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आखिर मैं हूं कौन’ पर परिचर्चा

ऋतंधरा मिश्रा की कविताएं महज कविताएं भर नहीं हैं, इनमें जीवन के तमाम मोर्चो पर लड़ रही एक स्त्री की संघर्ष कथा भी हैं, जो कभी-कभी आत्मकथा जैसी भी लगती है। ‘आखिर मैं हूं कौन’ की कविताओं में कोमलतम एहसास से लेकर कटुतम या कठोतम एहसास का भी दस्तावेजीकरण कवयित्री ने अत्यंत सघनता के साथ रूपायित किया है। उसके कथ्य में ही उसका शिल्प अन्तर्निहित है। ‘भाषा बहता नीर’ के मुहावरे को चरितार्थ करती उसकी आत्मभिव्यक्ति हमारी बहुत अपनी सी लगती है। यह विचार मशहूर गीतकार यश मालवीय ने गुफ्तगू द्वारा आयोजित ‘ऑनलाइन काव्य परिचर्चा’ में व्यक्त किया। उधमसिंह नगर की कवयित्री शगुफ्ता रहमान ने कहा कि ऋतंभरा मिश्रा की कविताओं को पढ़कर एहसास होता है कि यह रचनाएं केवल कविता नहीं बल्कि विभिन्न मोर्चों पर लड़ रही एक नारी की संघर्ष कहानी है। कानपुर की कवयित्री ममता देवी ने कहा कि ऋतंधरा ने अपनी कल्पना के सेतु में खोजती हुई खुद को ‘आखिर मै हूं कौन’ के पन्नों को भर डाला। उनकी ‘तलाश’ कविता स्पष्ट शब्दों में उनके पंछी मन की छटपटाहट को व्यक्त करने में सक्षम है कि उनकी निगाहे अभी भी वह तलाश कर रही है जिसे वह अभी तक खोज रही थी। गीतकार नीना मोहन श्रीवास्वत ने कहा कि ऋतंधरा जी की कवितायें नारी-संघर्ष और नारी-पुरूष विषमता को उजागर करती हैं। जहां ‘आखिर मैं हूँ कौन’ में वह स्वयं से प्रश्न करती हैं, वही दर्द को अपने अन्तरमन मे सहेजती और समेटती हुई एक स्वाभिमानी स्त्री अपने अस्तित्व हेतु संघर्षमय होने का भान कराती है। अर्चना जायसवाल के मुताबिक ऋतंधरा जी की कविता अत्यंत सरल हिदी भाषा का प्रयोग करते हुए नारी के अन्तर्मन में चल रहे विभिन्न पहलुओं को अत्यंत सजीव चित्रण करती है। वह अपनी कविता के माध्यम से नारी मन मे उठने वाले प्रश्न उत्तर को बड़ी ही सहजता से कह देती है। रचना सक्सेना के मुताबिक ऋतम्भरा की कविताएं भाषा और भाव दोनो ही दृष्टि से समृद्ध हैं। मनमोहन सिंह ‘तन्हा’ के अनुसार ‘आखिर मै हूं कौन’ शीर्षक से ही जाहिर है रचनाकार स्वयं इस प्रश्न का उत्तर खोजने का प्रयास कर रही हैं, अपनी साहित्यिक रचनाधर्मिता को आधार बना कर, और कहीं-कहीं इसका प्रत्यक्ष प्रमाण मिलता है। कवयित्री ने कहीं भी शब्दों या भाषा को बोझिल नहीं होने दिया है। संजय सक्सेना, अनिल मानव, अतिया नूर, डाॅ. नीलिमा मिश्रा, जमादार धीरज, नरेश कुमार महरानी, प्रभाशंकर शर्मा, शैलेंद्र जय, सागर होशियारपुरी आदि ने भी परिचर्चा में भाग लिया। संयोजन गुफ्तगू के अध्यक्ष इम्तियाज अहमद गाजी और अध्यक्षता यश मालवीय ने किया। मंगलवार को यश मालवीय की कविताओं पर परचर्चा होगी, अध्यक्षता मुरादाबाद के मशहूर गीतकार माहेश्वर तिवारी करेंगे।


