देश के अनूठे गीताकार:यश मालवीय

ऐसी अनेक विशिष्टताएं हैं जो यश मालवीय को देश के सैकड़ों गीतकारों में एक अनूठा गीतकार बनाती हैं, जबकि नयी कविता की आंधी में छंदबद्ध कविता को आलोचकों, संपादकों ने हीन मानकर ‘मुख्यधारा’ की कविता से बाहर कर दिया। यश मालवीय उन गिने चुने गीतकारों में हैं, जिन्हें हर साहित्यिक पत्रिका ने ससम्मान छापा है। यश ने आलोचकों के इस आरोप को भी झुठलाया है कि गीत विधा मे समकालीन जटिल यथार्थ की अभिव्यक्ति नहीं की जा सकती। जबकि अधिकांश गीतकारों ने गजल को अपनाकर गीत से दूरी बना ली, यश गीतों की डोर मजबूती से थामे रहे। 



यह विचार आकाशवाणी के पूर्व प्रबंध निदेशक लक्ष्मी शंकर वाजपेयी ने मंगलवार को साहित्यिक संस्था गुफ्तगू द्वारा आयोजित ऑनलाइन साहित्यिक परिचर्चा में यश मालवीय के गीतों पर व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि यश ने अपने गीतों में वर्तमान समय की धड़कनों को जितनी कुशलता से संजोया है, व्यस्था की अव्यवस्था को चुनौती दी है वह भी उल्लेखनीय है। नोएडा के मशहूर साहित्याकर विज्ञान व्रत का कहना है कि अपने नवगीतों में प्रयुक्त बिम्बों में जो टटकापन यश के यहां मिलता है वह उनकी पहचान है। साधारण से कथ्य को भी  नवगीत में एक विशिष्ट भव्यता के साथ परोसना यश
मालवीय की विशेषता है। कहन में सहजता किन्तु अंदाज बेहद मारक। बेगूसराय, बिहार के शायर मासूम रजा राशदी ने कहा कि मैंने बहुत पहले नंद लाल पाठक जी की एक कविता सुनी थी, ‘मां सुना दो मुझे वो कहानी, जिसमें राजा न हो न हो रानी’. जब मैंने यश मालवीय जी को पढ़ा तो ऐसा लगा कि वो नंद लाल पाठक जी के सपनों को साकार करने के लिए ही कलम उठाते हैं। कवयित्री रचना सक्सेना ने कहा कि गीतों के बोल गूजते ही पूरा माहौल गीत के रस में डूब जाऐ जब कभी ऐसे गीतकार को याद किया जाता है तो होठो पर यश मालवीय जी का ही नाम आता हैै। औरैया की शायरा अतिया नूर ने यश मालवीय को हिंदी साहित्य के फलक का चमकता सितारा बताया। अर्चना जायसवाल ने यश को वर्तमान की सामाजिक समस्या को कविता के माध्यम से उजागर करने वाला गीतकार बताया। संजय सक्सेना, इश्क सुल्तानपुरी, नीना मोहन श्रीवास्तव, शैलेंद्र जय, प्रभाशंकर शर्मा, मनमोहन सिंह ‘तन्हा’, डॉ. शैलेष गुप्त ‘वीर’, शगुफ्ता रहमान, सम्पदा मिश्रा, तामेश्वर शुक्ल ‘तारक’, डाॅ. नीलिमा मिश्रा, ऋतंधरा मिश्रा, रमोला रूथ लाल, फरमूद इलाहाबादी, शिवा शंकर पाण्डेय और सागर होशियारपुरी ने भी विचार व्यक्त किया। संयोजन गुफ्तगू के अध्यक्ष
इम्तियाज अहमद गाजी ने किया। बुधवार को रचना सक्सेना के काव्य संग्रह ‘किसकी रचना’ पर परिचर्चा होगी।