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अब लीजिये एक संस्कृत के विद्वान ने कॅरोना कवच ही लिख दिया है जो तेजी से वायरल हो रहा है

कोरोनारक्षाकवचम्  


त्वं करुणावतारोऽसि कोरोनाख्यविषाणुधृक् ।
रुद्ररूपश्च     संहर्ता     भक्तानामभयङ्करः ।। ०१।।


मृत्यञ्जय   महादेव   कोरोनाख्याद्विषाणुतः ।
मृत्योरपि  महामृत्यो  पाहि  मां   शरणागतम् ।।०२।।


मांसाहारात्समुत्पन्नाज्जगत्संहारकारकात्     ।
करुणाख्याद्विषाणोर्मां    रक्ष   रक्ष   महेश्वर ।। ०३।।


चीनदेशे जनिं लब्ध्वा भूमौ  विष्वक्प्रसर्पतः ।
जनातङ्काद्विषोणोर्मां सर्वतः पाहि शङ्कर ।। ०४।।


बालकृष्णः स्मरंस्त्वां वै कालकूटं न्यपादहो ।
न ममारार्भकः शम्भो ततस्त्वां  शरणं  गतः ।। ०५।।


समुद्रमथनोद्भूतात् कालकूटाच्च बिभ्यतः । 
त्वयैव   रक्षिता   देवा   देवदेव   जगत्पते ।। ०६।। 


परक्षेत्रे चिकित्स्योऽयं महामारो भयङ्करः ।
भीषयति जनान्सर्वान्  भव  त्राता  महेश्वर ।।०७।।


वैद्या वैज्ञानिका विश्वे परास्ताश्च चिकित्सकाः ।
आतङ्किता   निरीक्षन्ते  त्रातारं  त्वामुमेश्वर ।।०८।। 


रक्ष     रक्ष    महादेव    त्रायस्व    जगदीश्वर ।
पाहि पाहि प्रपन्नं मां कोरोनाख्याद् विषाणुतः ।।०९।।


नान्यं त्वदभयं जाने भीतानां भीतिनाशकृत् ।
अतस्त्वां   शरणं  यातं  भीतं  पाहि  महेश्वर ।।१०।। 


महायोगिन् महादेव कोरोनाख्यं विषाणुकम् । 
संविनाश्य जनान् रक्ष तव भक्तान् विशेषतः ।।११।।


मांसाहारान् सुरापानान्  कामं  संहरतादयम् ।
कोरोनाख्यो विषाणुस्तु मा हिंस्याच्छिवसेवकान् ।।१२।। 


भिक्षुयोगेश्वरानन्दकृतं          द्वादशपद्यकम् ।
जनः    पठन्     रक्षणीयस्त्वयैव     परमेश्वर ।।१३।।


 


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