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पक्षी आपका भाग्य बदले

मनुष्य का जीवन अपने आसपास के वातावरण से ही प्रभावित होता है। व्यक्ति के आस-पास के पशु पक्षी उसके जीवन का अभिन्न अंग है। भारतीय ऋर्षियों तथा संसार के अध्यात्मवादियो ने संसार के पक्षियों को ना केवल ज्योतिष तथा मनुष्य के भाग्य से जोड़ा है। बल्कि पक्षियों को उपयोग शकुन ज्योतिष, फलित तथा प्रष्न ज्योतिष तथा अनेकों ज्योतिष, तांत्रिक उपचारों और शारीरिक मानसिक रोगों के निवारण में किया है। भारत मे पंच प़क्षी शास्त्र, कल्ली पुराण पर आधारित तोते द्वारा भविष्यवाणी, पक्षी तंत्र तथा शकुन ज्योतिष का प्रयोग आदिकाल से ही किया जाता है भारत मे गरूड़ जी, नीलकंठ, काकभुषुंडी,, हंस, जटायु व संपाती, शुकदेव जी आदि दिव्य पक्षियों तथा अनेक देवी देवताआंे वाहन के रूप मे पक्षियों को प्रयोग किये जाने का  वर्णन है। जैसे भगवान विष्णु का गरूड़, कार्तकेय जी का मयूर, माता लक्षमी का उल्लू, विश्वकर्मा, वरूण जी तथा स्वरसती जी का हंस आदि शनिदेव का कौआ आदि का प्राचीन काल मे पक्षियों द्वारा डाक सेवा युद्ध संबधी शकुन का भी काम लिया जाता था पक्षियों को स्वतंत्रता, नवीन विचारों, आनंद, तनाव, मुक्ति, प्रषंसा, यष, धन्यवाद देने, प्रजनन श

परिवर्तन योग से करें भविष्यवाणी

भारतीय ज्योतिशशास्त्र में भविष्यकथन के सैकड़ों सूत्रो का वर्णन है। इन्ही सूत्रों मे से एक है परिवर्तन योग जिसका वर्णन पाराशरीय और नाड़ी ग्रन्थों दोंनों मे पाया जाता है। हाँलाकि दोनो प्रकार के ग्रन्थों में इन सूत्रों को विभिन्न तरीको से प्रयोग किया गया है ज्योतिष मे परिवर्तन योग के तीन रूप पाये जाते हैं। 1. भाव परिवर्तन 2. राशि परिवर्तन 3. नक्षत्र परिवर्तन  भाव परिवर्तन पाराशरीय व कुछ नाड़ी ग्रन्थों जैसे षुक्र नाड़ी मे इसके सूत्रो का वर्णन पाया जाता है। जो भावा के स्वामियो के बीच स्थान परिवर्तन से बनता है। जैसे चतुर्थेश षष्ठ भाव मे जाय और षष्ठेश चतुर्थ भाव मे जाय। इसके भी तीन भेद हैं। 1. दो शुभ भावों के स्वामियों का परस्पर परिवर्तन जैसे लग्न व पंचम भाव का परिवर्तन या दो केन्द्रेशों का परिवर्तन या केन्द्र और त्रिकोण भाव मे परस्पर परिवर्तन। 2. दो त्रिकेशांे का परिवर्तन जो विपरीत राजयोग बनाता है। 3. किसी केन्द्रेश या त्रिकोणेश का त्रिकेश से परिवर्तन। जैसे दशमेश का द्वादेश से परिवर्तन या पंचमेश या द्वादेश के बीच परिवर्तन। 2. ग्रह या राशि परिवर्तन  इसका वर्णन स्व. आर. जी. राव द्वारा अनुवादित और

जेल जाने के योग

ज्योतिष शास्त्र अनुसार कुंडली के आठवें मतांतर से बारहवें भाव से कारावास तथा सजा का विचार किया जाता है। कुंडली के इस घर में राहु अगर अष्टमेश के साथ हो तो उसके अशुभ प्रभाव के कारण व्यक्ति को किसी बड़े अपराध के कारण जेल जाना पड़ता है। शनि  मंगल और राहू मुख्य रूप से यह तीन ग्रह एवम् इनका आपसी सम्बन्ध जेल के कारक है। शनि व 12 भाव सजा का कारक है। छठा भाव व मंगल राहू अपराध के कारक है। अगर किसी व्यक्ति की कुण्डली में मंगल और राहु एक साथ किसी भाव में बैठकर युति करते हैं तो जेल योग बनता है केतु रस्सी बेड़ी हथकड़ी का कारक ग्रह हैं अशुभ मंगल व राहु के बीच दृष्टि संबंध बनता हो तो अंगारक योग की वजह से ऐसा इंसान हिंसक स्वभाव वाला हो जाता है और अपराध करता है जिससे जेल जाना पड जाता है। शनि मंगल व राहु मुख्य रूप से जेल यात्रा कराने का भी योग बनाते हैं और इनकी युति या आपस में दृष्टि इस तरह की स्थितियां बना देती है कि आखिर इंसान को जेल जाना ही पड जाता है। जन्मकुंडली में सूर्यादि ग्रह समान संख्या में लग्न एवं द्वादश तृतीय एवं एकादश, चतुर्थ, दशम, षष्ठ एवं अष्टम भाव में स्थित हो तो यह बंधन योग बनाता है यह स्थिति