप से जेल यात्रा कराने का भी योग बनाते हैं और इनकी युति या आपस में दृष्टि इस तरह की स्थितियां बना देती है कि आखिर इंसान को जेल जाना ही पड जाता है। जन्मकुंडली में सूर्यादि ग्रह समान संख्या में लग्न एवं द्वादश तृतीय एवं एकादश, चतुर्थ, दशम, षष्ठ एवं अष्टम भाव में स्थित हो तो यह बंधन योग बनाता है यह स्थिति